”ये सरकार कैसी हो गई है कि उसे जनता की परवाह ही नहीं है, क्यों वो सोचती है कि हार नहीं सकती और जब तक EVM रहेगी वो हार नहीं सकती है तो ये पक्की बात है कि सरकार की जान EVM में अटकी हुई है।”

चुनाव आयोग ने शुक्रवार (5 जनवरी 2024) को दो टूक जवाब देते हुए कह दिया कि EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं है। दरअसल कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें EVM को लेकर संदेह जताया था और साथ ही EVM के मुद्दे पर ‘इंडिया’ गठबंधन के एक डेलिगेशन के लिए मुलाकात का वक़्त भी मांगा था लेकिन चुनाव आयोग ने इनकार कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने चुनावों में EVM के इस्तेमाल पर भरोसा जताया है। जहां एक तरफ कल (5 जनवरी) चुनाव आयोग ने भले ही ‘इंडिया’ गठबंधन से मुलाकात करने से मना कर दिया वहीं दूसरी तरफ कल शाम ही दिल्ली में EVM को लेकर एक मार्च निकालने की कोशिश की गई। ‘मिशन सेव कॉन्स्टिटूशन’ की कॉल पर पटियाला हाउस कोर्ट के गेट नंबर-4 से चुनाव आयोग के ऑफिस तक ये मार्च जाना था। इस मार्च की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील महमूद प्राचा और भानु प्रताप कर रहे थे। सर्द मौसम होने के बावजूद लोगों की अच्छी-ख़ासी संख्या यहां दिखाई दी लेकिन लोगों से ज़्यादा पुलिस और सुरक्षा बल की तैनाती की गई थी।

पैदल मार्च को पुलिस ने रोका

शाम चार बजे के करीब जबरदस्त नारेबाजी के साथ मार्च शुरू हुआ। इस दौरान नारे लगाए गए ‘EVM हटाओ, देश बचाओ’ लेकिन जैसे ही ये लोग दस कदम आगे बढ़े पुलिस ने मार्च को रोकना शुरू कर दिया। और देखते ही देखते भारी पुलिस बल ने महमूद प्राचा और भानु प्रताप समेत प्रोटेस्ट में शामिल लोगों को बस में बैठना शुरू कर दिया।

पुलिस के रोकने के बावजूद दोनों ही अधिवक्ताओं ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी। दरअसल ये लोग मांग कर रहे थे कि चुनाव आयोग उन्हें 50 EVM दे ताकि वे दिखा सकें कि EVM से छेड़छाड़ हो सकती है उसे हैक किया जा सकता है। लेकिन इन लोगों को तो पुलिस ने चंद कदम बाद ही रोक लिया और आगे नहीं बढ़ने दिया।

”देश के संविधान को बचाना ज़रूरी है”

प्रोटेस्ट मार्च में शामिल भानु प्रताप ने कहा कि ”EVM से निजात दिलाने के लिए अगर हम लोगों को बलिदान भी देना पड़े तो कोई दिक्कत नहीं है, और अगर इसमें समय भी लगे तो भी कोई दिक्कत नहीं है लेकिन इस देश को बचाना ज़रूरी है, इस देश के संविधान को बचाना ज़रूरी है, इस देश के लोकतंत्र को बचाना ज़रूरी है और सबसे ज़्यादा इस देश की जनता को जो हमारी आने वाली पीढ़ी है उसके भविष्य को बचाना बहुत ज़रूरी है।”

”कभी BJP ने ख़ुद EVM का विरोध किया था”

वहीं सीनियर वकील महमूद प्राचा ने कहा कि ”कोई भी देश का नागरिक जो संविधान पसंद करता है, बाबा साहब के संविधान को चाहता है वो EVM के खिलाफ होगा, EVM का विरोध करेगा और बैलट पेपर का समर्थन करेगा” लेकिन जब प्राचा साहब से पूछा गया कि उनकी इस मुहिम में क्या उन्हें राजनीतिक पार्टियों का भी समर्थन मिल रहा है तो उनका कहना था कि ”ये लड़ाई हमारी नहीं है ये जनता कि लड़ाई है और जनता के साथ तो हर राजनीतिक पार्टी है, कभी बीजेपी ने ख़ुद EVM का विरोध किया था।” उन्होंने आगे कहा कि ”आज एमपी, एमएलए EVM से बनते हैं, हाल ही में तीन राज्यों में चुनाव के बाद बीजेपी के तीन-तीन पूर्व सीएम को साइड कर दिया गया और वे चुप बैठ गए क्योंकि उन्हें कह दिया गया था कि ”तुम्हारी वजह से वोट नहीं मिला बल्कि EVM से वोट आए हैं” इसी वजह से वे भी चुप हो गए”।

”जनता ने आंदोलन शुरू कर दिया है”

प्राचा साहब ने ये भी कहा कि ”इलेक्शन कमीशन जो बार-बार चैलेंज कर रहा है कि कोई हैक करके तो दिखाए, लेकिन हैक तो तभी करेंगे जब वे हाथ में देंगे।” साथ ही उन्होंने कहा कि EVM के लिए CAA-NRC से बड़ा आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि ”जब देश बचाने की बात आएगी तो शांतिपूर्ण ढंग से जैसे CAA-NRC के प्रोटेस्ट हुए थे, किसान आंदोलन हुआ था उससे भी बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। अभी तो हमने लोगों को रोका हुआ है।” उन्होंने ये भी कहा कि ”जो जनता चाहती है वही होता है और जनता ने आंदोलन शुरू कर दिया है”।

”चुनाव आयोग से वादा कर रहे हैं हम दोबारा आएंगे”

पुलिस ने जैसे ही मार्च कर रहे लोगों को हिरासत में लेना शुरू किया दोनों अधिवक्ता (महमूद प्राचा और भानु प्रताप) नाराज़ हो गए। भानु प्रताप ने कहा कि ”जिस तरह से पुलिस हमें गिरफ़्तार कर रही है और इलेक्शन कमीशन तक नहीं जाने दे रही है, ये इस बात का सबूत है कि EVM में गड़बड़ी है, EVM में बेईमानी है।” वहीं महमूद प्राचा ने कहा कि ”चाहे तो हमें जेल में बंद कर दें, UAPA लगा दें, लेकिन EVM से चुनाव नहीं होने देंगे, चुनाव आयोग से वादा कर रहे हैं हम दोबारा आएंगे वे 50 मशीनें तैयार रखें।” हिरासत में लिए गए लोगों को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया लेकिन कुछ घंटों बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

”सरकार की जान EVM में अटकी हुई है”

इस मार्च में दिल्ली यूनिवर्सिटी की पूर्व प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता नंदिता नारायण ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि ”मुझे देश की जनता और सभी विपक्षी पार्टियों से कहना है कि EVM के खिलाफ आंदोलन से ज़रूरी कोई आंदोलन इस देश में ज़रूरी नहीं है। कितने भी आंदोलन आप कर लें, कितने भी आप नाइंसाफी के खिलाफ आवाज़ उठाएं अगर देश की सरकार को लगता है और सत्ताधारी पार्टी को लगता है कि जनता उसको हटा नहीं सकती, वो हार नहीं सकती तो आपके सारे आंदोलन बेकार हैं।” उन्होंने मार्च करने से रोकने पर कहा कि ”लोकतंत्र में जिस तरह से आपकी आवाज़ को दबाया जा रहा है तो आपको पता है कि आपके लोकतंत्र को कितना खतरा है और कैसी ये सरकार हो गई है कि उसे जनता की परवाह ही नहीं है, क्यों वो सोचती है कि वे हार नहीं सकती और जब तक EVM रहेगी वो हार नहीं सकती ये तो पक्की बात है, सरकार की जान EVM में अटकी हुई है, EVM हटा दोगे सरकार गिर जाएगी, यही पार्टी जो सत्ता में है इन्होंने तीन साल आंदोलन चलाया था कि EVM हटाया जाए, सुब्रमण्यम स्वामी ने पीटिशन फाइल किया था सुप्रीम कोर्ट में और जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि EVM हटाया जाए या EVM के साथ VVPAT मशीन लगाई जाए और VVPAT की पर्ची बाहर आए और मतदाता को दिखे, पता चले।”

EVM से चुनाव के खिलाफ राजनीतिक पार्टियों से लेकर कई संगठन आवाज़ उठा रहे हैं लेकिन जिस तरह से कल हुए मार्च को चंद कदम बाद ही रोक दिया गया उससे तो यही लगता है कि EVM को हटाने का संघर्ष लंबा हो सकता है।

Source: News Click