भारत का समग्र स्कोर 2023 में 39 था, वहीं 2022 में यह 40 था। 2022 में भारत का रैंक 85 था।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 के लिए भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में भारत 180 देशों में 93वें स्थान पर है और इसका समग्र स्कोर काफी हद तक अपरिवर्तित रहा है।

सूचकांक में विशेषज्ञों और उद्योग क्षेत्र के लोगों के अनुसार 180 देशों और क्षेत्रों को सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के स्तर पर रखा जाता है। इसमें 0 से 100 तक मानदंड रखा गया है जिसमें 0 अत्यंत भ्रष्ट के लिए और 100 पूरी तरह स्वच्छ छवि के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

भारत का समग्र स्कोर 2023 में 39 था, वहीं 2022 में यह 40 था। 2022 में भारत का रैंक 85 था।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘भारत (39) के स्कोर में उतार-चढ़ाव इतना छोटा है कि किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है। हालांकि, चुनावों से पहले, भारत में नागरिकों के लिए स्थान सिकुड़ता देखा जा रहा है जिसमें एक (दूरसंचार) विधेयक का पारित होना भी शामिल है जो मौलिक अधिकारों के लिए ‘गंभीर खतरा’ हो सकता है।’’

इसमें कहा गया है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान (133) और श्रीलंका (115) अपने अपने कर्ज के बोझ तले दबे हैं और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘हालांकि, दोनों देशों में मजबूत न्यायिक निगरानी है, जो सरकार को नियंत्रण में रखने में मदद कर रही है। पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने अपने संविधान के अनुच्छेद 19ए के तहत अधिकार का पहले से प्रतिबंधित संस्थानों तक विस्तार करके नागरिकों के सूचना के अधिकार को मजबूत किया है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश (149) अल्प विकसित देश (एलसीडी) के स्तर से ऊपर उठा है और आर्थिक विकास से वहां गरीबी में लगातार कमी आ रही है और जीवनशैली में सुधार हो रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन (76) ने पिछले दशक में भ्रष्टाचार के लिए 37 लाख से अधिक सार्वजनिक अधिकारियों को दंडित करके अपनी आक्रामक भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई से सुर्खियां बटोरीं।

इसमें कहा गया है कि इन मामलों के गहन अध्ययन से पता चला है कि सरकारी अधिकारी अपनी आय बढ़ाने के एक तरीके के रूप में अक्सर भ्रष्टाचार का सहारा लेते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र 2024 में एक बड़े चुनावी वर्ष का सामना कर रहा है, जिसमें बांग्लादेश, भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सोलोमन द्वीप, दक्षिण कोरिया और ताइवान में चुनाव होंगे।

भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआई) में कहा गया है कि एक और वर्ष ऐसा होगा जिसमें भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में कोई सार्थक प्रगति नहीं होगी।

Source: Siasat Daily