लज्जा खो देने वाला व्यक्ति सब कुछ खो देता है — यह कहावत असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा जैसे नेताओं पर पूरी तरह लागू होती है। अपने व्यवहार और बयानों के माध्यम से वे केवल एक राजनीतिक नेता के रूप में ही नहीं, बल्कि कम से कम एक इंसान के रूप में पहचाने जाने के योग्य भी नहीं रह गए हैं। एक समय चाय के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध रहा असम आज उनकी कटु और द्वेषपूर्ण भाषा के कारण बदनामी की ओर बढ़ता दिख रहा है।
महिलाओं पर अत्याचार, गर्भवती महिलाओं की मौत, बच्चों में बढ़ती कुपोषण की समस्या, श्रमिकों का शोषण और पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहे असम में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए वे जातीय और सांप्रदायिक नफरत का बीज बोकर हिंसा की फसल काटने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्होंने नफरत की राजनीति को ही एकमात्र रास्ता मान लिया है। उनके हालिया बयान उनकी मानसिक स्थिति के अत्यधिक उग्र होने की ओर संकेत करते हैं। असम को उनसे बचाने के लिए या तो उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग करना होगा या मानसिक उपचार की आवश्यकता पर विचार करना पड़ेगा — ऐसी स्थिति बनती दिख रही है।
एसआईआर लागू होने के बाद से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा के बयान और आचरण ने पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि एसआईआर के तहत लगभग 5 लाख “मिया” (बांग्ला भाषी मुसलमानों) के नाम हटाए जाएंगे। इससे यह संदेश गया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य ही बांग्ला भाषी मुसलमानों को मतदाता सूची से हटाना है। संशोधन से पहले ही कितने लोगों को बाहर किया जाएगा, यह मुख्यमंत्री द्वारा घोषित किए जाने के बाद प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। चुनाव आयोग को तत्काल स्पष्टीकरण देकर अपनी निष्पक्षता साबित करनी चाहिए थी, लेकिन उसने इस बयान पर चुप्पी साध ली। मीडिया के सामने मुख्यमंत्री द्वारा बांग्ला भाषी मुसलमानों को निशाना बनाने की बात कहे जाने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने बांग्ला भाषी मुसलमानों के खिलाफ पांच लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिससे उद्देश्यपूर्वक कार्रवाई किए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इससे यह धारणा मजबूत हुई कि एसआईआर, एनआरसी की आगे की कड़ी है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हाल ही में असम भाजपा द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक एआई वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा को राइफल लेकर मुसलमानों पर नजदीक से गोली चलाते हुए दिखाया गया। “पॉइंट ब्लैंक शूट”, “विदेशियों से मुक्त असम”, “कोई दया नहीं”, “बांग्लादेशियों को माफी नहीं” जैसे कैप्शन के साथ साझा इस वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद इसे हटा लिया गया, लेकिन इसके पीछे की मंशा स्पष्ट मानी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि यह वीडियो असम में संभावित हिंसा के माहौल की ओर संकेत करता है और राज्य को खतरनाक दिशा में ले जा सकता है।
हालांकि मुख्यमंत्री “बंगाली मुसलमानों” को लक्ष्य बताने की बात करते हैं, लेकिन उनके कदमों से असम के सभी मुसलमानों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। असम की लगभग 35% आबादी मुसलमानों की है, जिनमें असमी मुसलमान, बांग्ला भाषी मुसलमान और मिया मुसलमान शामिल हैं। दक्षिणपंथी संगठनों का आरोप है कि बांग्ला विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में मुसलमान असम आए और राज्य के संसाधनों पर दबाव बढ़ा, लेकिन आलोचकों का कहना है कि मुसलमानों की जीवन स्थिति बेहद खराब है और सरकारी नीतियों के कारण पिछले दशक में उनके घर और आजीविका प्रभावित हुए हैं। एनआरसी के माध्यम से कई लोगों की नागरिकता पर सवाल उठे और लगभग 15 लाख लोगों को राशन से वंचित होने की स्थिति का सामना करना पड़ा, जिनमें अधिकांश दिहाड़ी मजदूर थे। बाल विवाह कानून और पॉक्सो कानून के कथित दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने पहले यह भी कहा था कि यदि मुसलमान “मूल पहचान” की ओर लौटें तो उन्हें मूल निवासी का दर्जा दिया जा सकता है। दूसरी ओर, हालिया जांच रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री के परिवार ने असम में 3,960 एकड़ से अधिक भूमि पर कब्जा किया है। विपक्ष का दावा है कि उनके परिवार के पास 17 कंपनियां हैं और कृषि भूमि को औद्योगिक भूमि में बदलकर अपने नियंत्रण में लिया गया है। साथ ही परियोजनाओं के ठेकेदारों से बड़े पैमाने पर रिश्वत लेने के आरोप भी लगाए गए हैं।
आलोचकों का कहना है कि असम के लिए खतरा बांग्ला भाषी मुसलमान नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोग हैं। इसी आशंका के कारण मुख्यमंत्री नफरत की राजनीति के जरिए खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। असम को बचाने के लिए उचित कार्रवाई की आवश्यकता आज की सबसे बड़ी जरूरत बताई जा रही है।
Source: Vartha Bharathi (Translate in Hindi)







