मुस्लिम युवाओं के अपनी ही कयादत से कड़वे सवाल: आखिर खामोश क्यों है मिल्ली नेतृत्व?

मुस्लिम कयादत का संकट, नौजवानों में बढ़ती बेचैनी और पारंपरिक नेतृत्व से मायूसी; अब अपने हुकूक की लड़ाई खुद लड़ने को तैयार है नई नस्ल लेखक: सरफराज अहमद कासमी, हैदराबाद…

किसकी मुक्ति, किसकी आज़ादी? शरजील इमाम के विचारों की पड़ताल

शरजील इमाम के हालिया इंटरव्यू में काफी पढ़ाई-लिखाई दिखाई देती है. इतिहास के संदर्भ हैं, राजनीतिक चिंतकों के उल्लेख हैं और एक व्यवस्थित राजनीतिक परियोजना भी है. पर इससे उपजा…

सऊदी अरब के एक और एयरपोर्ट पर हमला, एक व्यक्ति की मौत, 8 घायल

रियाद / नई दिल्ली: सऊदी अरब के दम्माम शहर स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किए गए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य…

मुसलमान, एहतिजाज की सियासत और जम्हूरी अमल में असरदार शिरकत

मुसलमानों का एहसास-ए-तहफ़्फ़ुज़ और राष्ट्रीय धारा में प्रभावी भागीदारी इख़्तिलाफ़-ए-राय को दबाने से मसाइल हल नहीं होते हिंदुस्तानी जम्हूरियत में एहतिजाज यानी विरोध सिर्फ़ हुकूमत से इख़्तिलाफ़ का इज़हार नहीं,…

स्मार्टफोन का असर: बच्चे आखिर क्या खो रहे हैं?

डिजिटल दौर में बचपन की हिफाज़त का चैलेंज स्मार्टफोन की चमकती स्क्रीन, बचपन के बदलते रंग क्या डिजिटल सहूलियत बच्चों की सेहत, तालीम, तख़्लीकी सलाहियत और ख़ानदानी रिश्तों को मुतास्सिर…

मुसलमान वोट बैंक नहीं, बल्कि बराबर हक़ रखने वाले नागरिक हैं

चुनावी वादों से आगे बढ़कर हुक़ूक़, तरक़्क़ी और सियासी नुमाइंदगी को तवज्जो देने की ज़रूरत जम्हूरियत में वोट अवाम की सबसे बड़ी ताक़त है। इसी ताक़त के ज़रिए लोग अपने…

जब धार्मिक पहचान निशाना बन जाए

सेकन खान का कत्ल, मजहबी पहचान और नफ़रत की सियासत का सवाल मुसलमान होना क्या जुर्म हो गया? सेकन खान की हत्या और पहचान की सियासत का सवाल राजस्थान में…

भारत में हिंदू तहज़ीबी वर्चस्व और राष्ट्रीय पहचान पर सवाल

संविधान, हिंदू-मुस्लिम रिश्ते और भारतीय मुसलमानों के राष्ट्रीय नैरेटिव पर चर्चा भारत की पहचान, धर्मनिरपेक्षता, हिंदू-मुस्लिम रिश्तों और हिंदू राष्ट्रवाद को लेकर देश में लंबे समय से बहस जारी है।…

मोबाइल फोन: सहूलियत से जरूरत तक, मगर वक्त के ज़ाया होने से बचाव ज़रूरी

तालीम, काम और संपर्क के साथ मनोरंजन के इस्तेमाल में एतदाल; बच्चों के स्क्रीन टाइम और फैमिली टाइम पर खास तवज्जो की जरूरत   आज के आधुनिक दौर में मोबाइल…

अपनी ज़िंदगी में भी हो औरत का अपना मुकाम

औरत सबके लिए जीती रहे, मगर खुद को न भूले अपनी इज़्ज़त, ज़ेहनी सुकून और अपने ख़्वाबों को ज़िंदा रखना भी ज़िंदगी की अहम ज़रूरत है।   औरत की ज़िंदगी…

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