मुस्लिम पहचान मिटाने की कोशिश? — मुस्लिम धार्मिक स्थलों और क़यादत का संकट

बुलडोज़र के दौर में मुसलमान कहाँ खड़ा है? मसाजिद और धार्मिक विरासत के तहफ़्फ़ुज़ से लेकर क़यादत के मुहासबे तक, उम्मत को नई बसीरत और हिकमत-ए-अमली की ज़रूरत बाबरी मस्जिद…

उस्ताद : शख्सियत-साज़ी से क़ौम-साज़ी तक

क़ौमों की तक़दीर किताबों से नहीं, तरबियतयाफ़्ता इंसानों से बदलती है इंसानी तहज़ीब की तारीख़ पर नज़र डालें तो मालूम होता है कि क़ौमों की तामीर सिर्फ़ इमारतों, सड़कों और…

मस्जिदों को लाइब्रेरी और स्टडी सेंटर बनाने की जरूरत

मस्जिद के खामोश कोनों में इल्म के चिराग रोशन हों इबादत के साथ मुतालआ और तर्बियत की रिवायत को जिंदा करने की जरूरत   इक्कीसवीं सदी के पहले पच्चीस साल…

भारत की जंग-ए-आज़ादी में मुस्लिम महिलाओं का क़ायदाना किरदार

अज़्म, क़ुर्बानी और वतनपरस्ती से लिखी गई जद्दोजहद की दास्तान वतन की आज़ादी के सफ़र में मुस्लिम महिलाओं के क़दम “वतन के इश्क़ में जीना, वतन के इश्क़ में मरना,…

When Survival Becomes Success — ज़िंदा रहना भी एक कामयाबी है

तूफानों के बीच उम्मीद का चराग बुझने न देने की दावत   ज़िंदगी में कुछ ऐसे दौर भी आते हैं, जब इंसान जीतने के ख्वाब नहीं देखता, बल्कि सिर्फ़ इतनी…

जब क़लम ख़ामोश हो जाए, तो सच भी तन्हा रह जाता है

सच, इंसाफ़ और इंसानियत की आवाज़ कौन बनेगा? क़लम! ऐ मेरे ख़ामोश मगर हमराज़ रफ़ीक़! आज मैं तुझसे मुख़ातिब हूँ, इस उम्मीद के साथ कि तू मेरी बेआवाज़ कैफ़ियत को…

मुस्लिम इदारों पर बुलडोज़र कार्रवाई पर उठे सवाल

क़ानून की आड़ में मसाजिद, मदरसों और मुस्लिम इदारों के खिलाफ कार्रवाई पर बहस तेज़ उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर संभावित…

ट्रोलिंग का बढ़ता रुझान और आज़ादी-ए-इज़हार का चैलेंज सोशल मीडिया की ट्रोलिंग, अख़लाक़ी ज़वाल और ज़िम्मेदाराना पब्लिक डिस्कोर्स की ज़रूरत

हमारे जम्हूरी निज़ाम में हर शहरी को अपनी राय रखने और उसे ज़ाहिर करने की आज़ादी दी गई है। लेकिन इस आज़ादी के साथ कुछ हदें और ज़िम्मेदारियाँ भी तय…

Artificial Intelligence: इंसानी ज़ेहन का मददगार, उसका विकल्प नहीं

Artificial Intelligence के इमकानात और अख़लाक़ी ज़िम्मेदारियाँ AI और इंसानी शऊर की नई हम-आहंगी तरक़्क़ी की रफ़्तार के साथ अख़लाक़, तहक़ीक़ और तख़्लीक़ का मुतवाज़िन सफ़र इंसानी तारीख़ इल्म, तहक़ीक़…

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