राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर अब तक कोई आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं था, लेकिन अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि अब राष्ट्रगान की भांति वंदे मातरम पर भी खड़ा होना अनिर्वाय होगा. किसी भी आधिकारिक आयोजन के दौरान 6 छंद वाला पूरा राष्ट्रगीत बजाया जाएगा.

 

नई दिल्ली: सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर नए दिशा निर्देश जारी किए हैं. इसके तहत वंदे मातरम को कई आधिकारिक कार्यक्रमों में गाया जाना अनिवार्य कर दिया गया है. साथ ही अब राष्ट्रगीत के भी गायन या वादन के दौरान श्रोताओं को राष्ट्रगान की तरह ही सावधान की मुद्रा में खड़े होना होगा. इसके अलावा अब से किसी भी कार्यक्रम में यह 6 छंद वाला पूरा राष्ट्रगीत बजाया जाएगा.

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी को जारी किए गए 10 पन्नों के सरकारी आदेश में मंत्रालय ने यह भी कहा कि यदि राष्ट्रगीत वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन-गण-मन को एक साथ गाया या बजाया जाता है, तो वंदे मातरम पहले बजाया जाएगा और इसका सम्मान भी राष्ट्रगान की तरह ही किया जाएगा.

मंत्रालय के अनुसार, ‘जब भी राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण गाया या बजाया जाए, तो श्रोताओं को सावधान मुद्रा में खड़ा होना चाहिए. हालांकि, जब किसी समाचार रील या वृत्तचित्र के दौरान राष्ट्रगीत फिल्म के एक भाग के रूप में बजाया जाता है, तो श्रोताओं से खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाती है, क्योंकि खड़े होने से फिल्म के प्रदर्शन में बाधा उत्पन्न होगी और इसकी गरिमा बढ़ाने के बजाय अव्यवस्था और भ्रम की स्थिति पैदा होगी.’

यह बात सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक निकायों को अंग्रेजी और हिंदी में जारी किए गए नोट में कही गई है.

मंत्रालय के नोट में उन कार्यक्रमों और स्थानों की सूची भी दी गई है जहां यह गीत बजाया जा सकता है, जिनमें स्कूल सभाएं भी शामिल हैं.

उल्लेखनीय है कि यह कदम केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में वंदे मातरम को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों के अनुरूप प्रतीत होता है, जिसमें पहले राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर संसद में तीखी बहस और गणतंत्र दिवस परेड के दौरान इस गीत पर आधारित कई झांकियां प्रदर्शित करना शामिल था.

वंदे मातरम को लेकर अब तक कोई आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं था

मालूम हो कि बांग्ला साहित्य के दिग्गज बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1870 के दशक में संस्कृतनिष्ठ बंगाली में रचित यह गीत सर्वप्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपनाया गया था. 1950 में इस गीत के पहले दो छंदों को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था.

अब तक वंदे मातरम को लेकर कोई आधिकारिक प्रोटोकॉल नहीं था. वहीं, इस गीत का विस्तारित, छह छंदों वाला संस्करण अब तक आधिकारिक कार्यक्रमों में नहीं गाया गया है.

सरकार के हालिया आदेश में उन अवसरों और आयोजनों को तीन श्रेणियों में परिभाषित किया गया, जहां ये गीत बजाया जाना है या बजाया जा सकता है.

आदेश में कहा गया है कि निम्नलिखित अवसरों पर ‘राष्ट्रगीत का आधिकारिक संस्करण बजाया जाएगा’ – नागरिक अलंकरण समारोह, राष्ट्रपति का औपचारिक राजकीय समारोहों और सरकार द्वारा आयोजित अन्य समारोहों में आगमन और उनके प्रस्थान के समय, राष्ट्रपति द्वारा आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) और टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करने से ठीक पहले और बाद में, राज्यपाल/उपराज्यपाल का अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में औपचारिक राजकीय समारोहों में आगमन और उनके प्रस्थान के समय, जब राष्ट्रीय ध्वज परेड में लाया जाता है, और कोई अन्य अवसर जिसके लिए भारत सरकार द्वारा विशेष आदेश जारी किए जाते हैं.

इसमें आगे कहा गया है, ‘जब कोई बैंड राष्ट्रगीत बजाएगा, तो उससे पहले ढोल बजाए जाएंगे ताकि श्रोताओं को पता चल जाए कि राष्ट्रगीत बजने वाला है, जैसे कि राष्ट्रगान से पहले तुरही बजाई जाती है.

दूसरी श्रेणी – जिसमें गीत बजाने के साथ-साथ सामूहिक गायन भी शामिल है – में राष्ट्रीय ध्वजारोहण, सांस्कृतिक अवसर या परेड के अलावा अन्य समारोह शामिल हैं.

नोट में कहा गया है, ‘इसके लिए पर्याप्त संख्या में गायक मंडलियों को उचित स्थान पर तैनात किया जा सकता है, जिन्हें बैंड आदि के साथ तालमेल बिठाकर गाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. एक उपयुक्त सार्वजनिक ऑडिशन प्रणाली होनी चाहिए ताकि विभिन्न स्थानों पर उपस्थित लोग गायक मंडलियों के साथ एक सुर में गा सकें; आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण के मुद्रित बोल प्रतिभागियों के बीच वितरित किए जा सकते हैं.’

अन्य ऐसे आयोजनों में राष्ट्रपति का किसी सरकारी या सार्वजनिक समारोह में आगमन (औपचारिक राजकीय समारोहों को छोड़कर) और ऐसे समारोहों से उनके प्रस्थान से ठीक पहले का समय शामिल है. आदेश में कहा गया है, ‘जब भी राष्ट्रगीत गाया जाए, तो आधिकारिक संस्करण का सामूहिक गायन के साथ पाठ किया जाएगा.’

विद्यालयों में दिन की शुरुआत सामूहिक राष्ट्रगीत से

कार्यक्रमों की तीसरी श्रेणी – जहां राष्ट्रगीत गाया जा सकता है – में स्कूलों के कार्यक्रम शामिल हैं.

आदेश में कहा गया है, ‘सभी विद्यालयों में दिन की शुरुआत सामूहिक राष्ट्रगीत गायन से की जा सकती है. विद्यालय प्रशासन को अपने कार्यक्रमों में छात्रों के बीच राष्ट्रगान गायन को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए.’

आदेश में यह भी कहा गया है कि राष्ट्र गाीत उन अवसरों पर भी गाया जा सकता है जो विशुद्ध रूप से औपचारिक नहीं हैं, लेकिन ‘मंत्रियों आदि की उपस्थिति के कारण महत्वपूर्ण हैं.’

गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पिछले साल संसद में हुई लंबी बहस के बाद इस गीत का इतिहास, उसका संक्षिप्त रूप और राजनीतिक विकल्प चर्चा का मुख्य विषय बन गए हैं.

ज्ञात हो कि दिसंबर 2025 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान हुई बहस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में लगभग 10 घंटे तक चली बहस का नेतृत्व किया था, जिसमें गीत की उत्पत्ति और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई थी.इस दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर गीत के महत्वपूर्ण छंदों को हटाकर उसे धोखा देने और विकृत करने का आरोप लगाया था.

इसके जवाब में कांंग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बताया था कि इस गीत को पहली बार 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के दौरान ही रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था.

हालांकि, इस गीत को लेकर पक्ष-विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप लगातार देखने को मिला है. इस बीच इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड का विषय भी ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम’ रखा गया था.

Source: The Wire