जंग, मुनाफ़ा और ख़ौफ़: दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नेस?
बारूद, तेल और तिजारत का ख़तरनाक त्रिकोण आधुनिक जंगों में इंसानी जान से ज़्यादा मुनाफ़ा क्यों अहम हो गया? हर जंग अपने पीछे दो तरह का मलबा छोड़ जाती…
बारूद, तेल और तिजारत का ख़तरनाक त्रिकोण आधुनिक जंगों में इंसानी जान से ज़्यादा मुनाफ़ा क्यों अहम हो गया? हर जंग अपने पीछे दो तरह का मलबा छोड़ जाती…
दो मुकदमे, दो मापदंड — कानून की आंखों पर पट्टी है या पर्दा? बड़ी जम्हूरियतों की असली ताकत उनकी पार्लियामेंट की इमारतों, ऊंची अदालतों या ताकतवर हुकूमतों में नहीं होती।…
संयुक्त राष्ट्र के एक जांच आयोग द्वारा जारी 94 पेज के रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दो सालों में गाज़ा में कम से कम 20,179 बच्चे मारे गए और…
जब पासपोर्ट ही काफ़ी नहीं, तो असली हिंदुस्तानी होने का पैमाना आख़िर क्या है? कभी-कभी सरकार की कोई आधिकारिक सफ़ाई सिर्फ़ एक प्रशासनिक बयान नहीं होती, बल्कि वह रियासत और…
वो शख्स जो खुद टूट जाता है, मगर औलाद को बिखरने नहीं देता यौम-ए-वालिद पर इस ख़ामोश हीरो को सलाम मां के बाद औलाद का सबसे बड़ा जज़्बाती, इंसानी…
21वीं सदी के पहले दशक में कई ऐसे आतंकी हमले हुए जिनमें मुस्लिम धार्मिक या सांस्कृतिक सभाओं या आम नागरिकों को निशाना बनाकर धमाके किए गए. पुलिस ने शुरू में…
हिंदुस्तान में मुसलमान: आबादी, नुमाइंदगी और बराबर की हिस्सेदारी का सवाल हिंदुस्तान की सबसे बड़ी ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब, विविधता और बहुलतावादी पहचान है। अलग-अलग मज़ाहिब, ज़बानों, संस्कृतियों और तहज़ीबी…
आइन, इदारे और जम्हूरियत: क्या हिंदुस्तान एक नाज़ुक दोराहे पर खड़ा है? हिंदुस्तान की सियासी फिज़ा में इस वक्त गैरमामूली बेचैनी महसूस की जा रही है। एक तरफ लोकसभा…
बेलगावी, 2 जून: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की तरफ़ से स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पहनने की इजाज़त दिए जाने के खिलाफ़ आज बेलगावी में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।…
वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन अपने साप्ताहिक कॉलम में विभिन्न राज्यों की राजनाति पर बात कर रहे हैं। साथ ही नफ़रती राजनीति की उस नब्ज़ पर हाथ धर रहे हैं जिसमें…