When Survival Becomes Success — ज़िंदा रहना भी एक कामयाबी है

तूफानों के बीच उम्मीद का चराग बुझने न देने की दावत   ज़िंदगी में कुछ ऐसे दौर भी आते हैं, जब इंसान जीतने के ख्वाब नहीं देखता, बल्कि सिर्फ़ इतनी…

जब क़लम ख़ामोश हो जाए, तो सच भी तन्हा रह जाता है

सच, इंसाफ़ और इंसानियत की आवाज़ कौन बनेगा? क़लम! ऐ मेरे ख़ामोश मगर हमराज़ रफ़ीक़! आज मैं तुझसे मुख़ातिब हूँ, इस उम्मीद के साथ कि तू मेरी बेआवाज़ कैफ़ियत को…

मुस्लिम इदारों पर बुलडोज़र कार्रवाई पर उठे सवाल

क़ानून की आड़ में मसाजिद, मदरसों और मुस्लिम इदारों के खिलाफ कार्रवाई पर बहस तेज़ उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर संभावित…

ट्रोलिंग का बढ़ता रुझान और आज़ादी-ए-इज़हार का चैलेंज सोशल मीडिया की ट्रोलिंग, अख़लाक़ी ज़वाल और ज़िम्मेदाराना पब्लिक डिस्कोर्स की ज़रूरत

हमारे जम्हूरी निज़ाम में हर शहरी को अपनी राय रखने और उसे ज़ाहिर करने की आज़ादी दी गई है। लेकिन इस आज़ादी के साथ कुछ हदें और ज़िम्मेदारियाँ भी तय…

Artificial Intelligence: इंसानी ज़ेहन का मददगार, उसका विकल्प नहीं

Artificial Intelligence के इमकानात और अख़लाक़ी ज़िम्मेदारियाँ AI और इंसानी शऊर की नई हम-आहंगी तरक़्क़ी की रफ़्तार के साथ अख़लाक़, तहक़ीक़ और तख़्लीक़ का मुतवाज़िन सफ़र इंसानी तारीख़ इल्म, तहक़ीक़…

शहरियत साबित करना क्यों हो रहा है मुश्किल? कई सरकारी दस्तावेज़ भी नहीं माने जा रहे अंतिम सबूत

नई दिल्ली/बेंगलुरु: देश में शहरियत (Citizenship) को लेकर बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है। हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु में हिरासत में लिए गए अब्दुल रहीम…

क्या हम सच में हुसैनी हैं?

सबसे पहले मेरा अकीदा यह है कि सैयदना इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) के कदमों की जूतियाँ मेरे सर का ताज हैं और उनके कदमों की ख़ाक मेरी आँखों का सुरमा…

असम: 15 दस्तावेज़ भी साबित नहीं कर सके भारतीय नागरिकता, हाईकोर्ट ने ‘विदेशी’ घोषित रखा

गौहाटी हाईकोर्ट ने विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा 2019 में एक दिहाड़ी श्रमिक को ‘विदेशी’ घोषित किए जाने के फैसले को सही ठहराया है. 38 वर्षीय इस व्यक्ति ने अपनी भारतीय नागरिकता…

जंग, मुनाफ़ा और ख़ौफ़: दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नेस?

बारूद, तेल और तिजारत का ख़तरनाक त्रिकोण आधुनिक जंगों में इंसानी जान से ज़्यादा मुनाफ़ा क्यों अहम हो गया?   हर जंग अपने पीछे दो तरह का मलबा छोड़ जाती…