“उमर खालिद राष्ट्रवादी हैं, ABVP को उन पर बात करने का नैतिक हक नहीं”

कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने जेल में बंद एक्टिविस्ट उमर खालिद को “राष्ट्रवादी” बताते हुए बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में उनकी जिंदगी और मामले पर आधारित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध करने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को निशाने पर लिया है।

पत्रकारों से बातचीत में बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि उमर खालिद राष्ट्रवादी हैं और ABVP को उनके बारे में बात करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने संगठन पर टिप्पणी करते हुए नाथूराम गोडसे को लेकर उसके कथित रवैये का भी जिक्र किया।

यह बयान ऐसे वक्त आया है जब नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में उमर खालिद पर आधारित डॉक्यूमेंट्री “Prisoner No. 626710 Is Present” की प्रस्तावित स्क्रीनिंग विवादों में घिर गई है।

फिल्म निर्देशक ललित वाचानी की इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग सोमवार को यूनिवर्सिटी में होनी थी, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि कार्यक्रम को प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी वजहों से री-शेड्यूल किया गया है और यह फैसला किसी दबाव में नहीं लिया गया है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, इसी अकादमिक वर्ष के दौरान कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

यूनिवर्सिटी ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद ट्रायल से पहले हिरासत, जमानत, असहमति, राजनीतिक कैद और क्रिमिनल लॉ तथा लोकतांत्रिक आज़ादी के आपसी संबंध जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा बनना था।

उमर खालिद के खिलाफ मामला

उमर खालिद सितंबर 2020 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। दिल्ली पुलिस ने उन्हें 2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश के मामले में गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ UAPA समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। उमर खालिद ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से इनकार किया है।

ABVP ने केंद्र से दखल की मांग की

दूसरी तरफ, RSS से संबद्ध ABVP की बेंगलुरु इकाई ने उमर खालिद पर आधारित डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को स्थायी रूप से रद्द करने के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

ABVP ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और कानून एवं न्याय मंत्रालय से जुड़े केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन देकर नेशनल लॉ स्कूल प्रशासन के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की है।

ABVP का आरोप है कि स्क्रीनिंग को स्थगित करना जनता के विरोध के कम होने तक मामले को टालने की कोशिश है। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय महत्व के शिक्षण संस्थानों को उमर खालिद से जुड़ी राजनीतिक मुहिम के लिए प्लेटफॉर्म नहीं बनना चाहिए।

ABVP ने यूनिवर्सिटी से डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग, स्क्रीनिंग या प्रमोशन के लिए दी गई सभी मंजूरियां स्थायी रूप से वापस लेने और कार्यक्रम की अनुमति देने वाले यूनिवर्सिटी अधिकारियों व आयोजकों की जांच की मांग भी की है।

संगठन ने यह भी कहा कि अकादमिक आज़ादी और खुली बहस संवैधानिक अधिकार हैं, लेकिन उसके अनुसार अभिव्यक्ति की आज़ादी को राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की संप्रभुता और संस्थागत अखंडता पर प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

फिलहाल उमर खालिद पर बनी इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर अकादमिक फ्रीडम, असहमति, अभिव्यक्ति की आज़ादी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बहस जारी है। यूनिवर्सिटी की ओर से स्क्रीनिंग की नई तारीख का ऐलान अभी नहीं किया गया है।