ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए सजी दिल्ली में जहां इमारतों को चटख निऑन रोशनी से चमकाया गया है, वहीं झुग्गियों को पर्दों के पीछे छिपाने और आम जनजीवन पर लगी पाबंदियों ने तैयारियों की दूसरी तस्वीर भी सामने रखी है. शहर में दूसरे देशों के नेताओं की तस्वीरें भी अधिकतर अलग-अलग दिखाई दे रही हैं, वहीं मीडिया किट और प्रधानमंत्री की अन्य नेताओं के साथ ‘झप्पी’ की तस्वीरों का ग़ायब होना भी चर्चा में है.
नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए राजधानी दिल्ली को चमकाया गया है. इमारतें रोशनी से जगमगा रही हैं, जगह-जगह सजावटी संकेत और बैनर लगाए गए हैं और आम जनजीवन लगभग ठहर सा गया है.
प्रस्तुत है मेज़बान शहर की सड़कों से ब्रिक्स की कुछ तस्वीरें और टिप्पणियां—
नेता साथ-साथ नहीं, कम से कम तस्वीरों में तो नहीं
मालूम हो कि 2023 में जब दिल्ली ने जी-20 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की थी, तब मध्य दिल्ली में लगे नरेंद्र मोदी के विशालकाय पोस्टर चर्चा का विषय बने थे. दूसरे नेताओं की तस्वीरें भी थीं, लेकिन उनके आकार को पैमाना मानें तो वे काफी छोटे थे.
इस बार मोदी की तस्वीरों का आकार भले छोटा कर दिया गया हो, लेकिन वे अब भी अकेली दिखाई देती हैं. दूसरे देशों के नेताओं की तस्वीरें भी अब दिल्ली में दिखाई दे रही हैं, लेकिन वे भी अलग-अलग हैं. यानी नेता हैं, मगर साथ नहीं.

क्या यह ब्रिक्स की वास्तविक तस्वीर है- अलग-अलग और बिखरे हुए देश, जो कभी-कभार किसी मंच पर साथ दिखाई देते हैं? या फिर यह पश्चिमी ताकतों को लेकर किसी तरह की आशंका का नतीजा है कि ‘सभी साथ-साथ’ वाली बहुत अधिक तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कैसी दिखेंगी?
बेशक, शिखर सम्मेलन में नेताओं की सामूहिक तस्वीर से पूरी तरह बचना संभव नहीं है. लेकिन शांति पथ के आसपास नेताओं की एकजुट तस्वीर एक अलग कहानी कह सकती है. शायद भारत इस कहानी को दिखाने से भी बचना चाहता है?
‘गायब’ कर दी गई गरीबी
दक्षिण दिल्ली के वसंत विहार के पास मुनिरका की झुग्गियां, जिसे ‘दूतावासों का इलाका’ भी कहा जाता है, पूरी तरह ढक दी गई हैं.
झुग्गियों को इस तरह ‘गायब’ करने की यह कवायद नई नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अहमदाबाद यात्रा के दौरान भी ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला था. 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली में बड़े पैमाने पर झुग्गियां हटाई गई थीं. उस दौरान 1,600 से अधिक घरों को ढहा दिया गया था.
हाउसिंग एंड लैंड राइट्स नेटवर्क (एचएलआरएन) की रिपोर्ट फोर्स्ड एविक्शंस इन इंडिया: 2022 एंड 2023 के मुताबिक, 2022-23 के दौरान दिल्ली में 78 बेदखली अभियान चलाए गए और करीब 2,93,205 लोगों को उनके घरों से बेदखल किया गया. मध्य दिल्ली के कनॉट प्लेस में भी रेहड़ी-पटरी वालों को हटाए जाने के बाद वहां की रौनक बदल गई थी.
गरीबी को पर्दे के पीछे छिपाने की यह कोशिश इस बुनियादी तथ्य को भुला देती है कि दिल्ली सिर्फ उसके चौड़े रास्तों, चमचमाती इमारतों और खूबसूरत गलियारों का नाम नहीं है. दिल्ली यहां रहने वाले लोगों से भी बनती है.
2011 की जनगणना के मुताबिक, राजधानी की 10 फीसदी से अधिक आबादी झुग्गियों में रहती है और यही आबादी शहर के कामकाज की रीढ़ है. 2023 में राज्यसभा को बताया गया था कि दिल्ली की 650 झुग्गी बस्तियों में करीब 15.5 लाख लोग रहते हैं.
रोशनी का तामझाम
सरकारी दफ्तरों और इमारतों को इंद्रधनुषी रोशनी और चटख निऑन जैसी डिस्को लाइटों से सजाया गया है. इसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर आम बातचीत तक में सवाल उठ रहे हैं.
क्या ‘न्यू इंडिया’ के लिए सामान्य पीली रोशनी अब बहुत फीकी पड़ गई है? क्या चमक और बढ़ाई जानी चाहिए? डीजे भी बुला लिया जाए?
फिलहाल फैसला जनता पर छोड़ देते हैं. इतना जरूर है कि विदेश मंत्रालय को यह सजावट पसंद आती दिख रही है.
मीडिया किट की चर्चा
इस बार पत्रकारों के बीच मीडिया किट भी चर्चा का विषय है. सोशल मीडिया पर कई पत्रकारों ने भारत सरकार की ओर से दी गई किट को बेहद शानदार बताया है. एक समाचार एजेंसी ने विदेशी पत्रकारों से भी इस किट पर उनकी राय मांगी है.
हालांकि, कुछ पत्रकारों ने यह याद दिलाना जरूरी समझा कि मीडिया किट का इतना भव्य होना जरूरी नहीं है.
एक पत्रकार ने कहा कि मीडिया किट में सिर्फ कार्यक्रम की समयसारिणी और जरूरी सामग्री होनी चाहिए.
गले मिलने वाली तस्वीरें कहां हैं?


जब हमने आखिरी बार देखा, तो नरेंद्र मोदी और अन्य आधिकारिक सोशल मीडिया फीड पर दूसरे देशों के नेताओं के साथ गले मिलने वाली तस्वीरें नजर नहीं आईं.
2024 के बाद से मोदी की ‘झप्पी’ को लेकर सोशल मीडिया पर खूब मीम बने हैं. पुलकित मणि का चर्चित मीम भी वायरल हुआ था, जिसे बाद में सोशल मीडिया से हटा दिया गया.
शायद इसका असर यह है कि कम से कम आधिकारिक वेबसाइटों पर अब दूसरे नेताओं को गले लगाते हुए मोदी की तस्वीरें पहले की तरह पीआर सामग्री का हिस्सा नहीं हैं. आगे की जानकारी के लिए अपने वॉट्सऐप ग्रुप्स पर भी नज़र बनाए रखें.
Source: The Wire

