बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने पहले चरण में घोषित 101 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए केंद्र सरकार को नुकसान भरपाई का मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें NDRF (National Disaster Response Force) के मानदंडों के तहत ₹3,705.30 करोड़ की सूखा राहत मांगी गई है। राज्य सरकार द्वारा केंद्र को सौंपे गए मेमोरेंडम में क्या-क्या जानकारी दी गई है, इसकी पूरी रिपोर्ट देखिए।
कर्नाटक इस बार गंभीर सूखे की स्थिति का सामना कर रहा है। एल-नीनो के असर और बारिश की कमी के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। राज्य सरकार ने पहले चरण में केंद्र के सूखा मानदंडों के अनुसार 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इनमें 89 तालुक गंभीर सूखा प्रभावित और 12 तालुक सामान्य सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं। इसी सिलसिले में राज्य सरकार ने 15 सितंबर को केंद्र से सूखा राहत की मांग की है।
सितंबर के अंत तक कुछ और तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है। दूसरे चरण में 23 तालुकों को भी सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। वहीं, 54 तालुकों में ग्राउंड ट्रुथिंग की प्रक्रिया जारी है। आने वाले दिनों में कुछ और तालुकों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। नुकसान का आकलन करने के बाद महीने के अंत तक एक और मेमोरेंडम केंद्र सरकार को सौंपे जाने की उम्मीद है।
कुल सूखा नुकसान ₹18,748 करोड़, केंद्र से ₹3,705 करोड़ की मांग
पहले चरण में घोषित 101 सूखा प्रभावित तालुकों में कुल ₹18,748 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। केंद्र को सौंपे गए मेमोरेंडम में NDRF के मानदंडों के अनुसार ₹3,705.30 करोड़ की राहत की मांग की गई है।
मेमोरेंडम के मुताबिक, 17.85 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में फसल नुकसान हुआ है, जबकि 1.67 लाख हेक्टेयर बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचा है। इसके लिए NDRF के तहत कुल ₹2,017.26 करोड़ फसल नुकसान भरपाई की मांग की गई है।
इसके अलावा:
- 476 पशु शिविरों के लिए ₹209.21 करोड़
- 583 चारा बैंकों के लिए ₹241.61 करोड़
- दवाइयों और वैक्सीन के लिए ₹21.27 करोड़
- न्यूट्रिशन सप्लीमेंट के लिए ₹21.40 करोड़
- खाद्य एवं बीज मिनी किट के लिए ₹89.55 करोड़
- ग्रामीण इलाकों में पेयजल सप्लाई और मरम्मत के लिए ₹505 करोड़
- शहरी इलाकों के लिए ₹300 करोड़
- अनपेक्षित राहत मद के लिए ₹300 करोड़
इस तरह 101 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए केंद्र सरकार से कुल ₹3,705.30 करोड़ की राहत मांगी गई है।
9 सितंबर तक राज्य में 34 फीसदी बारिश की कमी
मेमोरेंडम के मुताबिक, 9 सितंबर 2026 तक कर्नाटक में सामान्य 733 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले सिर्फ 487 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है। यानी राज्य में 34 फीसदी बारिश की कमी रही।
चारों मौसम विभागों में भी बारिश की कमी दर्ज की गई है:
- तटीय कर्नाटक — 26% कमी
- मलनाड — 36% कमी
- उत्तर आंतरिक कर्नाटक — 38% कमी
- दक्षिण आंतरिक कर्नाटक — 47% कमी
दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में सबसे ज्यादा बारिश की कमी दर्ज की गई है।
जिलेवार स्थिति देखें तो 31 में से 30 जिले बारिश की कमी वाले वर्ग में हैं। तालुक स्तर पर 240 में से 182 तालुक बारिश की कमी वाले और 21 तालुक Large-deficit यानी गंभीर कमी वाले वर्ग में हैं। मेमोरेंडम के अनुसार, राज्य के करीब 85 फीसदी तालुक बारिश की कमी से लेकर गंभीर कमी तक की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
50 साल में दूसरी सबसे कम बारिश
मेमोरेंडम में कहा गया है कि 1 जून से 31 अगस्त तक के दक्षिण-पश्चिम मानसून के 50 साल के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2026 में इस अवधि के दौरान हुई कुल बारिश 1976 के बाद दूसरी सबसे कम रही।
इससे कम बारिश सिर्फ 2002 में 458 मिलीमीटर दर्ज की गई थी। राज्य में जारी बारिश की कमी और सूखे की गंभीरता को इससे समझा जा सकता है।
बुआई की स्थिति
4 सितंबर 2026 तक 84.10 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 67.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई है। यह निर्धारित लक्ष्य का करीब 80 फीसदी और सामान्य क्षेत्र का 88 फीसदी है।
हालांकि, बारिश की कमी के कारण अलग-अलग जिलों में बुआई की स्थिति में काफी अंतर देखने को मिला है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से कई इलाकों में खड़ी फसलों पर गंभीर असर पड़ा है।
जलाशयों में भी चिंता
8 सितंबर 2026 तक राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों में कुल 677.95 TMC पानी जमा था। यह कुल क्षमता का करीब 77 फीसदी है।
कावेरी बेसिन के चार प्रमुख जलाशयों की स्थिति ज्यादा चिंताजनक बताई गई है। इनमें कुल जल भंडारण उनकी क्षमता का करीब 63 फीसदी है।
वहीं, लिंगनमक्की, सुपा और वाराही जैसे तीन प्रमुख हाइड्रो-पावर जलाशयों में कुल 200.57 TMC पानी उपलब्ध है, जो उनकी कुल क्षमता का करीब 61 फीसदी है।
मेमोरेंडम में कहा गया है कि इन जलाशयों में कम पानी का असर राज्य की बिजली जरूरतों के करीब 20 फीसदी हिस्से को पूरा करने वाली जलविद्युत उत्पादन क्षमता पर पड़ सकता है। खासकर कावेरी बेसिन के जलाशयों में कम पानी का असर आने वाले महीनों में बेंगलुरु और आसपास के जिलों की पेयजल उपलब्धता पर पड़ने की आशंका जताई गई है।
किन फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान?
प्रमुख कृषि फसलों में:
- मक्का — 4.60 लाख हेक्टेयर
- रागी — 3.80 लाख हेक्टेयर
- तुअर/अरहर — 2.19 लाख हेक्टेयर
- कपास — 1.70 लाख हेक्टेयर
बागवानी फसलों में:
- प्याज — 0.46 लाख हेक्टेयर
- नारियल — 0.84 लाख हेक्टेयर
- हल्दी — 0.13 लाख हेक्टेयर
कुल मिलाकर 19.52 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फसल नुकसान हुआ है। अनुमानित फसल नुकसान की कीमत ₹18,748.23 करोड़ बताई गई है।
वहीं, SDRF नियमों के अनुसार इनपुट सब्सिडी यानी फसल राहत के लिए ₹2,017.26 करोड़ की जरूरत का अनुमान लगाया गया है।

