गन्ना किसानों की परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। सरकार की कथित अनदेखी और चीनी मिलों की ओर से किसानों के साथ हो रही नाइंसाफी के खिलाफ 29 सितंबर को पूरे कर्नाटक में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। यह जानकारी किसान नेता चुन्नप्पा पूजारी ने दी।
उन्होंने कहा कि किसानों की मांग है कि गन्ने का वैज्ञानिक भाव ₹5,500 प्रति टन तय किया जाए और इथेनॉल की खरीद को बढ़ाया जाए। बेलगावी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि पिछले 10 से 16 वर्षों से गन्ना किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
चुन्नप्पा पूजारी ने कहा कि 29 सितंबर को शशिकांत गुरुजी, राजू शेट्टी और किशन नंदी समेत राज्य के 31 जिलों के किसान नेताओं की अगुवाई में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्षों से गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य सिर्फ ₹31 के आसपास बना हुआ है, जिसे बढ़ाकर ₹60 किया जाना चाहिए। साथ ही, किसानों के मुताबिक मौजूदा FRP व्यवस्था को खत्म कर प्रति टन गन्ने का वैज्ञानिक भाव ₹5,500 निर्धारित किया जाए।
इथेनॉल की खरीद को 30 प्रतिशत तक सीमित करने के फैसले पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इस फैसले का असर मक्का और धान किसानों पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीमंत पाटील के स्वामित्व वाली मिलों समेत बैलहोंगल और बागलकोट क्षेत्र की कुछ चीनी मिलों ने किसानों का बकाया भुगतान अभी तक नहीं किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री और चीनी मंत्री शिवानंद पाटील से किसानों का बकाया जल्द जारी करने की मांग की।
चुन्नप्पा पूजारी ने चेतावनी दी कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और प्रल्हाद जोशी हस्तक्षेप कर किसानों की मांगें पूरी नहीं करते हैं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वहीं, पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पिछले 9 वर्षों में चीनी का भाव नहीं बढ़ा, तो सत्ता पक्ष में रहे प्रभाकर कोरे समेत अन्य नेताओं ने किसानों के लिए आवाज क्यों नहीं उठाई?
राजू शेट्टी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर चीनी मिलें किसानों के समर्थन में नहीं आती हैं, तो किसी भी चीनी मिल को शुरू नहीं होने दिया जाएगा।

