दवाएं इंसान की जिंदगी बचाने के लिए होती हैं, लेकिन जब इन्हीं दवाओं को मुनाफे का जरिया बनाकर नकली या मिलावटी तरीके से बाजार में उतारा जाता है, तो यह सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ बन जाता है।
हाल के दिनों में कर्नाटक समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से नकली और मिलावटी दवाओं के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। बेंगलुरु में हुई कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने करीब ₹5 करोड़ की संदिग्ध नकली दवाएं जब्त कीं। जांच में आरोप सामने आया कि सस्ती दवाओं को दोबारा पैक करके महंगी और जीवनरक्षक दवाओं के नाम और लेबल के साथ बाजार में उतारा जा रहा था।
इस मामले में कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने 16 फार्मास्युटिकल लाइसेंस रद्द किए और आठ अन्य लाइसेंस निलंबित किए। अधिकारियों के मुताबिक, नकली दवाओं की सप्लाई कई अस्पतालों और क्लीनिकों तक पहुंचने की आशंका है।
सबसे गंभीर चिंता उन दवाओं को लेकर है जिनका इस्तेमाल कैंसर, ICU और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है। ऐसी दवाओं में अगर आवश्यक सक्रिय घटक मौजूद न हो, तो मरीज को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता और उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। अधिकारियों ने जांच के दौरान कुछ नकली पैकेजिंग पर ऐसे QR कोड भी पाए, जो काम नहीं कर रहे थे।
सरकार ने दवाओं की गुणवत्ता और उनकी सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, दिसंबर 2022 से 960 से अधिक दवा निर्माण इकाइयों का जोखिम-आधारित निरीक्षण किया गया और गैर-अनुपालन के मामलों में 860 से अधिक नियामकीय कार्रवाई की गई।
इसके अलावा, सरकार ने QR कोड आधारित ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था का दायरा भी बढ़ाया है। अब वैक्सीन, एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-कैंसर दवाओं जैसी श्रेणियों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है, ताकि दवाओं की पहचान और सप्लाई चेन की निगरानी को मजबूत किया जा सके।
नकली दवाओं का कारोबार सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों के भरोसे से जुड़ा गंभीर सवाल है। किसी मरीज के लिए दवा केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि उसकी उम्मीद और जिंदगी से जुड़ी होती है।
इसलिए जरूरी है कि नकली दवाओं के निर्माण और वितरण में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ दवा की पूरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाई जाए। आम लोगों के लिए भी जरूरी है कि वे दवाएं केवल अधिकृत फार्मेसी से खरीदें और संदिग्ध पैकेजिंग, लेबल या दवा की गुणवत्ता को लेकर शक होने पर संबंधित औषधि नियंत्रण विभाग को इसकी जानकारी दें।
क्योंकि दवा में मिलावट केवल व्यापार में धोखा नहीं है—यह किसी की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ हो सकता है।

