बेंगलुरु: बिना लाइसेंस बंदूक रखने वालों से अपनी बंदूकें 1 नवंबर तक संबंधित पुलिस थाने में जमा कराने की अपील की गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को विधानसभा में यह बात कही।

विधानसभा में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर कर्नाटक सरकार का रुख पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले कुछ लोगों के पास बिना लाइसेंस की बंदूकें होने और उनके जरिए जंगली जानवरों का शिकार किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।

सीएम ने कहा कि अब आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए जंगलों में हजारों कैमरे लगाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल जंगल और वन्यजीवों की हिफाज़त के लिए किया जा रहा है। इसलिए किसी के कहने पर जंगल में जाकर जानवरों का शिकार न करें।

उन्होंने कहा कि अगर कोई आपको शिकार के लिए उकसाता है, तो कुछ लोग आपको इस मामले में फंसा भी सकते हैं। इसलिए किसी भी हालत में जंगली जानवरों का शिकार न करें।

मुख्यमंत्री ने सदन के जरिए लोगों से अपील करते हुए कहा कि जंगली जानवरों का शिकार करने से बचें। साथ ही उन्होंने विधायकों से भी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में लोगों को इस बारे में जागरूक करने की अपील की।

सीएम ने कहा कि जिन लोगों को बंदूक की वाकई जरूरत है, उन्हें सरकार की तरफ से कानूनी तौर पर लाइसेंस दिया जाएगा।

किन लोगों को मिल सकता है बंदूक का लाइसेंस?

आत्मरक्षा: जान-माल की हिफाज़त के लिए बंदूक रखने की इजाज़त दी जा सकती है। गणमान्य और अति-गणमान्य लोगों तथा उनके गनमैन को भी लाइसेंस मिल सकता है।

सामान्य सुरक्षा: बैंक, संस्थान और दूसरी जगहों पर सिक्योरिटी की जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों को भी बंदूक रखने की इजाज़त मिल सकती है।

फसल की हिफाज़त: जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए किसानों को बंदूक का लाइसेंस दिया जा सकता है।

खेल के लिए: शूटिंग जैसे खेलों के लिए भी बंदूक रखने का लाइसेंस हासिल किया जा सकता है।

NRI के लिए: विदेश से वापस आने वाले भारतीय नागरिक, जिन्होंने विदेश में दो साल से ज्यादा समय तक बंदूक रखी हो, भारत में बंदूक के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं कर्नाटक में कोई विदेशी नागरिक जायज़ वजह बताकर अधिकतम छह महीने तक बंदूक का लाइसेंस हासिल कर सकता है।

कर्नाटक में बंदूक लाइसेंस के लिए क्या शर्तें हैं?

कर्नाटक में बंदूक के लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले शख्स की उम्र 21 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए और वह भारतीय नागरिक होना चाहिए। आवेदक मानसिक तौर पर स्थिर और जिस्मानी तौर पर फिट होना चाहिए। साथ ही उसके खिलाफ किसी तरह का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।

लाइसेंस जारी करने से पहले स्थानीय पुलिस आवेदक के रहने वाले इलाके और आसपास के लोगों से भी जानकारी हासिल करती है। इसके बाद आवेदक का इंटरव्यू लिया जाता है और तमाम जांच-पड़ताल के बाद लाइसेंस देने पर आखिरी फैसला किया जाता है।