सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए सरकार का बड़ा कदम, 53 नए तालुकों में सीधे खेतों का सर्वे
GPS और मोबाइल ऐप के जरिए होगा सर्वे; 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान मिलने पर गंभीर सूखा घोषित किए जाने की संभावना

कर्नाटक में मानसून के दौरान बारिश की कमी से पैदा हुई सूखे की स्थिति का वैज्ञानिक आधार पर लगातार आकलन किया जा रहा है। इसी क्रम में कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 53 और तालुकों में फसल नुकसान का मौके पर जाकर प्रत्यक्ष सर्वे करने का आदेश जारी किया है। यह कार्रवाई वर्ष 2020 के सूखे से संबंधित प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है।

राजस्व विभाग के मुताबिक, यह फैसला उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों के आधार पर लिया गया है। सरकार सूखे की स्थिति का चरणबद्ध तरीके से आकलन कर रही है, ताकि किसानों को हो रही वास्तविक परेशानियों का सही अंदाजा लगाया जा सके।

पहले चरण में 101 तालुक सूखा प्रभावित घोषित

राज्य में पहले चरण के दौरान 102 तालुकों में मौके पर सर्वे किया गया था। इसके बाद 89 तालुकों को गंभीर सूखा और 12 तालुकों को सामान्य सूखे सहित कुल 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था। इसके बाद 24 तालुकों में मौके पर सर्वे की प्रक्रिया पूरी की गई।

अब 1 जून से 16 सितंबर तक के बारिश के आंकड़ों, मिट्टी में नमी, फसल सूचकांक और अन्य वैज्ञानिक जानकारियों के आकलन के बाद राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र ने बाकी 115 तालुकों में से 17 जिलों के 53 तालुकों को तीसरे चरण के मौके पर फसल नुकसान सर्वे के लिए योग्य माना है।

मोबाइल ऐप के जरिए होगा पारदर्शी सर्वे

इस बार फसल नुकसान के आकलन को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा तैयार Crop Loss GT Special Mobile App का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस ऐप के जरिए मौके पर ही खेत की भौगोलिक पहचान से जुड़ी तस्वीरें, GPS जानकारी, जमीन का विवरण और फसल को हुए नुकसान का क्षेत्र दर्ज किया जाएगा। इससे सर्वे के दौरान जुटाई गई जानकारी का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

33 प्रतिशत फसल नुकसान अहम मानदंड

मौके पर किए जाने वाले सर्वे में यदि किसी तालुक में 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान पाया जाता है, तो उसे सूखा प्रभावित घोषित करने के लिए विचार किया जाएगा।

यदि फसल नुकसान 50 प्रतिशत से अधिक पाया जाता है, तो उसे गंभीर सूखे की श्रेणी में शामिल करने का प्रावधान है।

इसी तरह, यदि सर्वे किए गए 80 प्रतिशत से अधिक स्थानों पर 50 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान सामने आता है, तो सामान्य सूखा प्रभावित तालुक को गंभीर सूखे की स्थिति में शामिल करने का भी प्रावधान रखा गया है।

17 जिलों के 53 तालुकों में सर्वे

तीसरे चरण के मौके पर फसल नुकसान सर्वे के लिए चुने गए तालुकों में बेंगलुरु शहरी का बेंगलुरु दक्षिण, बेंगलुरु ग्रामीण का दोड्डबल्लापुर, चित्रदुर्ग के चित्रदुर्ग, होललकेरे और मोलाकलमुरु, दावणगेरे का हरिहर और बल्लारी का सिरुगुप्पा शामिल हैं।

कोप्पल जिले के कोप्पल और यलबुर्गा, कलबुर्गी जिले के चिंचोली, जेवरगी, सेडम, कलगी और कमलापुर, बीदर के कमलनगर और हुलसूर, तथा बेलगावी जिले के अथणी, बैलहोंगल, बेलगावी, चिक्कोडी, रायबाग, कित्तूर, निप्पाणी, मुडलगी और यरगट्टी तालुकों में भी सर्वे किया जाएगा।

बागलकोट जिले के बादामी, हुंगुंद, मुधोल, रबकवी-बनहट्टी और तेरदल, विजयपुर जिले के मुद्देबिहाल, सिंदगी, देवर हिप्परगी और आलमेल, गदग के नरगुंद, शिरहट्टी और लक्ष्मेश्वर तथा हावेरी के ब्याडगी, हानगल, हावेरी, राणेबेन्नूर, सवणूर और शिग्गांव तालुक भी सूची में शामिल हैं।

इसके अलावा हासन जिले के आलूर और बेलूर, उडुपी का ब्रह्मावर, यादगीर जिले के शोरापुर, यादगीर, गुरुमठकल, वडगेरा और हुनसगी तथा विजयनगर जिले के कोट्टूर और कुडलगी तालुकों में भी फसल नुकसान का प्रत्यक्ष सर्वे किया जाएगा।

19 और 20 सितंबर को खेतों का निरीक्षण

सरकारी कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को संयुक्त मार्गदर्शन और प्रारंभिक बैठक आयोजित की जाएगी। 17 और 18 सितंबर को फसलों का चयन, सर्वे टीमों का गठन और गांवों का लॉटरी के जरिए चयन किया जाएगा।

19 और 20 सितंबर को सर्वे टीमें चयनित गांवों के खेतों का दौरा कर फसलों को हुए नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करेंगी। 21 सितंबर को सर्वे पूरा कर फॉर्म नंबर 11 के जरिए अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुखों को निर्धारित कार्यक्रम का सख्ती से पालन करते हुए नियमों के अनुसार सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

मानसून खत्म होने तक हर सप्ताह सूखे की समीक्षा

राजस्व विभाग के अनुसार, मानसून का मौसम समाप्त होने तक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र हर सप्ताह सूखे की स्थिति की समीक्षा करता रहेगा।

जरूरत महसूस होने पर कैबिनेट उपसमिति की मंजूरी के बाद आने वाले चरणों में और अधिक तालुकों को भी मौके पर फसल नुकसान सर्वे के लिए शामिल किया जा सकता है।

सरकार के मुताबिक, चरणबद्ध वैज्ञानिक सर्वे का उद्देश्य सूखे और फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति का सही आकलन करना है, ताकि इसी आधार पर प्रभावित किसानों के लिए नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई तय की जा सके।