कांग्रेस ने सरकार के 7.8% जीडीपी वृद्धि दर के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पिछले आंकड़ों में बार-बार संशोधन और महंगाई की गणना के तरीके से वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर काफी कम हो सकती है. पार्टी ने सरकार से जीडीपी के आंकड़ों में हुए बदलाव का पूरा ब्यौरा देने की मांग की है.

 

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था की पहली तिमाही की 7.8% जीडीपी वृद्धि दर को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं. पार्टी का कहना है कि पिछले वर्षों के जीडीपी आंकड़ों में बार-बार किए गए संशोधनों और महंगाई की गणना के तरीके ने मौजूदा विकास दर को वास्तविक स्थिति से कहीं बेहतर दिखाया है.

कांग्रेस सांसद और पार्टी के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने गुरुवार (3 सितंबर) को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि सरकार ने पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े में चार बार संशोधन किया. हर संशोधन में आधार आंकड़ा नीचे आता गया और इसका सीधा असर मौजूदा तिमाही की विकास दर पर पड़ा है.

केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के ताजा अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही है.

हालांकि, जयराम रमेश का कहना है कि इस आंकड़े को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि इसकी तुलना किस आधार से की जा रही है.

उनके मुताबिक, 2025-26 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े में संशोधनों के बाद 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई. यह केंद्र के वार्षिक शिक्षा बजट के आवंटन से तीन गुने से भी ज्यादा है. हर संशोधन के साथ 2025-26 की पहली तिमाही का जीडीपी आंकड़ा कम होता गया.

कांग्रेस का दावा है कि इन संशोधनों के कारण पिछले साल अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटकर 80 लाख करोड़ रुपये रह गया. ऐसे में जब मौजूदा तिमाही की अर्थव्यवस्था की तुलना छोटे आधार से की जाती है तो वृद्धि दर स्वाभाविक रूप से अधिक दिखाई देती है.

पूर्व वित्त सचिव ने भी 7.8% के आंकड़े पर उठाए सवाल

जयराम रमेश ने पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव सुभाष गर्ग के बयानों का भी हवाला दिया है. गर्ग ने जीडीपी वृद्धि दर की गणना के आधार और पुराने आंकड़ों में किए गए संशोधनों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल नाममात्र जीडीपी के आंकड़ों की तुलना करना पर्याप्त नहीं है. आर्थिक स्थिति का सही आकलन करने के लिए महंगाई को समायोजित करने वाली वास्तविक जीडीपी वृद्धि को देखना जरूरी है.

हालांकि, गर्ग ने यह नहीं कहा कि भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि शून्य रही है. उनके अनुमान के मुताबिक, वास्तविक वृद्धि दर 4% से 5% के आसपास हो सकती है.

चार वित्तीय वर्षों के आंकड़ों में हुआ संशोधन

जयराम रमेश के मुताबिक, जीडीपी के आंकड़ों में केवल एक तिमाही के स्तर पर बदलाव नहीं हुआ है. 2022 से 2026 तक चार वित्तीय वर्षों के आंकड़ों में बाद में संशोधन किया गया और 2022-23 से लगभग हर तिमाही के आंकड़ों में कटौती की गई.

उनका दावा है कि पहले के आंकड़ों में सरकार द्वारा दिखाई गई अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि, जिसे बाद में संशोधित कर घटाया गया, करीब 43 लाख करोड़ रुपये बैठती है. यह राशि महाराष्ट्र की एसजीडीपी के लगभग बराबर है. महाराष्ट्र देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था है.

जयराम रमेश ने सरकार से पूछा है कि आधार वर्ष और जीडीपी गणना की पद्धति में बदलाव के कारण अर्थव्यवस्था के अनुमानित आकार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई. उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि पहले जिस आर्थिक गतिविधि का अनुमान लगाया गया था, उसमें इतनी बड़ी अधिक-गणना आखिर किन क्षेत्रों में हुई थी.

महंगाई के आंकड़ों पर भी सवाल

कांग्रेस ने जीडीपी की गणना में इस्तेमाल किए गए महंगाई समायोजन पर भी सवाल उठाया है.

जयराम रमेश के अनुसार, जीडीपी को वास्तविक रूप में बदलने के लिए 2.5% का डिफ्लेटर इस्तेमाल किया गया, जबकि इसी अवधि में खुदरा महंगाई 3.9% और थोक महंगाई 9.4% रही.

उनका कहना है कि डिफ्लेटर और वास्तविक महंगाई के बीच इतना बड़ा अंतर जीडीपी की वास्तविक वृद्धि दर को प्रभावित कर सकता है. यदि महंगाई का अधिक उपयुक्त आंकड़ा इस्तेमाल किया जाए तो 7.8% की आधिकारिक वृद्धि दर और नीचे आ सकती है.

कांग्रेस ने कहा है कि इन परिस्थितियों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर वास्तव में अर्थव्यवस्था की स्थिति को दर्शाती है या आंकड़ों की गणना के तरीके का नतीजा है.

सरकार से सेक्टरवार स्पष्टीकरण की मांग

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने आधार वर्ष बदलने के कारण पिछले वर्षों के जीडीपी आंकड़ों में हुए संशोधनों की वजह बताई है. लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि आर्थिक गतिविधियों में की गई कटौती किन-किन क्षेत्रों में हुई.

मसलन, 6 लाख करोड़ रुपये की जिस आर्थिक गतिविधि का पहले अनुमान लगाया गया था और जिसे बाद में घटाया गया, वह कृषि, विनिर्माण, सेवा, बिजली या किसी अन्य क्षेत्र से संबंधित थी- सरकार ने इसका स्पष्ट विवरण नहीं दिया है.

कांग्रेस पार्टी का पूरा बयान.

पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने भी इसी मुद्दे पर सवाल उठाए हैं. ऐसे में कांग्रेस ने केंद्र से जीडीपी के आंकड़ों में हुए बदलाव और 7.8% की मौजूदा वृद्धि दर के पीछे के पूरे गणित को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की है.