बेलगावी में भू-माफिया और जालसाज़ों का नेटवर्क दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। फर्जी दस्तावेज़ तैयार करके बुज़ुर्गों और विदेशों में रहने वाले लोगों की जमीन-जायदाद पर कब्ज़ा करने का बड़ा मामला सामने आया है। इसी सिलसिले में आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए एडवोकेट सचिन बिच्चू ने कई गंभीर इल्ज़ाम लगाए और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े अहम दस्तावेज़ मीडिया के सामने पेश किए।

एडवोकेट सचिन बिच्चू के मुताबिक, तहसीलदार दफ्तर के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से फर्जी वसीयत तैयार कर करोड़ों रुपये की जमीन को गैरकानूनी तरीके से अपने नाम कराने की कोशिश की गई।

उन्होंने बताया कि बेलगावी के रहने वाले और कनाडा के स्थायी निवासी रहे मरहूम प्रभात दिनकर देसाई के पिता से विरासत में मिली करीब 2 एकड़ जमीन पर कब्ज़ा करने के लिए सुरेश श्रीपाद देशपांडे और अन्य लोगों ने कथित तौर पर फर्जी वसीयत तैयार की।

बिच्चू ने बताया कि प्रभात देसाई का इंतकाल वर्ष 2014 में ही हो चुका था, इसके बावजूद उनके नाम पर वर्ष 1984 की फर्जी तारीख डालकर और नकली सरकारी मुहरों का इस्तेमाल करते हुए एक कथित जाली वसीयत तैयार की गई।

मामले में बेलगावी तहसीलदार दफ्तर के राजस्व निरीक्षकों और दूसरे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए देसाई परिवार के कानूनी वारिसों को कोई नोटिस तक जारी नहीं किया और अचानक म्यूटेशन रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया। आरोप है कि इस तरह कथित जालसाज़ों को सरकारी स्तर पर मदद पहुंचाई गई।

वहीं, बेलगावी उप-पंजीयक कार्यालय की तरफ से जारी प्रमाणपत्र में कथित तौर पर यह साफ किया गया है कि संबंधित वसीयत फर्जी है और इस तरह का कोई दस्तावेज़ वहां रजिस्टर्ड ही नहीं हुआ है।

एडवोकेट सचिन बिच्चू ने यह भी दावा किया कि सुरेश देशपांडे और देसाई परिवार के बीच न तो कोई पारिवारिक रिश्ता था और न ही किसी तरह का कारोबारी लेन-देन।

उन्होंने कहा कि बेलगावी जिले में इस तरह के सैकड़ों मामले सामने आ रहे हैं, जहां जालसाज़ी के जरिए जमीन-जायदाद पर कब्ज़ा करने की कोशिश की जा रही है। मूल मालिकों को अदालतों में सालों तक कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर किया जाता है और बाद में उन्हें समझौता करने पर मजबूर करने की कोशिश की जाती है।

एडवोकेट सचिन बिच्चू ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर से तत्काल विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की है, ताकि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच हो और जमीन-जायदाद के फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।