बेलगावी में हजारों ‘म्यूल बैंक खातों’ के जरिए चल रहा बड़ा साइबर फ्रॉड नेटवर्क उजागर
बेलगावी में हजारों म्यूल बैंक खातों के जरिए संचालित एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले ने यह भी उजागर किया है कि साइबर अपराधी किस तरह अनजान और भोले-भाले लोगों का इस्तेमाल अवैध रूप से प्राप्त धन को इधर-उधर स्थानांतरित करने के लिए कर रहे हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि संगठित साइबर अपराध गिरोह ने करीब 2,900 बैंक खातों का उपयोग फर्जी लेन-देन को अंजाम देने के लिए किया। ये खाते ऐसे लोगों द्वारा खोले गए या साझा किए गए थे जिन्हें जल्दी कमीशन और आसान कमाई का लालच दिया गया था।
बेलगावी के पुलिस आयुक्त भूषण बोरेसे ने बताया कि इस मामले में साइबर, आर्थिक और नारकोटिक्स (CEN) पुलिस स्टेशन में चार मामले दर्ज किए गए हैं और नेटवर्क के मुख्य संचालकों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी इन दिनों बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को खास तौर पर निशाना बना रहे हैं। उन्हें छोटे-मोटे कमीशन का लालच देकर या तो उनके बैंक खातों की जानकारी साझा करने के लिए राजी किया जाता है या नए खाते खुलवाए जाते हैं। बाद में इन खातों का इस्तेमाल “म्यूल अकाउंट” के रूप में साइबर ठगी से प्राप्त धन को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए किया जाता है।
पुलिस आयुक्त बोरेसे ने बताया,
“कई मामलों में लोगों से कहा जाता है कि उनके खाते से जितनी रकम ट्रांसफर होगी, उसके आधार पर उन्हें प्रतिशत के रूप में कमीशन मिलेगा। लेकिन एक बार खाता सौंपने के बाद वही खाता बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के लेन-देन का माध्यम बन जाता है।”
एक मामले में बेलगावी के एक युवक ने कथित तौर पर नौ अलग-अलग बैंक खाते खोलकर कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को सौंप दिए थे। पुलिस जांच में पता चला कि इन खातों के जरिए लगभग 80 लाख रुपये का लेन-देन किया गया, जिसके बाद रकम को आगे ट्रांसफर कर दिया गया।
एक अन्य जांच में यह भी सामने आया कि दुबई में काम करने वाले एक व्यक्ति ने अपनी मां के माध्यम से एक स्वयं सहायता समूह (Self-Help Group) के नाम पर बैंक खाता खुलवाया था, जिसका बाद में फर्जी लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर फर्जी वर्क-फ्रॉम-होम ऑफर, ऑनलाइन नौकरी के अवसर और कमीशन आधारित योजनाओं के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि वे किसी वैध आर्थिक गतिविधि में शामिल हैं।
अधिकारियों ने अब तक इस धोखाधड़ी से जुड़े कई म्यूल खातों को ब्लॉक कर दिया है और लेन-देन के ट्रेल का विश्लेषण कर नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल इस मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि जिम्मेदार लोगों को पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
पुलिस आयुक्त भूषण बोरेसे ने नागरिकों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि वे अनजान लोगों के साथ अपने बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग एक्सेस साझा न करें।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा,
“अगर कोई व्यक्ति अपने बैंक खाते का इस्तेमाल इस तरह के लेन-देन के लिए होने देता है तो वह कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। भले ही वह यह दावा करे कि उसे इसकी जानकारी नहीं थी, फिर भी उस पर आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।”
पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि उन्हें संदिग्ध नौकरी के प्रस्ताव, कमीशन आधारित पैसे ट्रांसफर योजनाएं या निजी बैंक खाते के इस्तेमाल का अनुरोध मिले तो वे तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दें।







