बेंगलुरु : राज्य की प्रमुख मुस्लिम तंजीमों और संगठनों की ओर से 16 मई, शनिवार को बेंगलुरु के टाउन हॉल में “कर्नाटक मुस्लिम सम्मेलन” आयोजित किया गया है। इस बड़े सार्वजनिक सम्मेलन में “कांग्रेस सरकार ने क्या कहा? क्या किया? और आगे क्या?” शीर्षक के तहत सरकार के तीन साल के कामकाज पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी।

जारी बयान में कहा गया है कि इस सम्मेलन में किसी भी राजनेता को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। सम्मेलन के बाद यह रिपोर्ट सरकार और सभी विधायकों को सौंपी जाएगी। गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने से ठीक पहले यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों में इस बात को लेकर नाराज़गी जताई जा रही है कि कांग्रेस को सत्ता में लाने में निर्णायक भूमिका निभाने के बावजूद समुदाय की अनदेखी की जा रही है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि राज्य में मुसलमानों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा और उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही, पार्टी के लिए दशकों तक काम करने वाले वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं को निलंबित किए जाने की घटनाओं पर भी असंतोष व्यक्त किया गया।

इसी पृष्ठभूमि में यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कांग्रेस सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने के साथ-साथ भविष्य की मांगों को भी सामने रखा जाएगा।

यह फैसला 6 मई को बेंगलुरु के शिवाजीनगर स्थित एजे इंटरनेशनल होटल में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में राज्य की प्रमुख मुस्लिम तंजीमें, उलेमा संगठन, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और कर्नाटक राज्य मुस्लिम संगठन (KRMO) की एड-हॉक कमेटी के सदस्य शामिल हुए।

बैठक में वरिष्ठ उलेमा, जमाअतों के प्रतिनिधि, वकील, सेवानिवृत्त अधिकारी, पत्रकार और KRMO एड-हॉक कमेटी के सदस्यों सहित 75 से अधिक प्रतिनिधि मौजूद थे। इस दौरान कांग्रेस सरकार के तीन साल के कामकाज, मुसलमानों से किए गए वादों, पूरे हुए और अधूरे आश्वासनों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भेदभाव और समुदाय की मांगों पर आधारित रिपोर्ट पेश की गई।

रिपोर्ट में हिजाब प्रतिबंध, आरक्षण रद्द, हेट स्पीच और हेट क्राइम, बजट आवंटन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, वक्फ मुद्दा, गोहत्या निषेध कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, छात्रवृत्ति और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनुदानों सहित कई मुद्दों को शामिल किया गया है। इन विषयों पर सुझाव और संशोधन स्वीकार किए गए।

बैठक में कांग्रेस सरकार द्वारा मुस्लिम समुदाय के साथ किए जा रहे व्यवहार पर गहरी नाराज़गी जताई गई। कई प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर सरकार और कांग्रेस पार्टी का यही रवैया जारी रहा तो समुदाय को अपने राजनीतिक विकल्प खुले रखने होंगे।

सम्मेलन का नाम “कर्नाटक मुस्लिम सम्मेलन – कांग्रेस सरकार ने क्या कहा? क्या किया? और आगे क्या? रिपोर्ट जारी” रखा गया है।

सभी संगठनों और जमाअतों से अपील की गई है कि वे राज्य के हर जिले से अधिक से अधिक लोगों को सम्मेलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करें ताकि सरकार और कांग्रेस पार्टी को एक मजबूत संदेश दिया जा सके।

बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि 16 मई के सम्मेलन में किसी भी राजनेता को आमंत्रित नहीं किया जाएगा। सम्मेलन के बाद कांग्रेस सरकार के तीन साल के कामकाज पर आधारित रिपोर्ट मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों को सौंपी जाएगी।

Source: Vartha Bharathi (Translated in Hindi)