पत्रकार गौरी लंकेश की 5 सितंबर, 2017 को बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसे लेकर दक्षिणपंथी हिंदुत्व समूहों के लोगों के ख़िलाफ़ सुनवाई चल रही है. इसकी सुनवाई करने वाले जस्टिस केएस भरत कुमार सातवें जज हैं. इससे पहले सुनवाई कर रहे छह जजों को हाईकोर्ट में पदोन्नत कर दिया गया और एक जज का तबादला हाईकोर्ट के सीनियर प्रशासनिक पद पर कर दिया गया.
नई दिल्ली: पत्रकार और कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के आरोपी दक्षिणपंथी हिंदुत्व समूहों के 17 लोगों के खिलाफ चल रही सुनवाई अब सातवें जज के पास पहुंच गई है. इन 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र 2018 में दाखिल की गई थी, जबकि सुनवाई 2022 में शुरू हुई थी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (10 जून) को केएस भरत कुमार ने सुनवाई शुरू की, क्योंकि इससे पहले के जज एम. चंद्रशेखर रेड्डी का तबादला कर्नाटक हाईकोर्ट में एक सीनियर प्रशासनिक पद पर कर दिया गया था.
कुमार ने 1 जून को बेंगलुरु के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय का कार्यभार संभाला. उन्होंने मामले में एक पुलिस कॉन्स्टेबल का बयान दर्ज करके सुनवाई शुरू की. यह कॉन्स्टेबल इस मामले में अभियोजन पक्ष के 400 गवाहों में से 216वां गवाह है.
मुकदमे की सुनवाई 4 जुलाई 2022 को शुरू हुई थी और तब से रोजाना चल रही है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस मामले की सुनवाई करने वाले अन्य सभी पूर्व न्यायाधीश – एस. अमरन्नावर, अनिल कट्टी, सीएम जोशी, रामकृष्ण हुड्डार और बी. मुरलीधर पाई को हाईकोर्ट में पदोन्नत कर दिया गया था.
55 वर्षीय गौरी लंकेश साप्ताहिक पत्रिका ‘लंकेश पत्रिके’ की संपादक थीं. हिंदुत्व की मुखर आलोचक गौरी लंकेश की 5 सितंबर, 2017 की देर रात बेंगलुरु स्थित उनके घर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या करने वाले दो लोग मोटरसाइकिल पर आए थे, जिनकी पहचान बीजापुर में श्रीराम सेना के पूर्व सदस्य 26 वर्षीय परशुराम वाघमारे और हुबली के हिंदुत्व कार्यकर्ता 27 वर्षीय गणेश मिस्किन के तौर पर हुई थी.
विशेष जांच दल (एसआईटी) के अनुसार, उनकी हत्या की योजना सनातन संस्था के बैनर तले काम कर रहे कट्टर दक्षिणपंथी समूहों ने बनाई थी. एसआईटी का कहना है कि इन समूहों ने 2013 से 2018 के बीच हिंदुत्व के आलोचकों की हत्या और उन पर हमले करने के लिए एक संगठित नेटवर्क (सिंडिकेट) तैयार किया था. इस कथित ‘हिट-लिस्ट’ में द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन का नाम भी शामिल था.
प्रारंभिक आरोपपत्र में यह भी कहा गया था कि लंकेश की हत्या उसी पिस्तौल से की गई थी जिसका इस्तेमाल 30 अगस्त 2015 को कर्नाटक के धारवाड़ में एमएम कलबुर्गी की हत्या में किया गया था.
अखबार के अनुसार, मई 2025 में बेलगावी के एक गवाह, जिसने पहले अदालत में बाहरी विशेषज्ञों द्वारा संचालित प्रशिक्षण शिविरों में भाग लेने संबंधी बयान दिया था, अपने बयान से मुकर गया और उसने अपने पहले की बातों से इनकार कर दिया.
कर्नाटक के उडुपी का एक अभियोजन पक्ष का गवाह, जिसकी पहचान दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी सिंडिकेट द्वारा भर्ती किए गए लोगों में की गई थी, उसने भी समूह की बैठकों और प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने से इनकार कर दिया.
एक अन्य अभियोजन गवाह, जिसका संबंध हिंदू जनजागृति समिति से बताया गया है और जिस पर आरोप था कि उसने पत्रकार के घर की रेकी (जासूसी निरीक्षण) के लिए एक आरोपी को अपनी मोटरसाइकिल उधार दी थी, वह भी कथित तौर पर अपने बयान से मुकर गया.
Source: The Wire

