मुल्क की मौजूदा सियासी सूरत-ए-हाल को देखते हुए ऐसा महसूस होता है कि ऑपोज़िशन अब तक मुत्तहिद होकर बरसर-ए-इक़्तेदार NDA हुकूमत को मज़बूती से घेरने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका है। इसकी एक बड़ी वजह INDIA Bloc के अंदर मौजूद आपसी इख़्तिलाफ़ात, रंजिशें और तालमेल की कमी रही है।

साल 2023 में बड़े अज़ाइम के साथ शुरू हुआ INDIA Bloc करीब 25 सियासी जमातों का साझा प्लेटफॉर्म था, लेकिन वक्त के साथ यह उम्मीदों के मुताबिक एक मज़बूत मुत्तहिदा मोर्चा साबित नहीं हो सका। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस का आमने-सामने चुनाव लड़ना, तमिलनाडु में DMK और कांग्रेस के बीच बढ़ते मतभेद, तथा आम आदमी पार्टी का गठबंधन से अलग होना इसकी मिसालें हैं।

अब INDIA Bloc में 23 पार्टियां बची हैं। मौजूदा सियासी, मआशी और समाजी हालात को देखते हुए 8 जून 2026 को दिल्ली में हुई अहम बैठक में ऑपोज़िशन ने हुकूमत को जवाबदेह बनाने और संयुक्त रणनीति के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पांच अहम मुद्दों पर इत्तेफाक-ए-राय कायम हुआ है। इनमें वोटर लिस्ट की स्पेशल रिवीजन (SIR) और चुनावी अमल की गैर-जानिबदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को संयुक्त पत्र भेजने का फैसला शामिल है।

बैठक में NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित बे-ज़ाब्तगियों का मुद्दा भी उठाया गया। INDIA Bloc ने मांग की कि लाखों तलबा के मुस्तकबिल पर असर डालने वाली इन घटनाओं की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें।

इसके अलावा बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी, किसानों के मसाइल और आम लोगों की परेशानियों को भी ऑपोज़िशन ने अपनी सियासी जद्दोजहद का केंद्रीय मुद्दा बनाने का फैसला किया। गठबंधन ने मांग की कि हुकूमत इन मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाए।

बैठक में यह भी तय किया गया कि INDIA Bloc की मीटिंग हर दो महीने में नियमित रूप से होगी। अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में आयोजित की जाएगी। साथ ही संसद के मानसून सत्र के दौरान रोज़ाना विपक्षी नेताओं की बैठक कर साझा रणनीति बनाई जाएगी ताकि एक आवाज़ में हुकूमत को जवाबदेह बनाया जा सके।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि देश इस समय सियासी, मआशी, समाजी और विदेश नीति से जुड़े कई चैलेंजों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हो रहा है और संघीय ढांचे को नुकसान पहुंच रहा है।

INDIA Bloc ने यह भी ऐलान किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और अवाम के मसाइल के लिए उसका संघर्ष जारी रहेगा।

हालांकि इसी दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर को अलग संसदीय समूह की मान्यता देने की मांग और NDA को समर्थन देने के फैसले ने विपक्षी एकता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

बहरहाल, देश में जिस तरह के हालात हैं और NDA अपनी सियासी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है, ऐसे में अगर ऑपोज़िशन वास्तव में एकजुट होकर काम करे तो वह महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर अवाम को राहत दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है। अब देखना यह है कि INDIA Bloc अपने नए अज़ाइम को सिर्फ नारों तक सीमित रखता है या उन्हें अमल में भी तब्दील कर पाता है।

अज़ : मोहम्मद आज़म शाहिद, बेंगलुरु

 

Source: Haqeeqat Times (Translated in hindi)