उर्दू विज्ञापन विवाद: CM Siddaramaiah ने विपक्ष पर लगाया दोहरेपन का आरोप
सरकारी विज्ञापन विभिन्न भाषाओं में देना सामान्य प्रक्रिया, भाजपा की आलोचना खारिज
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक उर्दू अखबार में प्रकाशित सरकारी विज्ञापन को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना को सख्ती से खारिज करते हुए इसे “दोहरेपन” की राजनीति करार दिया है।
अपने बयान में उन्होंने कहा कि उन्होंने विपक्षी नेताओं द्वारा उर्दू विज्ञापन के विरोध में दिए गए बयान सुने हैं, जबकि सत्ता में रहते हुए वे स्वयं कई बार उर्दू भाषा में सरकारी विज्ञापन जारी कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व मुख्यमंत्री B. S. Yediyurappa और Basavaraj Bommai के कार्यकाल में उर्दू विज्ञापन किस उद्देश्य से जारी किए गए थे?
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न भाषाओं के समाचारपत्रों में विज्ञापन देती है। जिस भाषा के पाठक होते हैं, उसी भाषा में विज्ञापन देना पुरानी और सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, ताकि लोग संदेश को बेहतर ढंग से समझ सकें और विज्ञापन का उद्देश्य पूरा हो सके।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं ने अतीत में कई बार उर्दू में विज्ञापन जारी किए, तब उन्हें यह “तुष्टिकरण” नहीं लगा। लेकिन वर्तमान सरकार द्वारा उर्दू विज्ञापन जारी करते ही अचानक “कन्नड़ प्रेम” जाग उठना महज राजनीतिक पाखंड है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कन्नड़ भाषा और कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए उन्हें किसी से प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि वे अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही कन्नड़ संरक्षण आंदोलन से जुड़े रहे हैं और कन्नड़ उनके लिए केवल एक भाषा नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
Source: Haqeeqat Times







