अमेरिका में ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. 50 राज्यों में हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे. मिनेसोटा में मुख्य कार्यक्रम हुआ, जहां पुलिस कार्रवाई में मारे गए नागरिकों को श्रद्धांजलि दी गई. प्रदर्शनकारियों ने लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई.

 

नई दिल्ली: अमेरिका के कई शहरों में एक बार फिर ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. यह प्रदर्शन उस संयुक्त अमेरिका-इज़राइल सैन्य कार्रवाई के एक महीने बाद हुआ है, जो ईरान के खिलाफ शुरू की गई थी.

अल जज़ीरा के मुताबिक, शनिवार (28 मार्च) को हुए ये मार्च और रैलियां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान ‘नो किंग्स’ आंदोलन का तीसरा बड़ा चरण हैं. आयोजकों के अनुसार, देश के सभी 50 राज्यों में 3,300 से अधिक कार्यक्रमों की योजना बनाई गई थी. न्यूयॉर्क, लॉस एंजेलिस और वॉशिंगटन डीसी जैसे बड़े शहरों में भारी भीड़ देखने को मिली, जबकि रोम, पेरिस और बर्लिन जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में भी समानांतर कार्यक्रम आयोजित हुए.

हालांकि, इस बार आंदोलन की रणनीति केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही. आयोजकों ने खासतौर पर उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें आमतौर पर रूढ़िवादी माना जाता है. उनका दावा है कि करीब दो-तिहाई प्रतिभागियों ने बड़े शहरों के बाहर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.

‘इंडिविज़िबल’ नामक प्रगतिशील संगठन की सह-संस्थापक लीआ ग्रीनबर्ग के मुताबिक, ‘इस बार की सबसे बड़ी कहानी सिर्फ यह नहीं है कि कितने लोग सड़कों पर उतरे, बल्कि यह है कि वे कहां उतरे.’

इस आंदोलन का मुख्य कार्यक्रम मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस, सेंट पॉल क्षेत्र, जिसे ‘ट्विन सिटीज़’ कहा जाता है, में आयोजित किया गया. यह इलाका हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन की कड़ी आप्रवासन नीति का केंद्र रहा है.

दिसंबर में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ के तहत 3,000 से अधिक संघीय एजेंटों को यहां तैनात किया गया था. इन एजेंटों पर आरोप लगा कि उन्होंने निर्वासन अभियान के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग किया.

जनवरी में इस अभियान के दौरान दो अमेरिकी नागरिक (एलेक्स प्रेट्टी और रेनी निकोल गुड) की गोली लगने से मौत हो गई थी. इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया और सुधार की मांग तेज हो गई. इस अभियान के खिलाफ दर्जनों मुकदमे भी दायर किए गए, जिसके बाद फरवरी में इसे समाप्त कर दिया गया.

शनिवार के प्रदर्शन में इन दोनों की याद में श्रद्धांजलि दी गई. कार्यक्रम में भाषण, संगीत प्रस्तुतियां और सामाजिक कार्यकर्ताओं, श्रमिक नेताओं तथा राजनेताओं की भागीदारी रही.

इस दौरान प्रगतिशील नेता बर्नी सैंडर्स ने लोगों को संबोधित किया, जबकि मशहूर रॉक कलाकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन और लोक गायिका जोन बाएज़ ने प्रस्तुति दी. अभिनेता रॉबर्ट डी नीरो ने रिकॉर्डेड संदेश के जरिए प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया.

उन्होंने कहा, ‘आपके साहस और प्रतिबद्धता ने हम सभी को प्रेरित किया है. आपने अहिंसक विरोध की ताकत को दिखाया है.’

वॉशिंगटन डीसी में भी प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल और वॉशिंगटन मॉन्यूमेंट के आसपास एकत्र होकर रैलियां कीं. लोगों ने तख्तियां उठाईं और ट्रंप प्रशासन के प्रतीकों के पुतले भी लहराए.

इससे पहले जून और अक्टूबर में हुए ‘नो किंग्स’ प्रदर्शनों में लाखों लोग शामिल हुए थे. अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक एआई-निर्मित वीडियो साझा किया था, जिसमें वह प्रदर्शनकारियों का मज़ाक उड़ाते दिखे थे.

इस बीच, अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रही है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी सीटें बढ़ाने की उम्मीद में है.

बर्नी सैंडर्स ने प्रदर्शन के दौरान लोगों से चुनाव में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा, ‘हम इस देश को अधिनायकवाद या कुलीनतंत्र की ओर नहीं जाने देंगे. अमेरिका में जनता ही सर्वोपरि है.’