औरंगज़ेब आलमगीर (3 मार्च 1618 – 3 मार्च 1707): हुकूमत, सादगी और ऐतिहासिक विरासत पर एक नज़र
औरंगज़ेब आलमगीर का इंतेकाल 28 ज़िलक़ादा 1118 हिजरी को महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुआ था। उन्होंने लगभग 89 साल की उम्र पाई, जबकि हिजरी हिसाब से उनकी उम्र 91 साल बताई जाती है। उनकी वसीयत के मुताबिक उन्हें महाराष्ट्र के खुल्दाबाद (ज़िला औरंगाबाद) में दफन किया गया। सादगी पसंद और दीनी मिजाज़ बादशाह के तौर पर उनकी पहचान थी और उनके अद्ल-ओ-इंसाफ की चर्चा इतिहास में मिलती है।
तारीखी किताबों के मुताबिक, औरंगज़ेब 31 जुलाई 1658 को तख्तनशीन हुए और 1707 तक हुकूमत करते रहे। उनके शासनकाल को लगभग 49 साल माना जाता है, जबकि कुछ इतिहासकार इसे हिजरी हिसाब से 51 साल बताते हैं। उनका असली नाम मुहीउद्दीन था और “आलमगीर” का ख़िताब उन्हें उनके वालिद शाहजहां ने दिया था।
दुनिया की GDP में हिंदुस्तान की बड़ी हिस्सेदारी
बताया जाता है कि औरंगज़ेब के दौर-ए-हुकूमत में हिंदुस्तान आर्थिक रूप से बेहद मजबूत था। उस समय दुनिया की कुल GDP का लगभग 25 फीसदी हिस्सा हिंदुस्तान का माना जाता था, जबकि इंग्लैंड की हिस्सेदारी करीब 2 फीसदी थी।
बादशाह ही नहीं, एक अदबी शख्सियत भी थे
औरंगज़ेब सिर्फ शासक ही नहीं, बल्कि एक अदबी और इल्मी शख्सियत भी थे। उनके लिखे खत “रुक़आत-ए-आलमगीरी” के नाम से मशहूर हैं। उनके दौर में इस्लामी कानूनों के संग्रह “फ़तावा-ए-आलमगीरी” को भी तैयार किया गया, जिसे आज भी अहम माना जाता है।
शाही प्रशासन में हिंदुओं की भागीदारी बढ़ी
इतिहास के हवाले से कहा जाता है कि औरंगज़ेब के शासनकाल में शाही प्रशासन में हिंदू अधिकारियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई और यह हिस्सा मुगल दौर में सबसे अधिक स्तर तक पहुंचा।
हुकूमत और फैसलों पर अलग-अलग राय
इतिहास में औरंगज़ेब के दौर को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं। कुछ लोग उन्हें इस्लामी मूल्यों को मजबूत करने वाला शासक मानते हैं, तो कुछ फैसलों पर आलोचनाएं भी दर्ज हैं। मंदिरों, जज़िया, प्रशासनिक नीतियों और धार्मिक मामलों पर उनके कदम आज भी इतिहासकारों के बीच बहस का विषय बने हुए हैं।
सादगी की मिसाल बनी उनकी आखिरी वसीयत
अपनी आखिरी वसीयत में औरंगज़ेब ने सादगी से दफनाने की इच्छा जताई थी। आज भी महाराष्ट्र के खुल्दाबाद में उनकी साधारण मजार मौजूद है, जो अपनी सादगी की वजह से चर्चा में रहती है।
लेखक: मोहम्मद यूसुफ रहीम बेदरी, बीदर (कर्नाटक)
Source: Haqeeqat Times

