कर्नाटक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बड़ी तादाद में वोटरों के नाम हटाने की कोशिशों का मामला सामने आया है। राज्य के कम-से-कम दो विधानसभा क्षेत्रों में ऐसी अर्जियां दाखिल की गई हैं। ‘द न्यूज़ मिनट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ये अर्जियां आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख से सिर्फ 48 घंटे पहले जमा की गई थीं।
नियमों के मुताबिक, अगर किसी वोटर का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए Form 7 के जरिए आपत्ति दाखिल की जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को हर मामले में अनिवार्य रूप से व्यक्तिगत सुनवाई का मौका मिलना जरूरी नहीं है। अगर नामित अधिकारी आपत्ति को सही मानते हैं, तो वह सीधे नाम हटाने का फैसला कर सकते हैं।
सिर्फ दो दिनों—22 और 23 सितंबर—को दो विधानसभा क्षेत्रों में कुछ ही लोगों ने 3,750 से ज्यादा वोटरों के नाम हटाने की मांग करते हुए अर्जियां दाखिल कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन नामों में बड़ी संख्या मुस्लिम वोटरों की है, जबकि कुछ अनुसूचित जाति से जुड़े नाम भी शामिल हैं।
ये अर्जियां विजयपुरा जिले के बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र, जिसका प्रतिनिधित्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री एम.बी. पाटील करते हैं, और बीडर जिले के भालकी विधानसभा क्षेत्र, जिसका प्रतिनिधित्व पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री ईश्वर खंड्रे करते हैं, में दाखिल की गईं।
Form 7 के जरिए नाम हटाने की आपत्ति
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, जानकारी में सुधार करने या किसी नाम को हटाने के लिए 24 अगस्त से 24 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने का समय दिया गया था।
Election Commission के मुताबिक, दावों और आपत्तियों का निपटारा 22 अक्टूबर तक किया जाएगा और 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए Form 7 का इस्तेमाल किया जाता है। इसका इस्तेमाल तब भी किया जा सकता है जब कोई व्यक्ति दूसरी जगह शिफ्ट हो गया हो या किसी मृत व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटाना हो।
हालांकि, कानून किसी ऐसे व्यक्ति के नाम को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज करने की अनुमति देता है, जिससे आपत्ति करने वाले व्यक्ति का कोई व्यक्तिगत संबंध न हो।
Registration of Electors Rules, 1960 के तहत दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया तय की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर Form 7 दाखिल करने वाला व्यक्ति लिखित तौर पर सुनवाई की मांग नहीं करता, तो संबंधित अधिकारी बिना सुनवाई के भी Form 7 को स्वीकार या खारिज कर सकता है।
इसका मतलब यह है कि अगर अधिकारी को किसी नाम को हटाने की आपत्ति सही लगती है, तो वह उस नाम को सीधे मतदाता सूची से हटाने का फैसला कर सकता है। हालांकि, अधिकारी चाहें तो आपत्ति दाखिल करने वाले व्यक्ति और संबंधित वोटर को नोटिस जारी करके दोनों पक्षों को सुनने के बाद भी फैसला कर सकते हैं।
बाबलेश्वर में 413 नामों पर आपत्ति
मिसाल के तौर पर, बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र में गोविंदराज मुदनूर नाम के एक व्यक्ति ने 413 लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है।
अगर अधिकारी गोविंदराज की आपत्ति को सही मानते हैं, तो Election Commission के संबंधित अधिकारी इन 413 लोगों के नाम सीधे वोटर लिस्ट से हटा सकते हैं।
दूसरी स्थिति में अधिकारी गोविंदराज और Form 7 में जिन लोगों के नाम दिए गए हैं, उन्हें नोटिस जारी करके सुनवाई के लिए बुला सकते हैं और उसके बाद यह फैसला कर सकते हैं कि उन नामों को वोटर लिस्ट से हटाया जाए या नहीं।
Form 10 क्या है?
एक दिन में दाखिल किए गए सभी Form 7 applications का consolidated statement Form 10 कहलाता है। इसे Election Commission of India की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।
बाबलेश्वर और भालकी विधानसभा क्षेत्रों के Form 10 statements के मुताबिक, 38 लोगों ने कुल 3,757 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आपत्तियां दाखिल कीं।
22 और 23 सितंबर को कुल 3,909 Form 7 applications दाखिल किए गए। जबकि 22 सितंबर से पहले के पांच दिनों में ऐसे applications की संख्या अधिकतम single digit में थी।
बाबलेश्वर
बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र में 22 सितंबर को दाखिल 1,373 deletion applications में से करीब 96 फीसदी applications सिर्फ 7 लोगों ने दाखिल किए।
इसके अगले दिन, 23 सितंबर को दाखिल 257 applications सभी 6 लोगों ने दाखिल किए।
भालकी
भालकी विधानसभा क्षेत्र में 22 सितंबर को नाम हटाने के लिए दाखिल 384 applications में से करीब 97 फीसदी applications 10 लोगों ने दाखिल किए।
23 सितंबर को 1,895 applications में से करीब 95 फीसदी applications 31 लोगों ने दाखिल किए।
इन लोगों की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ‘द न्यूज़ मिनट’ ने अपने analysis में उन लोगों को शामिल नहीं किया जिन्होंने 10 से कम applications दाखिल किए थे।
ज़्यादातर नाम मुस्लिम वोटरों के
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लोगों के नामों से पता चलता है कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों में वोटर लिस्ट से हटाए जाने के लिए प्रस्तावित नामों में बड़ी संख्या मुस्लिम वोटरों की है।
इसके अलावा, मादिगा/मादर समुदाय का संकेत देने वाले surname वाले कुछ लोगों के नाम भी deletion applications में शामिल हैं।
कुछ मामलों में लोगों ने अपने ही नाम या संभवतः अपने रिश्तेदारों के नाम हटाने के लिए भी आवेदन किया है।
बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री एम.बी. पाटील साल 2008 से विजयपुरा जिले के बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
पिछले चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में 2,17,491 registered voters थे और एम.बी. पाटील ने 15,216 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था।
आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी 48 घंटे की अवधि में बाबलेश्वर क्षेत्र में 1,577 applications ऐसे वोटरों के नाम हटाने के लिए दाखिल किए गए, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे मौके पर मौजूद नहीं हैं, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं या पहले से किसी अन्य स्थान पर registered हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में बड़ी संख्या मुस्लिम और मादिगा/मादर समुदाय से जुड़े नामों के खिलाफ थी।
Solidarity Youth Movement of India के कार्यकर्ता आदिल तिकोटा ने ‘द न्यूज़ मिनट’ को बताया कि इस मामले को लेकर स्थानीय तहसीलदार और Election Commission के अधिकारियों से शिकायत की गई है।
उनके मुताबिक, आपत्ति दाखिल करने वालों में से एक व्यक्ति ने बाद में माफी मांगते हुए कहा कि वह अपनी आपत्तियों को आगे नहीं बढ़ाएगा। यह जानकारी उन्होंने 24 सितंबर को दी थी।
हालांकि, उस व्यक्ति द्वारा मामला वापस लेने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद, उसी group से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर 257 नए Form 7 applications दाखिल किए। इनमें भी बड़ी संख्या मुस्लिम और मादिगा/मादर समुदाय से जुड़े लोगों के नामों को हटाने की मांग की गई।
एक Election Commission अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर ‘द न्यूज़ मिनट’ को बताया कि Form 7 को वापस लेने के लिए कोई स्पष्ट specific provision नहीं है, लेकिन practically इसे वापस लिया जा सकता है।
भालकी विधानसभा क्षेत्र
पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री ईश्वर खंड्रे साल 2008 से भालकी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
पिछले चुनाव में भालकी विधानसभा क्षेत्र में 2,30,959 registered voters थे और ईश्वर खंड्रे ने 27,706 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
22 और 23 सितंबर को कुल 31 लोगों ने कई applications दाखिल कर करीब 2,180 ऐसे वोटरों के नाम हटाने की मांग की, जिनमें लगभग सभी मुस्लिम बताए गए हैं।
इनमें से 10 लोगों ने दोनों दिनों में कई applications दाखिल किए।
बेलगावी में भी बड़े पैमाने पर नाम हटाने का आरोप
इसके अलावा, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने आरोप लगाया है कि बेलगावी जिले में भी मुस्लिम वोटरों के नाम बड़े पैमाने पर हटाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 19 सितंबर को BJP विधायक अभय पाटील ने बेलगावी महानगर पालिका को पत्र लिखकर 2,598 वोटरों को ‘फर्जी’ बताते हुए उनके नाम हटाने की मांग की थी।
हालांकि, बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र में वोटरों के verification और नाम हटाने को लेकर अभय पाटील की ओर से दी गई मांग को Election Commission के अधिकारियों ने खारिज कर दिया।
बाद में अभय पाटील ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने किसी के नाम हटाने की मांग नहीं की थी। उनका कहना था कि उन्होंने सिर्फ Election Commission से कथित ‘फर्जी’ वोटरों के आरोपों की जांच करने की मांग की थी।

