बेलगावी: बेलगावी कर्नाटक का अविभाज्य हिस्सा है और सीमा विवाद में महाजन रिपोर्ट ही अंतिम है, इसे बिना किसी देरी के पूरी तरह लागू किया जाए—इस मांग को लेकर पिछले छह महीनों से चल रहे कन्नड़ संगठनों के आंदोलन का आखिरकार अंत हो गया।
राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक, बुधवार को बेलगावी महानगर पालिका की सामान्य सभा में महाजन रिपोर्ट के अमल के समर्थन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव मंजूर किया गया। प्रस्ताव पास होते ही बाहर कन्नड़ संगठनों ने पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर विजय उत्सव मनाया।
महापौर प्रीति कामकर की अध्यक्षता में दोपहर 12 बजे सभा शुरू हुई। कुल 16 एजेंडों में सीमा विवाद का मुद्दा 10वें नंबर पर था। हालांकि, सभी चर्चाएं पूरी होने के बाद शाम करीब 6:30 बजे इस मुद्दे पर चर्चा हुई।
सभा में पालिका आयुक्त कार्तिक एम. ने बताया कि कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद में महाजन आयोग की रिपोर्ट ही अंतिम है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च 1988 को कर्नाटक विधानसभा में महाजन आयोग की रिपोर्ट को बिना किसी देरी के पूरी तरह लागू करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी तर्ज पर बेलगावी महानगर पालिका में भी प्रस्ताव पारित करने के निर्देश राज्य सरकार की ओर से दिए गए हैं।
इसके बाद महापौर प्रीति कामकर ने राज्य सरकार की ओर से बताए गए सभी बिंदुओं को सर्वसम्मति से मंजूर करने का प्रस्ताव रखा। 55 पार्षदों ने मेज थपथपाकर इसका समर्थन किया। हालांकि, एमईएस के तीन सदस्यों ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए सभा से वॉकआउट किया।
पिछले छह महीनों से कर्नाटक सीमा क्षेत्र विकास प्राधिकरण के सदस्य और कन्नड़ संगठनों की क्रिया समिति के जिला अध्यक्ष अशोक चंदारगी के नेतृत्व में 25 से ज्यादा कन्नड़ संगठनों ने इस मांग को लेकर आंदोलन किया था।
प्रस्ताव पारित होने के बाद करवे शिवरामेगौड़ा गुट के कार्यकर्ताओं ने पालिका गेट के सामने पटाखे फोड़े और मिठाई बांटकर जश्न मनाया। इसके बाद अशोक चंदारगी के नेतृत्व में रानी चन्नम्मा सर्कल पर भी विजय उत्सव मनाया गया।
पालिका के नामित सदस्य रमेश सोंटक्की ने कहा कि यह सिर्फ बेलगावी की जनता ही नहीं, बल्कि सभी कन्नड़ संगठनों की जीत है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव पहले ही पास हो जाना चाहिए था, लेकिन अब प्रस्ताव पारित होने पर मेयर, डिप्टी मेयर और सभी नगर सेवकों को बधाई दी गई।
अशोक चंदारगी ने कहा कि यह कन्नड़ और कन्नड़िगाओं की ऐतिहासिक जीत है और यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में सीमा विवाद से जुड़े मामले में कर्नाटक के पक्ष में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकता है।
सुपरसीड का डर?
इस बैठक के लिए बेलगावी एसी श्रवण नाइक को पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया था। जिला प्रशासन के मुताबिक, बैठक में प्रस्ताव पारित नहीं होने की स्थिति में राज्य सरकार द्वारा पालिका को सुपरसीड करने की संभावना जताई जा रही थी। इसी बीच, सत्तारूढ़ भाजपा सदस्यों ने पर्यवेक्षक की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए इसे गैरकानूनी बताया और सरकार को पत्र लिखने का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पर्यवेक्षक की नियुक्ति कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

