ईरान पर अमेरिका और इज़रायल का हमला दसवें दिन भी जारी है. आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद मोजतबा ख़ामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया. संघर्ष के बीच तेल की कीमत 100 डॉलर पार पहुंच गई. हमलों के कारण लेबनान में पांच लाख से ज्यादा लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.

नई दिल्ली: अमेरिका और इज़रायल द्वारा 28 फरवरी से ईरान पर शुरू किए गए सैन्य हमलों के बाद चल रहा संघर्ष अब दसवें दिन में पहुंच गया है. लगातार जारी बमबारी के बीच ईरान में बड़ा राजनीतिक बदलाव भी हुआ है. ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है.

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई ऐसे समय में सत्ता संभाल रहे हैं जब अमेरिका और इज़रायल की ओर से तेहरान समेत ईरान के कई हिस्सों पर हमले जारी हैं. इसके जवाब में ईरान भी इज़रायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. साथ ही उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनसे जुड़े लक्ष्यों को भी निशाना बनाया गया है, जहां अमेरिकी सेना तैनात है. इनमें बहरीन, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं.

इस युद्ध के चलते पूरे पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसके असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगे हैं. रविवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत साढ़े तीन साल से अधिक समय बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 107.97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो शुक्रवार के मुकाबले लगभग 16.5 प्रतिशत अधिक है. वहीं अमेरिका में उत्पादित वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड का भाव करीब 106.22 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया.

 

युद्ध का असर पड़ोसी देशों पर भी गहराता जा रहा है. इज़रायल और हिजबुल्लाह के बीच फिर से शुरू हुई झड़पों के कारण लेबनान में बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हुआ है. लेबनान के सामाजिक मामलों की मंत्री हनीन सैयद के अनुसार अब तक पांच लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. मंत्रालय से जुड़े एक पोर्टल पर 5,17,000 से ज्यादा लोगों ने खुद को विस्थापित के रूप में दर्ज कराया है, जिनमें से करीब 1,17,000 लोग सरकारी आश्रय स्थलों में रह रहे हैं.

इस बीच फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री डोमिनिक द विलपां ने संयुक्त राष्ट्र से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे अवैध युद्ध छेड़ने वाले देशों से आर्थिक क्षतिपूर्ति वसूली जा सके. उनका कहना है कि जो देश किसी युद्ध के कारण विनाश करते हैं, उन्हें उसी विनाश की भरपाई का खर्च भी उठाना चाहिए. उनके शब्दों में, “जो तोड़ता है, वही उसे दोबारा बनाए.”

लगातार बढ़ते हमलों, राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय तनाव के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति और अधिक जटिल होती जा रही है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

कौन हैं मोजतबा खामेनेई?

अमेरिका-इज़रायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की सत्ता व्यवस्था में पर्दे के पीछे प्रभावशाली माने जाते रहे हैं, हालांकि सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा खुद को ‘लो-प्रोफाइल’ बनाए रखा.

बीबीसी के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई ने अब तक न तो कोई सरकारी पद संभाला है और न ही सार्वजनिक भाषण या इंटरव्यू दिए हैं. उनके बहुत कम फोटो और वीडियो ही सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं. इसके बावजूद कई वर्षों से यह चर्चा रही है कि ईरान की सत्ता के अंदरूनी तंत्र में उनका प्रभाव काफी मजबूत रहा है.

अमेरिकी कूटनीतिक दस्तावेज, जो 2000 के दशक के अंत में विकीलीक्स के जरिए सार्वजनिक हुए थे, उनमें भी मोजतबा खामेनेई को सत्ता के भीतर प्रभावशाली शख्सियत बताया गया था. इन दस्तावेजों में उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया गया जो आधिकारिक पद पर न रहते हुए भी व्यवस्था के भीतर मजबूत पकड़ रखता है.

मोजतबा खामेनेई का जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में हुआ था. वह अली खामेनेई के छह बच्चों में दूसरे नंबर पर हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई तेहरान के धार्मिक विद्यालय ‘अलावी स्कूल’ में हुई.

ईरानी मीडिया के अनुसार 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान कुछ समय के लिए सैन्य सेवा भी की थी. आठ साल तक चले इस युद्ध ने ईरान की सत्ता और समाज में पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका को लेकर गहरे अविश्वास को और मजबूत किया था.

Source: The Wire