हर साल वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे के मौके पर Reporters Without Borders (RSF) अपना ग्लोबल प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी करता है। 30 मार्च 2026 को जारी रिपोर्ट में India 180 मुल्कों में 157वें नंबर पर पहुंच गया है।

लगातार दूसरे साल, RSF का कहना है कि जंग से तबाह Palestine—जहां सहाफियों पर बम हमले, भूख, कम्युनिकेशन कट और बड़ी तादाद में कत्ल हो रहे हैं—फिर भी कई मुल्कों से थोड़ा बेहतर प्रेस माहौल रखता है। पिछले साल वो Russia से बेहतर था, और इस बार India से भी ऊपर है। इस लिस्ट में फिलिस्तीन 156वें और भारत 157वें नंबर पर है। पिछले साल भारत 151 और फिलिस्तीन 163 पर था।

अब भारत न सिर्फ फिलिस्तीन बल्कि Tajikistan, Laos, Pakistan, Bangladesh और Cambodia से भी नीचे आ गया है। भारत सिर्फ 23 मुल्कों से ऊपर है, जिनमें सबसे नीचे Eritrea है। ये पिछले 25 साल में सबसे खराब रैंकिंग मानी जा रही है।

2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में प्रेस फ्रीडम ऐतिहासिक रूप से सबसे नीचे पहुंच गई है। पहली बार आधे से ज्यादा मुल्क “डिफिकल्ट” या “वेरी सीरियस” कैटेगरी में हैं। 2002 में जहां 20% आबादी ऐसे मुल्कों में रहती थी जहां प्रेस फ्रीडम “अच्छी” थी, अब वो घटकर 1% से भी कम रह गई है। Norway लगातार 10वें साल टॉप पर है, जबकि Eritrea आखिरी नंबर पर है।

Donald Trump की लीडरशिप में United States 7 पायदान गिरकर 64वें नंबर पर आ गया। रिपोर्ट के मुताबिक सहाफियों पर दबाव, गिरफ्तारी और मीडिया संस्थानों जैसे Voice of America, Radio Free Europe/Radio Liberty और Radio Free Asia को कमजोर करने की पॉलिसी इसकी वजह रही।

दिसंबर 2025 में Bashar al-Assad के निज़ाम के गिरने के बाद Syria 36 पायदान ऊपर चढ़कर 141वें नंबर पर पहुंचा, जबकि Niger में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।

फिलिस्तीन का मामला

अक्टूबर 2023 से, RSF के मुताबिक गाज़ा में इजरायली फौज के हाथों 220 से ज्यादा सहाफी मारे गए, जिनमें कम से कम 70 ड्यूटी के दौरान थे। International Federation of Journalists के मुताबिक ये आंकड़ा 262 से ज्यादा है। Committee to Protect Journalists के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 129 सहाफियों की हत्या हुई, जिनमें दो-तिहाई मौतों के लिए इजरायल जिम्मेदार बताया गया।

इसके बावजूद फिलिस्तीन 7 पायदान ऊपर चढ़ा। RSF की रैंकिंग 5 फैक्टर्स—सियासी, कानूनी, मआशी (आर्थिक), समाजी और सिक्योरिटी—पर आधारित होती है। अक्टूबर 2025 के सीज़फायर को इस सुधार की वजह बताया गया।

लेकिन जमीनी हकीकत अलग है—गाज़ा में बेरोजगारी 77% तक पहुंच गई है, मीडिया दफ्तरों पर हमले, कम्युनिकेशन ब्लैकआउट और विदेशी मीडिया पर पाबंदी जारी है।

भारत की गिरावट की वजह

RSF के मुताबिक भारत में आज़ाद मीडिया पर दबाव बढ़ रहा है और सहाफियों के खिलाफ क्रिमिनल कानूनों—जैसे मानहानि और नेशनल सिक्योरिटी लॉ—का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है। भारत के स्कोर खास तौर पर सियासी, मआशी और कानूनी इंडिकेटर्स में गिरे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 से Narendra Modi की हुकूमत में प्रेस फ्रीडम दबाव में है—जहां सहाफियों पर हमले, मीडिया ओनरशिप का केंद्रीकरण और सियासी झुकाव बढ़ा है।

कानूनी तौर पर, एंटी-टेरर कानूनों का इस्तेमाल सहाफियों के खिलाफ हो रहा है। 2023 के टेलीकॉम कानून, IT नियम और डेटा प्रोटेक्शन कानून सरकार को मीडिया कंट्रोल और सेंसरशिप के बड़े अधिकार देते हैं।

हालांकि India की सरकार RSF की रिपोर्ट को लगातार खारिज करती रही है। 2022 में वज़ीर-ए-इत्तलाआत Anurag Thakur ने संसद में कहा था कि हुकूमत RSF के नतीजों से इत्तेफाक नहीं रखती—और ये रुख अब तक बरकरार है।

Source: Vartha Bharathi (Translated in Hindi)