West Bengal
एसआईआर के कमाल ने खिलाया कमल

4 मई 2026 के विधानसभा चुनाव नताइज पर पूरे मुल्क की नज़रें टिकी रहीं। पांच रियासतों में हुए इंतिखाबात के नतीजे कई मायनों में हैरतअंगेज साबित हुए। सबसे बड़ा सियासी उलटफेर West Bengal में देखने को मिला, जहां वज़ीरे आला Mamata Banerjee की टीएमसी हुकूमत का 15 साल पुराना दौर खत्म हो गया।

पिछले पांच सालों से Bharatiya Janata Party बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने और सत्ता हासिल करने के लिए हर मुमकिन सियासी दांव खेलती रही। एसआईआर (SIR) को लेकर ममता बनर्जी लगातार एतराज़ जताती रहीं, मगर चुनाव आयोग पर उठे तमाम सवालों के बावजूद यह अमल जारी रहा।

बीजेपी का दावा था कि बंगाल में बड़ी तादाद में “गैरकानूनी और घुसपैठिया वोटर्स” मौजूद हैं, इसलिए करीब 27 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। इसी के साथ सियासी गलियारों में यह पैगाम साफ माना गया कि बंगाल में “कमल खिलाने” की तैयारी हो चुकी है।

वज़ीरे आज़म Narendra Modi और वज़ीरे दाखिला Amit Shah ने अपने दौरों और रैलियों में हिंदुत्व और मज़हबी पोलराइजेशन को खुलकर हवा दी। आरएसएस की कौमपरस्त सोच को मुल्कभर में मजबूत करने की कोशिशें भी इस चुनाव में साफ नज़र आईं।

कोलकाता में “वंदे मातरम्” के 150 साल पूरे होने पर बड़े पैमाने पर तकरीबें आयोजित की गईं। विपक्ष का इल्ज़ाम रहा कि इन कार्यक्रमों के जरिए हिंदू वोटों को एकजुट करने और मज़हबी बंटवारे को बढ़ावा देने की कोशिश की गई।

इंतिखाबात के दौरान करीब ढाई लाख अर्धसैनिक जवान तैनात किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने 93 फीसदी वोटिंग को “तारीखी” बताते हुए कहा कि लोग बेखौफ होकर वोट डालने निकले। दूसरी तरफ ममता बनर्जी लगातार बीजेपी और मरकज़ी हुकूमत की पॉलिसियों पर हमला बोलती रही थीं और उन्हें विपक्ष की मजबूत आवाज़ माना जाता था। मगर अपनी ही रियासत में मिली शिकस्त ने विपक्षी सियासत को बड़ा झटका दिया है।

फतह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “गंगोत्री से गंगासागर तक कमल खिल चुका है।” उन्होंने इसे “गंगा मां का आशीर्वाद” बताया। सियासी जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने बंगाल की सियासत को मज़हबी रंग देकर भगवा राजनीति को मजबूत करने की कामयाब कोशिश की है।

दक्षिण हिंदुस्तान में हालांकि बीजेपी को अब भी वैसी कामयाबी नहीं मिल सकी है। Karnataka को छोड़कर दक्षिण की ज्यादातर रियासतों में कमल पूरी तरह नहीं खिल पाया। Kerala में बीजेपी ने पहली बार तीन सीटें जीतकर खाता खोला, जबकि Tamil Nadu में इलाकाई जमातों का दबदबा बरकरार रहा।

तमिलनाडु में फिल्म स्टार Joseph Vijay Chandrasekhar की नई पार्टी “TVK” ने शानदार कामयाबी हासिल कर सियासी समीकरण बदल दिए। वहीं Assam में मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma एक बार फिर सत्ता में वापसी की तैयारी में हैं।

Indian National Congress की बात करें तो कुछ रियासतों में कामयाबी मिलने के बावजूद पार्टी की कुल रणनीति बीजेपी के मुकाबले कमजोर दिखाई दी। विपक्ष को अब नई सियासी हिकमत-ए-अमली और मजबूत कयादत की जरूरत महसूस की जा रही है।

इस पूरे चुनाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या आज भी आवाम अपने वोट का फैसला खुद करती है, या फिर प्रोपेगेंडा, मज़हबी पोलराइजेशन और सियासी नैरेटिव चुनावी नतीजों को तय कर रहे हैं।

अज़ : मोहम्मद आज़म शाहिद

Source: Haqeeqat Times