गेस पेपर के ज़रिये प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच एनटीए ने नीट (यूजी) 2026 परीक्षा रद्द कर दी है. राजस्थान एसओजी की जांच में 410 सवालों वाले एक ‘गेस पेपर’ में 120 से अधिक प्रश्न वास्तविक परीक्षा पत्र से मेल खाते पाए गए थे. परीक्षा रद्द होने के बाद छात्र अब दोबारा तैयारी, अनिश्चितता और मानसिक दबाव की बात कर रहे हैं. वहीं, नेशनल टेस्ट एजेंसी की कार्यप्रणाली और क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं.

 

नई दिल्ली: गेस पेपर के जरिए नीट 2026 का प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने नीट (यूजी) 2026 परीक्षा रद्द कर दी है. देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली यह परीक्षा अब दोबारा कराई जाएगी, जिसकी नई तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी.

एनटीए ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने भारत सरकार की मंजूरी के बाद 3 मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है. परीक्षा अब दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसकी नई तारीखों की घोषणा अलग से की जाएगी.’

 

इससे पहले, राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) उन रिपोर्ट्स की जांच कर रही थी, जिनमें दावा किया गया था कि परीक्षा से पहले छात्रों के बीच एक हस्तलिखित दस्तावेज, जिसे ‘गेस पेपर’ बताया जा रहा है, वॉट्सऐप के जरिए परीक्षा से पहले प्रसारित किया जा रहा था.

एसओजी ने पुष्टि की थी कि वह करीब 410 सवालों वाले एक दस्तावेज की जांच कर रही है. एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने कहा कि उस पेपर से जीवविज्ञान और रसायन विज्ञान खंड के 100 से अधिक सवाल वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से ‘काफी हद तक मिलते-जुलते’ पाए गए हैं. उन्होंने बताया कि इन दोनों विषयों में करीब 120 सवालों के मेल खाने का दावा किया जा रहा है.

बंसल ने यह भी बताया कि यह दस्तावेज कथित तौर पर परीक्षा से करीब 15 दिन से एक महीने पहले ही छात्रों के बीच प्रसारित हो रहा था.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जांच से जुड़े सूत्रों ने मीडिया संस्थानों को बताया कि इन सवालों की समानता 720 अंकों में से करीब 600 अंकों तक प्रभाव डाल सकती है.

अख़बार के मुताबिक, अब तक की जांच में सामने आया है कि यह कथित गेस पेपर राजस्थान के चूरू के एक एमबीबीएस छात्र से जुड़ा है, जो फिलहाल केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है. बताया जा रहा है कि उसने 1 मई को यह दस्तावेज सीकर में अपने एक परिचित को भेजा था.

इसके बाद सीकर स्थित एक पीजी आवास संचालक ने कथित तौर पर इसे वहां रहने वाले छात्रों के बीच बांटा, जहां से यह कोचिंग नेटवर्क और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए तेजी से फैल गया.

जांच से जुड़े सूत्रों ने समाचार एजेंसियों को बताया कि परीक्षा से दो दिन पहले यह सामग्री कथित तौर पर 5 लाख रुपये तक में बेची जा रही थी, जबकि परीक्षा से ठीक एक दिन पहले इसकी कीमत घटकर करीब 30 हजार रुपये रह गई थी.

इन आरोपों के बाद, एनटीए ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था, ‘एनटीए इस बात से अवगत है कि इस तरह की खबरें अभ्यर्थियों में चिंता पैदा कर सकती हैं. हम छात्रों से अपील करते हैं कि वे जांच एजेंसियों को अपना काम पूरा करने के लिए समय दें. उचित समय पर शिक्षा मंत्रालय से परामर्श कर जरूरी कदम उठाए जाएंगे.’

एनटीए अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा के चार दिन बाद, 7 मई की देर शाम एजेंसी को कथित गड़बड़ियों से जुड़े इनपुट मिले थे. अधिकारियों के मुताबिक, ‘इन सूचनाओं को 8 मई की सुबह स्वतंत्र सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेज दिया गया था.’

 

 

नीट यूजी 2026 परीक्षा में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे. हालांकि 7 मई को मिली सूचनाओं के बाद सीकर, झुंझुनूं, देहरादून और केरल समेत कई जगहों पर जांच शुरू की गई थी. मंगलवार (12 मई) को मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी को नासिक से हिरासत में लिया गया है, इससे पहले 11 मई तक 13 लोगों को हिरासत में लिया गया था.

उल्लेखनीय है कि 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के मुकाबले देश भर के सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस की सिर्फ 59,416 सीटें उपलब्ध हैं.

सार्वजनिक परीक्षा संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल

नीट-यूजी परीक्षा रद्द किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षक विजेंद्र चौहान कहते हैं कि 2024 में भी परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे, लेकिन इस बार परीक्षा रद्द किया जाना यह दिखाता है कि प्रभाव ‘उम्मीद से कहीं ज्यादा व्यापक’ रहा होगा.

उन्होंने जोड़ा कि इससे भी बड़ा सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं. ‘पब्लिक एग्जामिनेशन सिस्टम पर लोगों का भरोसा बहुत तेज़ी से खत्म हो रहा है. छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें यह भरोसा नहीं रह गया है कि उनका चयन उनकी मेहनत और प्रदर्शन के आधार पर होगा या फिर किसी दूसरे ‘इकोसिस्टम’ के आधार पर.’

उन्होंने तर्क दिया कि इस पूरे मामले को केवल कुछ व्यक्तियों की गलती के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक ‘संरचनात्मक समस्या’ है. उनका कहना है कि एनटीए जैसी सार्वजनिक परीक्षा संस्थाओं की कार्यप्रणाली और वित्तीय ढांचे पर गंभीर चर्चा की जरूरत है. उन्होंने दावा किया कि एनटीए को सरकार की ओर से प्रत्यक्ष बजटीय सहायता नहीं मिलती और एजेंसी मुख्य रूप से छात्रों से ली जाने वाली फीस पर निर्भर है.

उन्होंने कहा, ‘उसे राज्य से फंडिंग मिलनी चाहिए, क्योंकि वह सार्वजनिक परीक्षाओं में लोगों के भरोसे की संरक्षक है.’ उनका कहना था कि लागत कम करने और ‘लोएस्ट बिडर’ मॉडल पर निर्भरता की वजह से परीक्षा की शुचिता से समझौता होता है.

उन्होंने राज्यसभा की एक समिति का हवाला देते हुए कहा कि ‘एनटीए ने परीक्षा शुल्क के जरिए हजारों करोड़ रुपये जुटाए, जबकि परीक्षा संचालन पर उससे कम खर्च हुआ, जिससे एजेंसी सरप्लस में रही.’

तीन मई को गुड़गांव के एक परीक्षा केंद्र पर छात्राएं. (फोटो: पीटीआई)

ज्ञात हो कि 31 जुलाई 2024 को राज्यसभा में दिए गए एक लिखित जवाब में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकान्त मजूमदार ने 2018 में एनटीए की स्थापना के बाद से इसके आय और व्यय का वर्षवार आंकड़ा प्रस्तुत किया था, जिसमे सामने आया था कि एजेंसी पिछले 6 सालों में 448 करोड़ के मुनाफे पर है.

चौहान ने यह भी कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का असर सभी छात्रों पर समान रूप से नहीं पड़ता. उन्होंने कहा, ‘ग्रामीण इलाकों, हाशिये के समुदायों, वंचित जातियों और लैंगिक समूहों से आने वाले छात्र गंभीर तरीके से प्रभावित होते हैं. हर किसी के पास दोबारा परीक्षा देने, एक और साल ड्रॉप करने या फिर से कोचिंग लेने की क्षमता नहीं होती. ऐसे मामलों में पहले से हाशिये पर मौजूद लोग और ज्यादा हाशिये पर चले जाते हैं.’

शिक्षा से जुड़ी वेबसाइट करियर 360 डिग्री के फाउंडर महेश्वर पेरी ने कहा कि नीट 2026 परीक्षा रद्द होना हैरान करने वाला नहीं है.

उन्होंने इस पूरे कथित नेटवर्क का केंद्र राजस्थान के सीकर को बताया है, जहां उन्होंने बताया कि सफलता दर राष्ट्रीय औसत से छह गुना अधिक है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में भी इसी तरह के आरोप सामने आए थे, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया.

उन्होंने एक्स पर अपने पोस्ट में दावा किया कि नीट परीक्षा के 180 सवालों में से ‘140 सवाल’ 410 प्रश्नों वाले एक कथित गेस पेपर का हिस्सा थे और सवालों का क्रम तथा विकल्प भी वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे.

पेरी ने यह भी आरोप लगाए कि सीकर में परीक्षा से एक दिन पहले छात्रों को कथित तौर पर मॉक टेस्ट के लिए बुलाया गया और इन सवालों की तैयारी कराई गई.  वह कहते हैं, ‘छात्रों ने 180 में से 140 सवाल पहले से तैयार कर लिए थे, जिससे परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले ही उनके करीब 720 में से 600 अंक सुनिश्चित हो जाते हैं.’

महेश्वर पूरी ने कहा कि वर्ष 2024 के कथित घोटाले पर सख्त कार्रवाई नहीं होने की वजह से यह स्थिति दोबारा पैदा हुई है और अब लाखों छात्रों व उनके परिवारों को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.

वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन ने नीट रद्द किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यह याद रखना चाहिए कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा का रद्द होना पहली घटना नहीं है. 2015 में एआईपीएमटी, जो नीट यूजी का पूर्ववर्ती ढांचा था, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से रद्द हुआ था. तब अदालत ने परीक्षा की ‘निष्पक्षता और विश्वसनीयता’ बचाने को प्राथमिकता दी थी. 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी को इसलिए रद्द नहीं किया था, क्योंकि उसने उसे ‘व्यवस्था में गंभीर सेंध’ का व्यापक और पर्याप्त आधार नहीं माना था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन 2026 में अगर परीक्षा रद्द करनी पड़ी है तो इसका अर्थ है कि व्यवस्था ने खुद मान लिया कि भरोसा बचा नहीं है. अब सिर्फ़ री-एग्जाम नहीं, री-कंस्ट्रक्शन चाहिए यानी एनटीए का फॉरेंसिक ऑडिट, पेपर-सेटिंग से ट्रांसपोर्ट तक हर कड़ी की जवाबदेही, निजी एजेंसियों की भूमिका की जांच और परीक्षा माफिया पर संगठित अपराध जैसी कार्रवाई.’

इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नीट 2026 पेपर लीक की खबर के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि ‘22 लाख से ज़्यादा बच्चों का भरोसा टूटा है’ और आरोप लगाया कि परीक्षा से 42 घंटे पहले प्रश्न वॉट्सऐप पर बेचे जा रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘यह पहली बार नहीं है. 10 साल में 89 पेपर लीक, 48 बार दोबारा परीक्षा. हर बार वही वादे, और फिर वही ख़ामोशी.’

परीक्षा रद्द किए जाने के बाद राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में युवाओं से यह गूगल सर्च करने की अपील की कि ‘नीट 2024 की भयंकर चोरी के दौरान एनटीए का डीजी कौन था, और मोदी सरकार ने उसे आज कहां बैठाया है?’

गौरतलब है कि नीट 2024 में सामने आईं अनियमितताओं के बीच जून 2024 में सुभोध कुमार सिंह को एनटीए के महानिदेशक पद से हटाया गया था. बाद में सिंह को केंद्र सरकार द्वारा 26 अक्टूबर 2024 को स्टील मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया था. फिलहाल वे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी हैं.

‘अनिश्चितता से घिरे छात्र’

मथुरा की 19 वर्षीय अभ्यर्थी हनी चौधरी, जिन्होंने करीब दो साल तक नीट की तैयारी की, ने दुबारा परीक्षा कराए जाने के फ़ैसले का स्वागत किया है. उन्होंने द वायर हिंदी से कहा, ‘पेपर लीक और चीटिंग मेहनत करने वाले छात्रों के साथ नाइंसाफी है.’

हनी पिछले 2 सालों से रोज़ाना पांच-छह घंटे पढ़ाई करती थीं, परीक्षा के दौरान यह घंटे बढ़ जाते थे. परीक्षा देने के बाद वह इस बार अच्छे अंक प्राप्त करने की उम्मीद कर रहीं थीं, और छुट्टियां मनाने के लिए गई हुईं थीं. लेकिन अब उन्हें सब कुछ छोड़ कर वापस पढ़ाई में लग जाना होगा.

वह कहती हैं, ‘लीक और चीटिंग करके लोग अच्छे नंबर ला रहे हैं, इससे हमारी मेहनत की वैल्यू कम हो रही है. हमारे लिए यह बिल्कुल गलत है.’

वह दोबारा परीक्षा देने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन उनका कहना है कि इतनी बड़ी परीक्षा कराने वाली एजेंसी से ऐसी चूक नहीं होनी चाहिए थी. उन्होंने कहा, ‘सब कुछ पहली बार में ही सही होना चाहिए था. री-एग्जाम की नौबत ही नहीं आनी चाहिए थी.’

एक अन्य अभ्यर्थी सना असद (परिवर्तित नाम) ने कहा कि वह परीक्षा रद्द होने से ‘निराश हैं, लेकिन हैरान नहीं हैं.’ उन्होंने कहा, ‘काश सरकार इस मामले को लेकर और गंभीर होती. इतनी लापरवाही इस बात का सबूत है कि सरकार को इस देश के बच्चों के भविष्य की परवाह नहीं है.’

उन्होंने कहा कि अब छात्रों को फिर से वही पूरी तैयारी दोहरानी पड़ेगी.

रुआंसी होकर वह कहती हैं, ‘नीट अपने आप में ही एक कभी ख़त्म न होने वाला लूप है, बच्चे इसमें पिस जाते हैं. उसके ऊपर से कभी पेपर लीक हो जाता है तो कभी 20 बच्चों को ऐसे ही नंबर बांट दिए जाते हैं (2024 में कुछ सेंटर पर छात्रों को ग्रेस नंबर दिए गए थे).

वह कहती हैं, ‘मुझे लगा था कि अब सब खत्म हो गया है, लेकिन अब फिर से सब शुरू करना पड़ेगा, दोहराना पड़ेगा.’

‘तीन साल की तैयारी के बाद फिर उसी दबाव में लौटना बहुत मुश्किल है. लगातार दो प्रयास तनाव में बीते और अब फिर वही स्थिति आ गई है. यह हमारी गलती नहीं है.’ (फोटो: पीटीआई)

बिहार की हर्षा अपने घर पर रहकर नीट की तैयारी कर रही थीं. उन्होंने फिजिक्सवाला का कोर्स ले रखा था. इस बार उनका तीसरा प्रयास था और उन्हें भरोसा था कि इस बार किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में उनका दाखिला हो जाएगा. हालांकि, दोबारा परीक्षा होने की खबर से वह थोड़ी घबरा गई हैं. लेकिन उनका यह भी मानना है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, तो परीक्षा रद्द किया जाना जरूरी था.

वह कहती हैं, ‘जितने भी नंबर मेरे बन रहे थे, उससे मैं संतुष्ट थी. लेकिन अब फिर से परीक्षा होगी, यह जानकर मुझे थोड़ी घबराहट हो रही है.’ खुद को संभालते हुए वह आगे कहती हैं, ‘लेकिन कोई बात नहीं, इस बार मैं और ज्यादा अंक लाने की कोशिश करूंगी, ताकि मुझे और बेहतर कॉलेज में दाखिला मिल सके.’

हनी की तरह हर्षा को भी लगता है कि री-एग्जाम की नौबत नहीं आनी चाहिए थी और पूरी प्रक्रिया पहली बार में ही निष्पक्ष और सही तरीके से पूरी होनी चाहिए थी.

दिल्ली के एक 22 वर्षीय छात्र ने री-एग्जाम की खबर सुनकर निराशा जताई. उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद थी कि इस बार मेरा दाखिला किसी अच्छे कॉलेज में हो जाएगा. मैंने अपने परिवार के साथ छुट्टियों का प्लान भी बना लिया था, टिकट्स तक हो चुकी थीं अब सब कुछ रद्द करना पड़ेगा और मुझे फिर से दिन-रात तैयारी में जुटना होगा.’

उन्होंने कहा, ‘अभी तो यह भी तय नहीं है कि परीक्षा कब होगी. सब कुछ अनिश्चितता से घिरा हुआ लग रहा है.’

बोझिल आवाज में उन्होंने कहा, ‘पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने का छात्रों की मानसिक सेहत पर क्या असर पड़ता है, इसकी यहां किसी को चिंता नहीं है. इस बारे में कोई नहीं सोचता.’

पटना की रहने वाली एक अन्य अभ्यर्थी वैष्णवी ने द वायर हिंदी से कहा कि परीक्षा देने के बाद उन्हें पहली बार बीते एक दो वर्षों में ‘सुकून महसूस हुआ था, क्योंकि इस बार का पेपर अपेक्षाकृत संतुलित लगा और उनका एग्जाम अच्छा गया था. दूसरे प्रयास में परीक्षा दे रही इस छात्रा को करीब 655 अंक आने की उम्मीद थी और उन्हें लग रहा था कि 2025 की तुलना में पेपर का स्तर अलग होने के कारण कटऑफ भी उसी हिसाब से रहेगा, जिससे सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की संभावना बन रही थी.

हालांकि, परीक्षा रद्द होने की खबर ने उन्हें फिर से तनाव में डाल दिया है. उन्होंने कहा, ‘तीन साल की तैयारी के बाद फिर उसी दबाव में लौटना बहुत मुश्किल है. लगातार दो प्रयास तनाव में बीते हैं और अब फिर वही स्थिति आ गई है. यह हमारी गलती नहीं है. एनटीए हर साल पारदर्शिता और सख्त जांच की बात करता है, फिर भी ऐसा कैसे हो जाता है?’

उन्होंने कहा कि 2024 में भी पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे, लेकिन तब केवल कुछ केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराई गई थी. छात्रा ने सवाल उठाया कि ‘अगर तब पूरे देश में परीक्षा रद्द नहीं हुई थी, तो इस बार पैन-इंडिया कैंसलेशन क्यों करना पड़ा?’

उन्होंने कहा ‘मैंने खुद को यह समझा लिया था कि इस बार शायद सरकारी कॉलेज मिल जाएगा, लेकिन अब फिर वही परीक्षा का दबाव, वही डर कि होगा या नहीं. ड्रॉपर छात्रों के लिए यह सिर्फ एक एग्जाम नहीं, बल्कि करियर का एक और साल दांव पर लगने जैसा है.’

2024 में भी पेपर लीक की खबरें सामने आईं थीं

यह मामला नीट यूजी 2024 पेपर लीक विवाद के दो साल से भी कम समय में सामने आया है. वर्ष 2024 पेपर लीक विवाद के बीच दोबारा परीक्षा की मांग करते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था और सीबीआई जांच का गठन हुआ था.

द वायर हिंदी ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया था कि नीट 2024 परीक्षा में गड़बड़ी का सबसे बड़ा केंद्र झज्जर का हरदयाल पब्लिक स्कूल था. 500 से अधिक छात्रों ने इस सेंटर में परीक्षा दी थी, उनमें से छह अभ्यर्थियों को 720 में से 720 अंक, यानी पूर्णांक हासिल हुए थे. इसके अलावा दो अभ्यर्थियों को 718 और 719 नंबर आए, जिसे गणितीय रूप से असंभव बताया जा रहा था.

Source: The Wire