बेंगलुरु: कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। इस चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार गोविंदराजू को करारी हार का सामना करना पड़ा है।
चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बीजेपी और जेडीएस खेमे में हुई भारी क्रॉस वोटिंग कांग्रेस की बड़ी सफलता का प्रमुख कारण बनी। कांग्रेस के सभी पांच उम्मीदवार जीतने में सफल रहे, जबकि जेडीएस अपना खाता भी नहीं खोल सकी।
कुल 222 मतों में से एक मत तकनीकी त्रुटि के कारण अमान्य घोषित किया गया। कांग्रेस के बी.के. हरिप्रसाद, तिप्पण्णप्पा कमकनूर और बी.एस. शिवण्णा को 30-30 वोट मिले, जबकि पी.वी. मोहन को 29 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक ने 32 वोट हासिल कर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।
दूसरी ओर जेडीएस के एकमात्र उम्मीदवार गोविंदराजू को केवल 14 वोट मिले, जिससे उन्हें शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। चुनावी गणित के अनुसार कांग्रेस को अपेक्षा से 11 अधिक वोट मिले हैं। इससे यह संकेत मिला है कि बीजेपी के चार और जेडीएस के सात विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया।
जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 27.63 वोटों का कोटा हासिल करना आवश्यक था। बीजेपी के आर. रघु ने 29 वोट प्राप्त कर सीधे जीत दर्ज की। वहीं लिंगराजू पाटिल को 27 वोट मिले और वे शुरुआती चरण में कोटा पूरा नहीं कर सके। हालांकि, जेडीएस उम्मीदवार गोविंदराजू के एलिमिनेशन के बाद उनके वोटों के पुनर्वितरण से लिंगराजू पाटिल को फायदा हुआ और वे अंततः विजयी घोषित किए गए।
विधान परिषद चुनाव के इन नतीजों को कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है, जबकि जेडीएस और बीजेपी के लिए क्रॉस वोटिंग गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

