बेलगावी: हिडकल जलाशय से विस्थापित किसानों का आंदोलन गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। मुआवज़े की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सिंचाई विभाग के उत्तर क्षेत्र मुख्य अभियंता कार्यालय परिसर को मवेशियों के तबेले में बदलकर दिन-रात धरना शुरू कर दिया है। आंदोलन में हुक्केरी तालुका के मास्तिहोली, जारकीहोली, बीरनहल्ली, सुतगट्टी, गुडगनट्टी समेत आसपास के आठ गांवों के किसान बड़ी संख्या में शामिल हैं।
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि उनकी ज़मीन अधिग्रहित हुए 10 से 12 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें मुआवज़ा नहीं मिला। किसानों के अनुसार कुल 394 एकड़ 26 गुंटे भूमि का मुआवज़ा अब भी लंबित है, जिससे प्रभावित परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुआवज़े की फाइल आगे बढ़ाने के लिए 2 से 5 करोड़ रुपये तक रिश्वत मांगी जा रही है। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने मूल दस्तावेज़ों में फेरबदल कर लगभग 150 एकड़ भूमि कम दर्शाते हुए फर्जी रिपोर्ट तैयार की है। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि किसानों को चेक के माध्यम से भुगतान किया जा चुका है। किसानों ने मांग की कि यदि भुगतान हुआ है तो संबंधित बैंक खातों और दस्तावेज़ों को सार्वजनिक किया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अधिकारियों की कथित गलत रिपोर्ट के कारण मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और जिला प्रभारी मंत्री तक भ्रामक जानकारी पहुंचाई जा रही है। किसान नेता बाळेश मावनूर ने आरोप लगाया कि जिला प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली द्वारा कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद इरिगेशन कॉरपोरेशन के एमडी राजेश अम्मिनभावी और इंजीनियर राठोड़ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने दोनों अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की।
धरनास्थल पर किसानों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पुलिस बल का इस्तेमाल कर आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की गई तो वे पीछे नहीं हटेंगे। किसानों ने कहा कि आंदोलन के दौरान यदि किसी भी किसान की मृत्यु होती है तो उसका शव जिला उपायुक्त (डीसी) कार्यालय या मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और जब तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारी किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों ने किसानों की भूमि अधिग्रहित कर सरकारी कार्यालय बनाए, वही आज किसानों को डराने और दबाने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि आंदोलन को लगातार ग्रामीणों का समर्थन मिल रहा है और आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शन और व्यापक रूप ले सकता है।

