बेलगावी के वीरभद्र नगर उर्दू स्कूल पोलिंग स्टेशन पर अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के आरोपों को लेकर डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद रोशन ने सफाई दी है। उन्होंने बल्क में दाखिल किए गए फॉर्म-7 और चुनाव आयोग की गाइडलाइंस को लेकर अहम जानकारी दी।
वीरभद्र नगर उर्दू स्कूल के पोलिंग स्टेशन पर फॉर्म-7 के तहत बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल किए जाने के मामले में डीसी मोहम्मद रोशन ने कहा कि फिलहाल किसी भी वोट को डिलीट नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि क्लेम्स और ऑब्जेक्शन्स की अवधि के दौरान कोई भी व्यक्ति फॉर्म-7 दाखिल कर सकता है। लेकिन चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, अगर एक व्यक्ति किसी विधानसभा क्षेत्र में 5 से ज्यादा मतदाताओं के खिलाफ ऑब्जेक्शन दाखिल करता है, तो उसे सीधे मंजूर करने का अधिकार BLO के पास नहीं होता।
ऐसी स्थिति में ERO (Electoral Registration Officer) को खुद प्राथमिक जांच करनी होती है। साथ ही संबंधित आपत्तियों के समर्थन में जरूरी सबूत और डिक्लेरेशन की भी जांच की जाती है।
डीसी ने कहा कि इस मामले में बिना किसी बैकग्राउंड डॉक्यूमेंट के बड़ी संख्या में बल्क फॉर्म-7 दाखिल किए गए थे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी पोलिंग स्टेशन पर 2 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दाखिल होती हैं, तो उन्हें तुरंत स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में ‘Burden of Proof’ यानी सबूत पेश करने की जिम्मेदारी ऑब्जेक्शन दाखिल करने वाले व्यक्ति पर होती है।
इस मामले को लेकर जिला प्रशासन ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक कर सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा की है। डीसी ने कहा कि मामले में किसी भी तरह की गलतफहमी या गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे, इसके लिए पूरी सावधानी बरती जा रही है।
जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद Representation of the People Act की धारा 31 के तहत कार्रवाई करने का अधिकार ERO के पास रहेगा।

