आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति पैदा हुई, जिसमें अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीन और भारतीय सैनिक आमने-सामने आ गए. यह स्थिति अभी भी जारी है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि चीनी सैनिकों के साथ जारी गतिरोध पर ‘प्रधानमंत्री और उनके पूरे तंत्र की ओर से पूरी तरह ख़ामोशी’ बनी हुई है.
नई दिल्ली: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर एक से अधिक स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हैं और उनके बीच गतिरोध बना हुआ है. जुलाई के बाद से दोनों देशों के सैनिकों के बीच बढ़ते तनाव के विस्तार को लेकर यह पहला आधिकारिक बयान है.
कपूर ने गुरुवार (22 अक्टूबर) को राजस्थान के अलवर स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण महाविद्यालय में आयोजित हिमवीर सम्मान समारोह में यह बात कही. यह आईटीबीपी का वार्षिक समारोह है, जिसमें बल के जवानों और अधिकारियों को सम्मानित किया जाता है.
द हिंदू के मुताबिक, कपूर ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति पैदा हुई, जिसमें अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर सैनिक आमने-सामने आ गए. यह स्थिति अभी भी जारी है.’
बल के नवगठित शौर्य कमांडो की भूमिका की सराहना करते हुए कपूर ने कहा, ‘हमारे नवगठित शौर्य कमांडो ने इसमें अनुकरणीय भूमिका निभाई. आईटीबीपी का गठन पर्वतीय गुरिल्ला बल के रूप में किया गया था और 2004 में हमें चीन के साथ लगती सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई.’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमें अपने मूल काम को नहीं छोड़ना चाहिए. सेना से अलग, ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में लड़ाई के लिए एक विशेष बल तैयार किया जा रहा है. जल्द ही हमारे पास शौर्य कमांडो की एक पूरी बटालियन होगी. अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती हमारी ताकत है.’
माजा के पास लगाए गए तंबू
सरकारी सूत्रों ने द हिंदू को बताया कि इन गतिरोधों में सबसे प्रमुख अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तवांग क्षेत्र के पास नहीं, बल्कि तक्सिंग के निकट असाफिला इलाके में बना हुआ है. यह स्थिति जुलाई के अंत से जारी है.
चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों ने ऊंचाई वाले इलाके में तंबू लगा रखे हैं. ये तंबू तक्सिंग सर्किल में माजा स्थित कंपनी के परिचालन अड्डे के पास उस स्थान से लगभग 6 से 7 किलोमीटर दूर हैं, जहां तक भारत के आकलन के अनुसार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) गुजरती है.
एक सूत्र ने अखबार को बताया, ‘जुलाई में किसी समय नियमित गश्त के दौरान माजा के पास भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आ गए. थोड़ी देर तक तनातनी के बाद दोनों पक्ष लौट गए, लेकिन कुछ दिन बाद चीनी पीएलए के जवान बड़ी संख्या में वापस आए और तंबू लगा दिए. ये तंबू उस स्थान से लगभग 6–7 किलोमीटर अंदर लगाए गए हैं, जहां तक भारत एलएसी को मानता है.’
रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद से भारत ने भी इस इलाके में अपनी तैनाती बढ़ा दी है.
कपूर ने जोर देकर कहा कि आईटीबीपी के पास मौजूद हथियार लगभग 50 साल पुराने हैं और अब उनका आधुनिकीकरण जरूरी है. उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक तरीकों से चीन का मुकाबला करना पर्याप्त नहीं हो सकता, क्योंकि चीन ने अपने हथियारों और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में भारी निवेश किया है. उन्होंने ड्रोन और ड्रोन-रोधी क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
कपूर ने कहा, ‘ड्रोन ऐसी चीज हैं, जिनके जरिए एक छोटा देश भी बड़े देश को चुनौती दे सकता है. हमने देखा कि यूक्रेन ने रूस जैसी महाशक्ति को किस तरह चुनौती दी है. माना जा रहा था कि युद्ध कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा, लेकिन रूस के 10,000 से 15,000 सैनिक मारे जा रहे हैं और उसे नुकसान उठाना पड़ रहा है. ईरान को देखिए, उसके पास नौसेना तक नहीं है, फिर भी उसने ड्रोन की मदद से अमेरिका को चुनौती दी.’
कपूर ने आगे कहा, ‘हमें ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों की दिशा में आगे बढ़ना होगा. हमने आधुनिकीकरण के लिए मिले 400 करोड़ रुपये में से 70 प्रतिशत राशि ड्रोन पर खर्च की है. सीमा की सुरक्षा करने वाली सभी बटालियनों में ड्रोन की एक-एक प्लाटून है. हमने ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है और अपने स्तर पर ड्रोन बना रहे हैं. आधुनिकीकरण की एक अन्य योजना के तहत मिलने वाले 3,500 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये में से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन के लिए निर्धारित किए गए हैं.’
बातचीत से तनाव कम नहीं हुआ
गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर लगातार बातचीत होने के बावजूद गतिरोध जारी है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 11 से 13 सितंबर तक भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था. जुलाई के बाद से सीमा संबंधी मुद्दों पर उच्च स्तर की तीन बैठकें भी हो चुकी हैं.
6 अगस्त को भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र (Working Mechanism for Consultation and Coordination on India-China Border Affairs) की 36वीं बैठक हुई.
26 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीजिंग में सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर में भारत का प्रतिनिधित्व किया.
6 सितंबर को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी सेक्टर में कोर कमांडर स्तर की पहली बैठक हुई. यह बैठक अरुणाचल प्रदेश में वाचा-दमाई सीमा कार्मिक बैठक केंद्र पर आयोजित की गई.
गौरतलब है कि इस तरह की बैठकें आमतौर पर पूर्वी लद्दाख के चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक केंद्र पर होती रही हैं. जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद यह व्यवस्था विशेष रूप से देखने को मिली थी.
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर साधा निशाना
कपूर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों के साथ जारी गतिरोध पर ‘प्रधानमंत्री और उनके पूरे तंत्र की ओर से पूरी तरह खामोशी’ बनी हुई है.
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, ‘जहां स्वयंभू ‘विश्वगुरु’ चीन के सामने सोच-समझकर रियायतें देने का सिलसिला जारी रखे हुए हैं, वहीं आईटीबीपी के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ हालिया आमने-सामने की घटनाओं में आईटीबीपी के प्रदर्शन की सराहना की है, और ऐसा करना उचित भी है. लेकिन इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और उनके पूरे तंत्र की ओर से पूरी तरह खामोशी है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘तक्सिंग में सैनिकों के आमने-सामने आने की घटना के बाद पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी. स्थानीय लोगों ने बताया था कि एक बार फिर गश्त के कुछ बिंदुओं पर भारत का नियंत्रण खत्म हो गया है, जैसा लद्दाख में हुआ था. चीन अरुणाचल प्रदेश के हमारे कस्बों के नाम बदलना जारी रखे हुए है और 60,000 मेगावाट क्षमता का बांध बना रहा है, जिससे हमारी पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा को खतरा है.’
राज्यसभा सांसद रमेश ने यह भी बताया कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025–26 में बढ़कर रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 99 अरब डॉलर था.
उन्होंने कहा, ‘इससे कई उद्योगों में हमारे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम पूरी तरह तबाह हो गए हैं. ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना’ बन गया है. इतना भारी व्यापार घाटा अपने आप में हमारी आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है.’
रमेश ने जून 2020 में गलवान घाटी में चीनी घुसपैठ के आरोपों के बाद चीन को कथित तौर पर ‘क्लीन चिट’ देने के लिए भी मोदी की आलोचना की.
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री द्वारा 19 जून 2020 को चीन को दी गई उस बदनाम ‘क्लीन चिट’ की कीमत भारत आज भी चुका रहा है. उस समय, हमारे 20 बहादुर जवानों के शहीद होने के बाद, उन्होंने कहा था: ‘न तो वहां से कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है, और न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है.’’
रमेश ने आगे कहा, ‘सेना के पूर्व प्रमुख जनरल (एमएम) नरवणे ने खुलासा किया है कि जब वह सेना प्रमुख थे और लद्दाख में चीनी घुसपैठ हुई थी, तब उन्हें केवल यही निर्देश मिला था -‘जो उचित समझो, वो करो.’
ज्ञात हो कि इस साल फरवरी में संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय भारी हंगामा हुआ था, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सेना के पूर्व प्रमुख नरवणे के संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) का उल्लेख किया था. इस पुस्तक में पूर्व सेना प्रमुख ने लिखा है कि 2020 में लद्दाख में चीन की कार्रवाई से निपटने की जिम्मेदारी अकेले उनके कंधों पर डाल दी गई थी और उन्हें एक ‘मुश्किल जिम्मेदारी’ थमा दी गई थी.
कारवां पत्रिका के फरवरी अंक में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, नरवणे ने अपने संस्मरण में लिखा है कि चीन की कार्रवाई का जवाब कैसे दिया जाए, इसका फैसला करने के लिए उन्हें पूरी तरह अकेला छोड़ दिया गया था. बाद में लोकसभा में इस पुस्तक का उल्लेख करने से रोके जाने के बाद राहुल गांधी ने सदन के बाहर संस्मरण की प्रति दिखाई थी.
हालांकि, संबंधित संस्मरण आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुआ है और केंद्रीय रक्षा तथा विदेश मंत्रालयों की मंजूरी का इंतजार कर रहा है.
रमेश ने कहा, ‘4 जुलाई, 2025 को सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य अभियान में चीन की भूमिका कितनी व्यापक और गहराई से जुड़ी हुई थी. लेकिन 25 अगस्त, 2026 को सेवानिवृत्त चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के खुलासों का खंडन किया. इसके तुरंत बाद उन्होंने एक ऐसे थिंक टैंक की जिम्मेदारी संभाल ली, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.’
‘सीमा की सुरक्षा करने वाले बलों को प्रदर्शन रोकने में लगाया जा रहा है’
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि ‘जिन बलों को हमारी सीमाओं की रक्षा करनी चाहिए, उन्हें नागरिकों के विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए तैनात किया जा रहा है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं.
कपूर के उस वीडियो, जिसमें वह कार्यक्रम के दौरान चीन के साथ सैनिकों के आमने-सामने होने की घटनाओं की पुष्टि करते दिखाई दे रहे हैं, पर प्रतिक्रिया देते हुए दिपके ने एक्स पर लिखा, ‘हां, क्योंकि जिन बलों को हमारी सीमाओं की रक्षा करनी चाहिए, उन्हें नागरिकों के विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए तैनात किया जा रहा है. मोदी अपने ही देशवासियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का इस्तेमाल करके राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं. प्राथमिकता हमारी सीमाओं को सुरक्षित करने की होनी चाहिए, न कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए दिल्ली को एक किले में तब्दील करने की.’
Source: The Wire

