कर्नाटक में गन्ना किसानों और चीनी कारखानों की मांगों को लेकर पिछली सरकारों द्वारा दिए गए आश्वासन अब तक पूरे नहीं हुए हैं। आज मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में अहम बैठक होगी, जिसमें अंतिम फैसला लिया जाएगा। यह जानकारी लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने दी।
आज बेलगावी के सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि किसानों और चीनी कारखाना मालिकों, दोनों की समस्याओं को सुना जाएगा और सरकार उचित समाधान निकालने की कोशिश करेगी।
उन्होंने बताया कि गन्ना किसानों की मांगों और चीनी कारखानों की समस्याओं पर चरणबद्ध तरीके से चर्चा की जाएगी। सबसे पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में चीनी कारखाना मालिकों के साथ बैठक होगी, जिसमें उनकी आर्थिक समस्याओं को समझा जाएगा। इसके बाद किसान प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक कर उनकी मांगों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि किसान प्रति टन गन्ने पर अतिरिक्त 1,000 रुपये देने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि पिछली सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन अब तक पूरे नहीं किए गए हैं।
दूसरी ओर, चीनी कारखाना मालिकों ने भी अपनी कई समस्याएं सामने रखी हैं। सरकार से मिलने वाली बकाया राशि जारी नहीं होने, बिजली खरीद के दीर्घकालिक समझौते (PPA) से जुड़ी समस्याओं और आर्थिक संकट को लेकर कारखाना मालिकों ने अपनी परेशानी जाहिर की है।
सतीश जारकीहोली ने बताया कि राज्य के करीब 30 प्रतिशत चीनी कारखाने अच्छी स्थिति में हैं, जबकि 30 प्रतिशत मध्यम स्थिति में हैं और 40 प्रतिशत कारखाने भारी नुकसान का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी उद्योग में काम करने और नुकसान झेलने के बाद ही उसकी असली मुश्किलों का एहसास होता है।
इस बार बारिश की कमी और मौसम में बदलाव के कारण राज्य में गन्ने की पैदावार में काफी गिरावट आई है। आमतौर पर 100 दिनों से ज्यादा चलने वाली गन्ना पेराई की अवधि इस बार घटकर सिर्फ 60 से 70 दिन रह जाने की आशंका है। इससे किसानों और चीनी कारखानों, दोनों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
मंत्री ने कहा कि MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) में बढ़ोतरी से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है। इसके अलावा, तमिलनाडु मॉडल के तहत मुआवजा या सहायता व्यवस्था को लेकर वित्त विभाग के साथ चर्चा की जाएगी। इसके बाद सरकार अंतिम फैसला घोषित करेगी।

