कर्नाटक विधानमंडल के शीतकालीन सत्र से पहले आरटीआई कार्यकर्ता एवं उत्तर कर्नाटक हॉराटा समिति के अध्यक्ष भीमप्पा गदद ने सुवर्ण विधान सौध में विधायकों को दी जा रही मुफ्त भोजन, चाय-कॉफी को तुरंत बंद करने की मांग की है।

अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं मुख्य सचिव को लिखे पत्र में गदद ने कहा कि विधायकों को पहले से ही प्रतिदिन सत्र भत्ता के रूप में 2,500 रुपये मिलते हैं, जो विशेष रूप से भोजन-नाश्ते के लिए होते हैं। इसके ऊपर से मुफ्त भोजन देना सार्वजनिक धन का अवैध दुरुपयोग है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुफ्त भोजन जारी रहा तो वह अध्यक्ष एवं संबंधित अधिकारियों से भोजन व्यय की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे।

बेलगावी में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि 10 दिन के सत्र में भोजन एवं रिफ्रेशमेंट का खर्च करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि हर विधायक को अपने भोजन के लिए पर्याप्त भत्ता मिल रहा है। “विधायकों को अपने मिले भत्ते से ही खाना चाहिए। भत्ता भी लें और मुफ्त भोजन भी लें, यह उचित नहीं है।”

उन्होंने आगे मांग की कि पूरे दिन की कार्यवाही में अनुपस्थित रहने वाले विधायकों का वेतन, भत्ता एवं अन्य सुविधाएं तुरंत वापस ली जाएं। ऐसे सदस्यों पर प्रोत्साहन के बजाय प्रतिदिन जुर्माना लगाया जाए।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “अगर उपस्थिति बढ़ाने के लिए सरकार मुफ्त भोजन देती रही, तो विधानमंडल मिड-डे मील स्कूल जैसा लगने लगेगा। इससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंचती है।”