चार राज्यों और पुडुचेरी के रुझानों में भाजपा को बड़ी बढ़त मिलती दिख रही है. असम और पुडुचेरी में एनडीए आगे है, बंगाल में तृणमूल से कड़ा मुकाबला जारी है. तमिलनाडु में विजय की टीवीके ने शानदार प्रदर्शन से सबको चौंका दिया है.
नई दिल्ली: चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के शुरुआती रुझानों ने भारतीय जनता पार्टी को बड़ी राजनीतिक बढ़त दी है. असम में सत्ता बरकरार रखने से लेकर पुडुचेरी में सहयोगी दलों के साथ वापसी और पश्चिम बंगाल में अप्रत्याशित मजबूती तक, शुरुआती तस्वीर भाजपा के पक्ष में जाती दिख रही है.
इन चुनावों में भाजपा के सामने कई मजबूत क्षेत्रीय दल और विपक्षी नेता थे. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, तमिलनाडु में द्रमुक, केरल में कांग्रेस और अन्य दलों ने उसे कड़ी चुनौती दी. इसके बावजूद शुरुआती रुझानों से संकेत मिला कि भाजपा ने अपने चुनावी अभियान का असर कई राज्यों में बनाए रखा.
आधे दिन के बाद तक के रुझानों में भाजपा असम में स्पष्ट बढ़त के साथ दिख रही है. 126 सदस्यीय असम विधानसभा में पार्टी पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करती नजर आई है.

राज्य में मतदान 9 अप्रैल को एक ही चरण में कराया गया था. निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार असम में 85.64 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो काफी उत्साहजनक माना जा रहा है.
चुनावी मैदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) समेत कई दल हैं.
इस चुनाव में जिन प्रमुख नेताओं पर नजर है, उनमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल और रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई शामिल हैं. रुझानों में शर्मा, बदरुद्दीन और अखिल गोगोई आगे चल रहे हैं. वहीं गौरव गोगोई पीछे चल रहे हैं.
वहीं पुडुचेरी में अखिल भारतीय एन.आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) के साथ उसका गठबंधन सत्ता में लौटता दिखा. मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने थट्टांचावडी सीट से 10,024 वोट हासिल कर जीत दर्ज की है. उन्होंने 4,441 मतों के अंतर से मुकाबला अपने नाम किया.
अब तक 17 सीटों के अंतिम नतीजे घोषित हो चुके हैं. केंद्र शासित प्रदेश में मतदान 9 अप्रैल को हुआ था, जिसमें 89.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. 30 सदस्यीय विधानसभा के लिए 1,099 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए थे और कुल 294 उम्मीदवार मैदान में थे.
पुडुचेरी में एनडीए की वापसी के आसार
इस बार पुडुचेरी चुनाव में बड़े गठबंधनों के साथ कुछ नए राजनीतिक दल भी मैदान में उतरे. सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में एआईएनआरसी, भाजपा, एआईएडीएमके और एलजेके शामिल हैं, जबकि विपक्षी इंडिया गठबंधन में कांग्रेस, डीएमके और वीसीके शामिल हैं.
इस चुनाव में जिन प्रमुख चेहरों पर नजर रही, उनमें मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के अलावा मंत्री ए. नमस्सिवायम, ए. जॉनकुमार, आर. शिवा और वी. सामीनाथन समेत कई नेता शामिल हैं.

बंगाल: ‘पूरब की अंतिम चुनौती’
सबसे अधिक ध्यान पश्चिम बंगाल पर टिका रहा, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथे कार्यकाल की कोशिश में थीं. शुरुआती रुझानों में भाजपा तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देती दिखी और कई सीटों पर आगे रही. इससे यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा उस राज्य में सत्ता के करीब पहुंच सकती है, जिसे वह लंबे समय से अपनी ‘पूरब की अंतिम चुनौती’ मानती रही है.
पश्चिम बंगाल में भाजपा की रणनीति हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण और तृणमूल के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने पर आधारित रही. पार्टी नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि भाजपा को व्यापक समर्थन मिला है और मुस्लिम मतदाताओं के बीच भी तृणमूल की पकड़ कमजोर हुई है.
अगर भाजपा बंगाल में सरकार बनाने में सफल होती है, तो इसे अमित शाह की बड़ी राजनीतिक जीत माना जाएगा. उन्होंने चुनाव से पहले राज्य में व्यापक प्रचार किया था और पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट बहुमत का लक्ष्य दिया था.
दूसरी ओर, यदि तृणमूल कांग्रेस पिछड़ती है तो यह ममता बनर्जी के लंबे राजनीतिक दौर के लिए बड़ा झटका माना जाएगा. वे राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा विरोधी राजनीति का प्रमुख चेहरा रही हैं.
इन शुरुआती रुझानों ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि भाजपा राष्ट्रीय राजनीति में अपनी केंद्रीय भूमिका बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है, खासकर पूर्वी भारत में विस्तार की उसकी रणनीति असर दिखा रही है. अंतिम नतीजे आने तक तस्वीर बदल सकती है, लेकिन शुरुआती संदेश स्पष्ट है, भाजपा अभी भी भारतीय राजनीति की सबसे आक्रामक और संगठित चुनावी ताकत बनी हुई है.
3:23 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझान.
तमिलनाडु और केरल
तमिलनाडु में तस्वीर कुछ अलग रही. अधिकांश एग्जिट पोल द्रमुक की वापसी का अनुमान जता रहे थे, लेकिन शुरुआती रुझानों में मुकाबला अपेक्षा से अधिक दिलचस्प दिखा.
अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ऐतिहासिक प्रदर्शन करती नजर आ रही है. शुरुआती रुझानों में पार्टी 234 में से 101 सीटों पर आगे चल रही है और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने की ओर बढ़ती दिख रही है.
राज्यभर के 62 मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच वोटों की गिनती जारी है. तीन प्रमुख मोर्चों के बीच कड़े मुकाबले में सभी 234 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं. निर्वाचन आयोग के अनुसार, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) 59 सीटों पर आगे है, जबकि उसकी प्रतिद्वंद्वी एआईएडीएमके 49 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. पीएमके 5, कांग्रेस 3, भाजपा 2 सीट पर आगे है.

हालांकि भाजपा खुद वहां सीमित सीटों पर ही बढ़त में थी. पार्टी के कुछ उम्मीदवार कोयंबटूर और नागरकोइल जैसी अहम सीटों पर पीछे चल रहे थे. इसके बावजूद भाजपा के लिए राहत की बात यह रही कि उसकी सहयोगी एआईएडीएमके ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन किया.
केरल में बदलाव की लहर कांग्रेस के पक्ष में जाती दिखी. वहां भाजपा कोई बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ सकी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के लिए बंगाल और असम की स्थिति ज्यादा अहम मानी जा रही थी.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर शुरुआती रुझान नतीजों में बदलते हैं तो भाजपा के लिए यह 2024 लोकसभा चुनाव के बाद एक बड़े मनोवैज्ञानिक पलटवार जैसा होगा. पार्टी के भीतर भी इसे विपक्ष के खिलाफ जवाबी प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है.
Source: The Wire

