बेंगलुरु: कर्नाटक में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर चल रहे सियासी विवाद के बीच राज्य मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अनबु कुमार ने अहम सफाई दी है। उन्होंने कहा कि सिर्फ फॉर्म-7 जमा किए जाने से किसी वोटर का नाम तुरंत वोटर लिस्ट से डिलीट नहीं किया जाता। नाम हटाने से पहले नोटिस जारी कर संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है। इसके बाद जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने पर ही नाम हटाने का फैसला लिया जाता है।

बेंगलुरु में आयोजित मीडिया कॉन्फ्रेंस में वी. अनबु कुमार ने बताया कि एक दिन में 10 फॉर्म-7 दिए जा सकते हैं, जबकि BLOs की ओर से कुल 50 फॉर्म तक दिए जा सकते हैं। इससे अधिक फॉर्म आने की सूरत में ERO यानी Electoral Registration Officer मामले की जांच कर फैसला लेते हैं। अगर तय सीमा से ज्यादा फॉर्म दिए जाते हैं या जानबूझकर गलत जानकारी दी जाती है, तो कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 के दुरुपयोग को लेकर अब तक कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।

दरअसल, कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी और जेडीएस की ओर से बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 जमा करवाकर वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की गई है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे। हाल ही में सीएम डी.के. शिवकुमार ने चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया था।

इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से आंकड़े जारी करते हुए अनबु कुमार ने बताया कि राज्यभर में कुल 43,82,313 नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से 43,55,818 नोटिस वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 26,495 नोटिस अभी वितरित होना बाकी हैं।

वितरित किए गए नोटिस में से 36,89,063 मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। वहीं, आपत्तियों के निपटारे के लिए 22 अक्टूबर आखिरी तारीख तय की गई है।

चुनाव अधिकारी के इस बयान के बाद फॉर्म-7 को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी है।