कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जनगणना के लिए गणनाकारों के चयन के मानदंडों में किए गए हालिया बदलावों पर चिंता जताते हुए कहा है, ‘यह साफ है कि यह हज़ारों आरएसएस/भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए एक रोज़गार गारंटी योजना है. इससे पहले ही बिगाड़ी जा चुकी जनगणना प्रक्रिया और भी दूषित होगी. एक और संस्था को बर्बाद किया जा रहा है. एसआईआर की तरह जनगणना के आंकड़ों में भी ख़तरनाक तरीके से हेरफेर किया जाएगा.’
नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने 17 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सरकार द्वारा जनगणना के लिए एन्यूमरेटर (गणनाकारों) के चयन के मानदंडों में किए गए हालिया बदलावों पर चिंता जताई.
मालूम रहे कि एन्यूमरेटर जनगणना के दौरान लोगों से जानकारी जुटाने और आंकड़े दर्ज करने का काम करते हैं.
रमेश ने एक्स पर लिखा, मोदी सरकार ने अब जनगणना 2027 के लिए गणनाकर्मियों के रूप में नियुक्त किए जा सकने वाले लोगों का दायरा बढ़ा दिया है. इसके पीछे काफी गड़बड़झाला है. 10 से 12 जुलाई 2026 के दौरान आरएसएस ने बेलगाम में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था, जिसका एकमात्र एजेंडा जनगणना 2027 था.
उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे कहा, ‘यह साफ है कि यह हजारों आरएसएस/भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए एक रोजगार गारंटी योजना है. इससे पहले ही बिगाड़ी जा चुकी जनगणना की प्रक्रिया और भी दूषित होगी. एक और संस्था को बर्बाद किया जा रहा है. एसआईआर की तरह जनगणना के आंकड़ों में भी खतरनाक तरीके से हेरफेर किया जाएगा.’
यह नया विवाद भारत के महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) द्वारा 16 अक्टूबर, 2026 को जारी किए गए राजपत्र अधिसूचना से जुड़ा है. इसके जरिए केंद्र सरकार ने जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया है.
1990 के नियमों में कहा गया था कि ‘शिक्षकों, क्लर्कों या किसी भी अधिकारी या व्यक्ति को जनगणना अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है.’ लेकिन पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया अधिसूचना में शिक्षक की परिभाषा में बदलाव किया गया है. इससे निजी संस्थानों के शिक्षाविदों को भी जनसंख्या की गणना की प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति मिल गई है.
अक्टूबर 2026 के संशोधन में कहा गया है कि ‘सरकारी, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी संस्थानों, सोसायटियों या ट्रस्टों के किसी भी शैक्षणिक संस्थान के शिक्षकों को जनगणना अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है.’
हालांकि, मामला यहीं तक सीमित नहीं है. अधिसूचना में उन तीन श्रेणियों के लोगों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें एन्यूमरेटर नियुक्त किया जा सकता है. इनमें तीसरी श्रेणी के लिए एक अस्पष्ट मानदंड रखा गया है. इसके तहत कहा गया है कि ‘राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन जिस व्यक्ति को उपयुक्त समझे, उसे जनगणना अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है.’
इससे पहले, द वायर ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि स्टैटिस्टिकल विश्लेषण के हिस्से के रूप में शामिल की गई 40 सवालों वाली प्रश्नावली ने भी यह आशंका पैदा की थी कि कहीं जनगणना का इस्तेमाल राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) जैसी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए तो नहीं किया जा रहा है. इसकी वजह यह थी कि लोगों से बैंक खाते के विवरण, माता-पिता की पृष्ठभूमि और कोविड का टीका लगवाने की जगह जैसे सवालों के जवाब मांगे गए थे.
द हिंदू ने जून 2026 में रिपोर्ट किया था कि ‘एन्यूमरेटरों से कहा जा रहा था कि वे ऐसे विकल्पों का चयन न करें, जिनसे सरकार की छवि खराब होती हो.’
राजस्थान में जनगणना अधिकारियों को लिखित निर्देश जारी किए गए थे. ये निर्देश सरकारी योजनाओं से जुड़े विकल्पों के संबंध में थे, जिनमें खुले में शौच, घरों में ईंधन के रूप में लकड़ी या गोबर के उपलों का इस्तेमाल और नल के पानी की उपलब्धता जैसे मुद्दे शामिल थे.
Source: The Wire

