धारवाड़: गन्ना किसानों का आंदोलन बड़े स्तर पर हुआ है और किसानों ने दोनों सरकारों के सामने अपनी मांगें रखी हैं। लेकिन देश में एथेनॉल को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। कितने एथेनॉल का उत्पादन हो रहा है, कितनी खरीदारी हो रही है और किस कीमत पर खरीदा जा रहा है, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। इन मुद्दों को लेकर धारवाड़ जिला प्रभारी मंत्री संतोष लाड ने अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
धारवाड़ में मीडिया से बात करते हुए संतोष लाड ने कहा कि एथेनॉल पॉलिसी 2014 में लाई गई थी। अब 2026 में इस पॉलिसी को 12 साल हो चुके हैं, लेकिन इसमें क्या बदलाव किए गए हैं और इसकी मौजूदा नीति क्या है, इस पर अब भी स्पष्टता नहीं है। इस मुद्दे पर देश में खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में एथेनॉल का कितना उत्पादन हो रहा है और उसका कितना इस्तेमाल किया जा रहा है, इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। हमने अमेरिका से 50 मिलियन बैरल तेल आयात किया है, लेकिन उसका इस्तेमाल कहां हुआ? एथेनॉल 56 से 58 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। सरकार इसे खरीदती है, जबकि एथेनॉल का उत्पादन किसानों के गन्ने से ही होता है। अगर एथेनॉल की बाजार में बिक्री से होने वाले लाभ में से किसानों को 5 से 6 रुपये अतिरिक्त दिए जाएं, तो क्या किसानों को राहत नहीं मिल सकती? इस पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।
संतोष लाड ने आगे कहा कि देश में चीनी का कितना उत्पादन हो रहा है और कितनी जरूरत है, इसका आकलन कौन करेगा? आज किसान FRP (उचित एवं लाभकारी मूल्य) और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की मांग कर रहे हैं। इनकी कीमतें कौन तय करेगा? 10 लाख टन चीनी आयात की गई, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? पहले 40 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी की कीमत 70 रुपये तक पहुंच गई, लेकिन इस पर किसी ने गंभीरता से विचार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि चीनी का उत्पादन नियंत्रित करने और आयात का फैसला लेने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। एथेनॉल और चीनी से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी केंद्र सरकार के पास होनी चाहिए।
केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लोगों से कहते हैं कि देश के लिए सोना न खरीदें, विदेश यात्रा न करें और पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें। लेकिन पेट्रोल की कीमत चाहे जितनी बढ़े, उसका बोझ आम लोगों पर ही पड़ता है। देश चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है, फिर मुश्किलें आने पर दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय जवाब कौन देगा?
उन्होंने सवाल किया कि गन्ना किसानों को किस दर पर गन्ना बेचा जाना चाहिए, यह कौन तय करेगा? मिनिमम सेलिंग प्राइस (MSP नहीं, बल्कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य) तय करने में राज्य सरकार की क्या भूमिका है? कीमतें तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
संतोष लाड ने कहा कि देश में हर साल लगभग 6,000 करोड़ लीटर पेट्रोल का इस्तेमाल होता है और एथेनॉल को 20 प्रतिशत तक मिलाने की नीति भी केंद्र सरकार ने ही लागू की है। इसके बावजूद एथेनॉल लगभग 55 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जाता है, जबकि पेट्रोल करीब 110 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचा जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जाता है, तो इससे होने वाला आर्थिक लाभ आखिर किसे मिल रहा है? किसानों का गन्ना चीनी मिलों में जाता है और मिलें उससे एथेनॉल तैयार करती हैं। केंद्र सरकार एथेनॉल खरीदती है, लेकिन इससे होने वाले लाभ का हिस्सा किसानों को कैसे मिल रहा है, इस पर चर्चा होनी चाहिए।
संतोष लाड ने मांग की कि एथेनॉल उत्पादन, खरीद, कीमतों और उससे होने वाले लाभ को लेकर केंद्र सरकार स्पष्ट जानकारी दे और किसानों को इसका उचित लाभ मिले।

