बेंगलुरु: कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा या कांग्रेस नेतृत्व की नाकामी को ज़िम्मेदार ठहराने वाली राय को लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली ने खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव में हार और जीत को सिर्फ नेतृत्व के मुद्दे तक सीमित करके देखना सही नहीं है।
बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि इससे पहले सिद्धारमैया और एस.एम. कृष्णा के मुख्यमंत्री रहने के दौरान भी कांग्रेस को इन क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में सिर्फ मौजूदा चुनावी नतीजों के आधार पर कांग्रेस सरकार के नेतृत्व पर सवाल उठाना मुनासिब नहीं है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी और जेडीएस मिलकर चुनाव लड़ रही हैं, जिससे उनकी सियासी ताकत बढ़ी है। इसलिए ग्रेजुएट्स और टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों की विधान परिषद चुनाव में आए नतीजों को कांग्रेस के लिए बड़ी शिकस्त बताना सही नहीं होगा।
चार में से पहले कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट थी
ग्रेजुएट्स और टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीश जारकीहोली ने कहा कि कांग्रेस को मिली सीटों के नुकसान का वास्तविकता के आधार पर विश्लेषण किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि चार निर्वाचन क्षेत्रों में से पहले कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट थी, जबकि बाकी तीन सीटें बीजेपी और जेडीएस के पास थीं। अब इन दोनों पार्टियों ने अपनी पिछली सीटें फिर से हासिल कर ली हैं। ऐसे में इस नतीजे को कांग्रेस के लिए बड़ी सियासी शिकस्त के तौर पर पेश करने की ज़रूरत नहीं है।
मंत्री ने कांग्रेस को चुनावी नुकसान होने के दावों पर असहमति जताते हुए कहा कि नतीजों का आकलन करते समय पिछली स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में हुई चुनावी हार का हवाला देते हुए दोहराया कि सिर्फ एक चुनाव के नतीजे के आधार पर पार्टी के नेतृत्व की कामयाबी या नाकामी का फैसला करना सही नहीं है।

