चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने अच्छा प्रदर्शन किया है. कर्नाटक में गठबंधन ने तीन सीटें जीतीं, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में भी अपनी स्थिति मजबूत रखी. कांग्रेस को किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली है.

 

नई दिल्ली: चार राज्यों में विधान परिषद (एमएलसी) की 28 सीटों पर हुए चुनाव की मतगणना में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा है. कर्नाटक में पार्टी ने तीन सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा. उत्तर प्रदेश और बिहार में भी भाजपा ने कई सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं, कांग्रेस को अब तक किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली है. पार्टी किसी सीट पर आगे भी नहीं है.

हालांकि, भाजपा को हर जगह एकतरफा जीत नहीं मिली. उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने उसे चुनौती दी. बिहार में तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. निर्दलीय उम्मीदवारों और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी भाजपा के खाते में जाने वाली कुछ सीटें छीन लीं.

कर्नाटक में भाजपा की तीन सीटों पर जीत

कर्नाटक में एमएलसी चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए अहम हैं. पार्टी ने चार में से तीन सीटें जीत लीं. ये सीटें उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की हैं. इन तीनों सीटों पर पहले भी भाजपा का कब्जा था. चौथी सीट, बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, जनता दल (सेक्युलर) ने जीती.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हार स्वीकार की. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि पार्टी नतीजों की गहराई से समीक्षा करेगी और सुधार के लिए जरूरी कदम उठाएगी.

शिवकुमार ने यह भी कहा कि इन नतीजों का 2028 के विधानसभा चुनाव पर असर पड़ने की बात को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है.

भाजपा के लिए कर्नाटक में यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी दक्षिण भारत के इस राज्य में फिर से सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है. कर्नाटक दक्षिण भारत का एकमात्र राज्य है, जहां भाजपा पहले सरकार बना चुकी है.

बिहार में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला

बिहार में भी कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा है. राज्य में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन किया. पिछले विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने वाली इस पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट जीत ली.

कुल आठ सीटों में से भाजपा और नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) ने चार सीटें जीतीं. तेजस्वी यादव की राजद और प्रशांत किशोर की पार्टी को एक-एक सीट मिली. दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की.

उत्तर प्रदेश में भाजपा को पांच सीटें

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव हुए हैं. भाजपा अब तक पांच सीटें जीत चुकी है. समाजवादी पार्टी ने तीन सीटें जीती हैं. बाकी सीटों पर मतगणना जारी है.

उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए यह नतीजा अहम है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पार्टी पर दबाव की चर्चा थी. उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए हिंदी पट्टी का सबसे अहम राज्य है. इसे पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है.

अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में अगर भाजपा यहां हारती, तो इससे पार्टी के कमजोर होने की चर्चा को और बल मिलता.

हालांकि, अखिलेश यादव अब भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं.

महाराष्ट्र में भाजपा आगे

महाराष्ट्र में अभी जीत की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. हालांकि, यहां भी भाजपा आगे चल रही है. भाजपा और उसके सहयोगी दल, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, तीन सीटों पर आगे हैं.

शरद पवार के नेतृत्व वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) गुट को दो सीटों पर बढ़त मिली हुई है.

महाराष्ट्र में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई बनी हुई है. नागपुर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है. यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय भी है. आरएसएस को भाजपा का वैचारिक मार्गदर्शक माना जाता है.

कांग्रेस नागपुर स्नातक और पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पीछे चल रही है. पिछली बार इन दोनों सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. अगर मौजूदा रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो महाराष्ट्र में भी पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है.

भाजपा का तंज

चुनाव नतीजों के बाद भाजपा ने कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर तंज कसा. पार्टी ने कहा कि इन चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय मतपत्रों का इस्तेमाल हुआ था.

भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि मतदान का तरीका चाहे जो भी हो, मतदाताओं ने राहुल गांधी की राजनीति को खारिज कर दिया है. कर्नाटक भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा.

भाजपा की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस के उन आरोपों के बाद आई है, जिनमें पार्टी ने पिछले कई वर्षों से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया है.

कांग्रेस का दावा रहा है कि इन गड़बड़ियों का मकसद भाजपा को जीत दिलाना है. भाजपा इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है.

हालांकि, कई लोगों ने यह भी कहा है कि इन नतीजों से अकेले ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों का फैसला नहीं हो सकता. एमएलसी चुनावों में मतदाताओं का दायरा सीमित होता है. इसमें आम चुनावों की तरह पूरी जनता मतदान नहीं करती.