सऊदी अरब में आधी सदी पुराना ‘कफाला’ सिस्टम खत्म, लाखों प्रवासी मजदूरों को मिलेगा कानूनी सुरक्षा
सऊदी अरब ने विवादित “कफाला सिस्टम” को खत्म करने की ऐतिहासिक घोषणा की है। इस प्रणाली के तहत विदेशी मजदूर अपने “कफील” (स्थानीय प्रायोजक) के नियंत्रण में रहते थे और उनके पास नौकरी बदलने या देश छोड़ने की स्वतंत्रता नहीं थी। मानवाधिकार संगठन इसे “आधुनिक युग की गुलामी” मानते थे।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार इस सुधार से सऊदी अरब में काम करने वाले लगभग 1.3 करोड़ प्रवासी मजदूरों को लाभ होगा, जिनमें करीब 25 लाख भारतीय मजदूर शामिल हैं। कफाला सिस्टम 1950 के दशक में खाड़ी देशों में मजदूरों के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया था। इस व्यवस्था में कफील मजदूरों के वीज़ा, निवास और नौकरी के सभी अधिकार रखते थे और कई बार पासपोर्ट भी जब्त कर लेते थे।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, यह प्रणाली विशेष रूप से महिलाओं और अप्रशिक्षित मजदूरों के शोषण का प्रमुख कारण थी। कई भारतीय, नेपाली, फिलिपीनी और बांग्लादेशी मजदूरों ने यौन शोषण, हिंसा और वेतन न मिलने की शिकायतें दर्ज कराई थीं। एक मामले में, कर्नाटक की नर्स जेसंथा मेंडोंसा को 2016 में कथित तौर पर सऊदी अरब ले जाकर जबरन काम कराया गया था। उनकी रिहाई भारतीय कूटनीतिक हस्तक्षेप से संभव हुई।
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने “विजन 2030” के तहत सामाजिक और आर्थिक सुधारों की घोषणा की थी। इसी सुधारों के अंतर्गत कफाला प्रणाली का अंत किया गया, जिसका उद्देश्य विदेशी निवेश बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर सऊदी अरब की प्रतिष्ठा सुधारना है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “यह सऊदी अरब में भारतीय मजदूरों के लिए बड़ी राहत है। अब उन्हें नौकरी बदलने, देश छोड़ने और कानूनी सुरक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिलेंगे।”
विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अरब का यह कदम मध्य पूर्व में मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।







