कंबल का भी कोई धर्म नहीं होता?
23 फ़रवरी 2026 को राजस्थान के टोंक ज़िले के एक गाँव सवाई माधोपुर में घटी एक घटना ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बताया जाता है कि क्षेत्र के पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह गांव में गरीब महिलाओं को कंबल वितरित कर रहे थे। वहां मौजूद महिलाओं में कुछ मुस्लिम महिलाएं भी शामिल थीं।
जब उनसे नाम पूछा गया और उन्होंने अपना मुस्लिम नाम बताया, तो पूर्व सांसद कथित तौर पर नाराज़ हो गए और कहा कि उन्हें कंबल नहीं दिए जाएंगे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि कंबल केवल उन्हीं को मिलेंगे जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट दिया है। यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है।
बताया जाता है कि वितरण के बाद कुछ कंबल बच गए थे। साथ मौजूद एक युवक ने सुझाव दिया कि वे कंबल उन मुस्लिम महिलाओं को दे दिए जाएं जिन्हें वंचित रखा गया था। इस पर पूर्व सांसद ने आपत्ति जताई और वहां से चले गए।
इस घटना ने एक बार फिर धर्म आधारित राजनीति और सामाजिक विभाजन पर बहस छेड़ दी है। राजस्थान ऐतिहासिक रूप से सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सहिष्णुता के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं में वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है।
घटना के बाद, स्थानीय युवाओं की एक टीम—जिन्हें यूथ कांग्रेस से जुड़ा बताया जा रहा है—ने उन मुस्लिम महिलाओं को कंबल वितरित किए। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक अन्य वीडियो में ये युवक गांव की हिंदू-मुस्लिम एकता की परंपरा का हवाला देते हुए सांप्रदायिक भेदभाव का विरोध करते दिखाई देते हैं।
इसी संदर्भ में हाल ही में उत्तराखंड में चर्चित “मोहम्मद दीपक” प्रकरण और उत्तर प्रदेश के मेरठ में मेट्रो ट्रेन में एक मुस्लिम यात्री के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना ने भी सामाजिक सौहार्द और नागरिक समानता पर नई चर्चा को जन्म दिया है।
आलोचकों का कहना है कि धर्म आधारित ध्रुवीकरण की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौती बनती जा रही है। वहीं, वैकल्पिक मीडिया प्लेटफॉर्म और कुछ स्वतंत्र पत्रकार लगातार बढ़ती सांप्रदायिकता और राजनीतिक ध्रुवीकरण पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि मुख्यधारा मीडिया की भूमिका पर भी बहस जारी है।
इन घटनाओं के बीच यह सवाल फिर उभरता है—क्या राहत, सेवा और मानवीय सहायता का भी कोई धर्म होता है? लोकतांत्रिक समाज में समानता, सम्मान और न्याय के सिद्धांत ही उसकी असली पहचान होते हैं।
लेखक: मोहम्मद आज़म शाहिद
Source: Haqeeqat Times (Translate in Hindi)







