देश में पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना का ऐलान किया गया है, जिसे आधुनिक तकनीक के माध्यम से संचालित किया जाएगा। गृह मंत्रालय के अंतर्गत डायरेक्टरेट ऑफ सेंसस ऑपरेशंस कर्नाटक द्वारा जनगणना 2027 को लेकर जारी प्रेस नोट में यह जानकारी दी गई।
बताया गया कि यह भारत की 16वीं जनगणना (1872 से) और आजादी के बाद आठवीं जनगणना होगी। यह केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय आंकड़ों का एक व्यापक और जटिल तंत्र है, जो नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण (हाउस लिस्टिंग व हाउसिंग जनगणना) 16 अप्रैल 2026 से 15 मई 2026 तक चलेगा, जबकि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण का अवसर दिया जाएगा। इस चरण में घरों की स्थिति, सुविधाएं, संपत्तियां और अन्य बुनियादी जानकारी एकत्र की जाएगी।
दूसरा चरण (जनसंख्या गणना) फरवरी 2027 में आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की विस्तृत सामाजिक और आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी।
इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से होगी, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए डेटा संग्रह किया जाएगा। साथ ही पहली बार नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी दी जाएगी, जिसके लिए विशेष वेब पोर्टल तैयार किया गया है।
जनगणना के दौरान आवास की प्रकृति, घरों की स्थिति, परिवार की संरचना, स्वामित्व विवरण, पानी, बिजली, शौचालय और ईंधन जैसी बुनियादी सुविधाएं, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, इंटरनेट सहित अन्य सामाजिक-आर्थिक सूचकांक से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान प्राप्त सभी जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगी। यह जानकारी किसी भी सरकारी या निजी संस्था के साथ साझा नहीं की जाएगी और न ही कर या किसी कानूनी कार्रवाई के लिए उपयोग की जाएगी। केवल समग्र आंकड़े ही सार्वजनिक किए जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार, जनगणना 2027 पारदर्शिता, सटीकता और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे विकास योजनाओं, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और नीति निर्माण में बड़ी सहायता मिलेगी।
Source: Haqeeqat Times







