केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने सुप्रीम कोर्ट में ई-20 कार्यक्रम को ‘ऑनगोइंग एक्सपेरिमेंट’ बताया है. मंत्रालय ने मीडिया से रिपोर्टिंग में सटीकता बरतने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रीय नीतियों से जुड़े मामलों में तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने मंगलवार (1 जुलाई, 2026) को उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि ई-20 पेट्रोल मिश्रण कार्यक्रम एक ‘जारी प्रयोग’ है और इसकी नीति का वास्तविक असर अगले साल तक स्पष्ट हो पाएगा.
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने मंगलवार (30 जून) को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ई-20 ब्लेंडिंग कार्यक्रम एक ‘चल रहा प्रयोग’ है और इसका पूरा प्रभाव अगले वर्ष तक स्पष्ट हो जाएगा. अदालत भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के 23 जून के आदेश को चुनौती दी गई है. हाईकोर्ट ने एथेनॉल आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को निर्देश दिया है कि वे एथेनॉल सप्लाई ईयर (ईएसवाई) 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन में कोई बदलाव न करें. कई अन्य मीडिया संस्थानों ने भी अटॉर्नी जनरल के कथित बयान के आधार पर इसी तरह की खबरें प्रकाशित की थीं.
हालांकि, केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत बताया है.
मंत्रालय ने कहा, ‘ये खबरें पूरी तरह असत्य हैं और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष की गई वास्तविक दलीलों से इनका कोई संबंध नहीं है.’
मंत्रालय के अनुसार, सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने केवल यह कहा था कि डेडिकेटेड एथेनॉल प्लांट्स को एथेनॉल आवंटन से जुड़े समान मुद्दों पर कई याचिकाएं विभिन्न हाईकोर्टों में लंबित हैं.
मंत्रालय ने स्पष्ट किया, ‘सुनवाई के किसी भी चरण में यह नहीं कहा गया कि सरकार का एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम या ई-20 ब्लेंडिंग कार्यक्रम कोई ‘प्रयोग’ है.’
साथ ही मंत्रालय ने मीडिया से न्यायिक कार्यवाहियों की रिपोर्टिंग में सटीकता बरतने की अपील करते हुए कहा कि विशेष रूप से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीतियों से जुड़े मामलों में तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए.
इस बीच, इकोनॉमिक टाइम्स की ही एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार अब ई-25 पेट्रोल यानी 25 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का परीक्षण शुरू कर चुकी है. इसका उद्देश्य यह समझना है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का वाहनों के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ता है. सरकार स्थानीय स्तर पर उत्पादित जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया को इस अध्ययन की जिम्मेदारी दी गई है. संस्था ने ई10 और ई-20 मानकों के अनुरूप तैयार किए गए वाहनों पर ई-25 ईंधन का परीक्षण शुरू कर दिया है.
गौरतलब है कि सरकार ने अप्रैल से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के तहत ई-20 ईंधन की बिक्री अनिवार्य कर दी थी. ई-20 पेट्रोल में अधिकतम 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है. हालांकि इस फैसले की उपभोक्ताओं और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने आलोचना की थी. उनका कहना था कि इससे वाहनों की माइलेज कम हो रही है.
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि भारत भविष्य में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा ई-20 से आगे बढ़ाना चाहता है, तो उसे चीनी के निर्यात पर रोक लगानी पड़ सकती है, क्योंकि देश में एथेनॉल का बड़ा हिस्सा गन्ने से तैयार होता है.
उल्लेखनीय है कि 18 मई को केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण (ई-30) के मानकों को भी अधिसूचित कर दिया था. यह कदम पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत उठाया गया था.
Source: The Wire

