जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले आगामी एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी टीमें एक बार फिर नीली जर्सी पहनेंगी. पिछले महीने आयोजित हॉकी विश्व कप के दौरान पारंपरिक नीली जर्सी के बजाय भगवा रंग की जर्सी चुने जाने के बाद हॉकी इंडिया को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
नई दिल्ली: नई भगवा रंग की जर्सी को लेकर हुई आलोचना के बाद भारतीय हॉकी टीमें आगामी एशियाई खेलों में एक बार फिर नीली जर्सी पहनेंगी. जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले इन खेलों में भगवा रंग की जर्सी दूसरी पसंद (सेकेंड चॉइस) होगी.
इससे पहले पिछले महीने आयोजित हॉकी विश्व कप के दौरान पारंपरिक नीली जर्सी के बजाय भगवा रंग की जर्सी चुने जाने के बाद हॉकी इंडिया को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई खेलों के लिए भारतीय दल की विदाई के मौके पर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा, ‘भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने हमें टीम किट के रंगों को लेकर विकल्प दिए थे और हॉकी इंडिया ने भारतीय टीम की किट के लिए नीले रंग को पहली पसंद के रूप में चुना है. नारंगी दूसरी पसंद होगी.’
हाल ही में संपन्न विश्व कप में भारतीय हॉकी टीमों ने प्रतिष्ठित नीली जर्सी को पूरी तरह छोड़ दिया था और भगवा रंग की जर्सी पहनी थी, जबकि सफेद रंग दूसरी पसंद था.
आमतौर पर हॉकी टीमें किसी टूर्नामेंट के लिए जर्सी के दो रंग रखती हैं. वर्षों से भारत के लिए नीला रंग हमेशा प्रमुख विकल्पों में रहा है, जबकि दूसरे रंग में समय के साथ बदलाव होता रहा है- सफेद से पीला और फिर भगवा तक.
मंगलवार, 8 सितंबर, को जापान के लिए रवाना हुए एक भारतीय खिलाड़ी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, ‘आसमानी नीले रंग पर सफेद रंग वाली जर्सी वैसी ही है जैसी हमने पिछले एशियाई खेलों में हांगझोउ (2023) में पहनी थी.’
इस साल जुलाई में ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) के प्रमुख नवीन पटनायक ने आरोप लगाया था कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से भगवा किए जाने के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
ओडिशा सरकार भारतीय हॉकी टीम की प्रमुख प्रायोजक है.
जर्सी का रंग बदलने के फैसले की पूर्व खिलाड़ियों और सोशल मीडिया यूजर्स ने व्यापक आलोचना की थी. आलोचकों ने पिछले एक दशक के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा राजनीतिक रूप से जुड़े माने जाने वाले भगवा रंग को विभिन्न क्षेत्रों में लगातार बढ़ावा दिए जाने का हवाला देते हुए खेलों के ‘भगवाकरण’ का आरोप लगाया था.
हॉकी प्रशंसकों और खेल जगत के कई दिग्गजों ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए थे. कम से कम सात पूर्व भारतीय कप्तानों, ओलंपिक पदक विजेताओं और विश्व कप विजेता टीमों का नेतृत्व कर चुके कप्तानों ने दशकों पुरानी नीली जर्सी को हटाकर भगवा जर्सी अपनाने की आवश्यकता और उसके औचित्य पर गंभीर प्रश्न उठाए थे.
Source: The Wire

