कर्नाटक SIR: मतदाता सूची की खामियों पर मोहम्मद जुबैर के सवाल
कर्नाटक में SIR के बाद अनियमितताओं के आरोप, जुबैर के सवालों पर चुनाव आयोग मौन
एक व्यक्ति के नाम पांच वोटर कार्ड, जीवित महिला को मृत घोषित किया गया; अंतिम सूची में XXX और प्रश्नचिह्न जैसे नाम
कर्नाटक में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद कथित अनियमितताओं के कई मामले सामने आने लगे हैं। चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी करते हुए दावा किया था कि पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और सावधानी के साथ पूरी की गई है तथा किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया गया है। हालांकि, अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद सामने आए विभिन्न मामलों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक और प्रसिद्ध फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने दस्तावेजी सबूतों के साथ SIR के दौरान सामने आई कथित खामियों को उजागर करते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनबु कुमार और चुनाव आयोग से कई सवाल किए हैं।
उनका कहना है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वोटर आईडी जारी होना, दो राज्यों में मतदाता के रूप में नाम दर्ज रहना, जीवित लोगों को मृत घोषित करना और मतदाता सूची में अस्पष्ट प्रविष्टियां होना, पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। इन आरोपों पर राज्य के चुनाव अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एक ही व्यक्ति का नाम कर्नाटक और बिहार की मतदाता सूचियों में दर्ज होने का आरोप
मोहम्मद जुबैर ने 27 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि भाजपा से जुड़े उदय कुमार और उनकी पत्नी बिंदु कुमारी के नाम कर्नाटक और बिहार, दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, उदय कुमार का नाम बेंगलुरु के हेब्बल विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है। उनका EPIC नंबर SOH4526935 बताया गया है और मतदान केंद्र ऑलविन पब्लिक स्कूल दर्ज है।
दूसरी ओर, बिहार के नवादा जिले के हिसुआ विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भी उनका नाम मौजूद है। वहां उनका EPIC नंबर UAO0928291 दर्ज है और मतदान केंद्र के रूप में बेरौटा वेस्ट स्थित अपग्रेडेड मिडिल स्कूल का नाम दिया गया है।
जुबैर के अनुसार, उदय कुमार की पत्नी बिंदु कुमारी के नाम भी दोनों राज्यों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। उन्होंने दोनों रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों को एक ही व्यक्ति का बताते हुए पिता के नाम और उम्र में अंतर की ओर भी ध्यान दिलाया है।
जुबैर ने दावा किया कि उदय कुमार ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु में मतदान किया था, जबकि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में नवादा के एक मतदान केंद्र पर भी उनके वोट डालने की तस्वीरें सामने आई हैं।
उन्होंने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, बेंगलुरु के उपायुक्त, नवादा के उपायुक्त और चुनाव आयोग से सवाल किया कि एक व्यक्ति के पास दो अलग-अलग EPIC नंबर और दो राज्यों में मतदाता के रूप में दर्ज होने की स्थिति कैसे बनी रह सकती है?
उनके अनुसार, बिहार और कर्नाटक दोनों राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद ऐसे रिकॉर्ड बने रहना पुनरीक्षण प्रक्रिया की जांच की मांग करता है। हालांकि, इस मामले पर चुनाव आयोग की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
एक व्यक्ति के नाम चार फॉर्म-6 और चार वोटर आईडी
मोहम्मद जुबैर ने बेंगलुरु दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के मतदाता अभिषेक के.एन. का मामला भी उठाया है, जिनके नाम पर कथित तौर पर चार वोटर आईडी जारी किए गए हैं।
जुबैर के अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची में अभिषेक का नाम मौजूद नहीं था। इसके बाद उन्होंने एक ही दिन में फॉर्म-6 के जरिए चार बार पंजीकरण के लिए आवेदन किया। इन आवेदनों के परिणामस्वरूप उनके नाम पर चार अलग-अलग EPIC नंबर जारी हो गए।
जुबैर ने सवाल किया कि एक ही व्यक्ति द्वारा जमा किए गए कई आवेदनों की पहचान और जांच के लिए चुनाव आयोग के पास कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है? जब एक ही व्यक्ति के चार आवेदन जमा हुए, तो उन्हें रोकने या सत्यापित करने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
उन्होंने यह भी पूछा कि फर्जी प्रविष्टियों को हटाने के लिए शुरू की गई प्रक्रिया के दौरान एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वोटर आईडी कैसे जारी हो गए?
दो आवेदनों पर पांच वोटर आईडी जारी होने का दावा
इसी तरह का एक अन्य मामला महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता संतोष कुमार से जुड़ा है। जुबैर के अनुसार, संतोष कुमार ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 के जरिए दो आवेदन जमा किए थे, लेकिन उनके नाम पर पांच अलग-अलग वोटर आईडी जारी हो गए।
जुबैर का कहना है कि SIR के बाद प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में संतोष कुमार का नाम मौजूद नहीं था। इसके बाद उन्होंने नए सिरे से पंजीकरण के लिए दो आवेदन जमा किए, लेकिन चुनाव अधिकारियों की ओर से उनके नाम पर पांच अलग-अलग पहचान पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया।
उन्होंने सवाल किया कि यदि एक व्यक्ति के दो आवेदनों के आधार पर पांच वोटर आईडी जारी हो सकते हैं, तो राज्यभर में ऐसे और कितने मामले मौजूद होंगे? उनके अनुसार, व्यवस्थित जांच की जाए तो कर्नाटक में ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं।
जुबैर ने यह भी याद दिलाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इसी विधानसभा क्षेत्र से संबंधित एक लाख से अधिक वोटों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया था।
मतदाता सूची में अजीब और अस्पष्ट नामों की प्रविष्टियां
अंतिम मतदाता सूची में असामान्य और अस्पष्ट प्रविष्टियों का मामला भी सामने आया है। अंग्रेजी दैनिक द हिंदू ने 2 नवंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया कि बेंगलुरु की अंतिम मतदाता सूची में कम से कम एक हजार प्रविष्टियों में विभिन्न प्रकार की खामियां पाई गई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मतदाताओं के नामों की जगह XXX, प्रश्नचिह्न, केवल एक अक्षर, ईमेल आईडी और तीन बिंदुओं जैसी असामान्य प्रविष्टियां मौजूद हैं। कुछ स्थानों पर रिश्तेदारों के नाम भी गायब पाए गए हैं।
मोहम्मद जुबैर ने इन प्रविष्टियों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी से सवाल किया कि यदि यह अंतिम और सत्यापित मतदाता सूची है, तो इसमें ऐसी गलतियां कैसे रह गईं? उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
27 वर्षीय जीवित महिला को मृत घोषित करने का मामला
SIR के दौरान सामने आई एक गंभीर कथित गलती बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर विधानसभा क्षेत्र की 27 वर्षीय मतदाता अर्चना से संबंधित है।
मोहम्मद जुबैर के अनुसार, अर्चना को चुनावी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर ASD-DDO सूची में शामिल कर दिया गया था, जबकि वह जीवित हैं और उन्होंने अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भी जमा किया था। अब उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में मौजूद है।
इस मामले पर जुबैर ने चुनाव अधिकारियों से सवाल किया कि किसी मतदाता को मृत घोषित करने से पहले क्या उसका मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त कर उसकी पुष्टि की गई थी? क्या संबंधित जन्म-मृत्यु पंजीयक से मृत्यु की पुष्टि कराई गई थी? क्या बूथ लेवल अधिकारी (BLO) ने संबंधित महिला के घर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की थी? और आखिर किस व्यक्ति की सूचना पर उन्हें मृत घोषित किया गया?
उन्होंने यह भी पूछा कि इस फैसले को किस अधिकारी ने मंजूरी दी और क्या सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने इसकी जांच की थी?
जुबैर ने मांग की है कि कर्नाटकभर में उन सभी मतदाताओं के मामलों का विशेष ऑडिट किया जाए, जिन्हें मृत घोषित कर सूची से हटाया गया है। खास तौर पर 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों की प्रविष्टियों की दोबारा जांच की जाए।
उनका कहना है कि चुनाव अधिकारियों की गलती के कारण किसी जीवित नागरिक को दोबारा मतदाता बनने के लिए आवेदन करने की नौबत नहीं आनी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि ASD-DDO सूची में अर्चना नाम की सैकड़ों महिलाएं मौजूद हैं, जिन्हें मृत घोषित किया गया है। ऐसे सभी मामलों की वास्तविकता सामने लाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
एक महिला के नाम पांच वोटर आईडी
बेंगलुरु दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की 50 वर्षीय महिला ज्योति एन. के नाम पर पांच वोटर आईडी जारी होने का मामला भी जुबैर ने उठाया है।
उनके अनुसार, ज्योति का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं था। नाम दर्ज कराने के लिए उन्होंने फॉर्म-6 के जरिए तीन बार आवेदन किया, लेकिन उनके नाम पर कुल पांच अलग-अलग वोटर आईडी जारी हो गए।
जुबैर ने इसे चुनावी व्यवस्था की गंभीर खामी बताते हुए सवाल किया कि कई आवेदनों की जांच और एक ही व्यक्ति की पहचान सत्यापित करने के लिए अपनाई गई व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता का नाम दो बार दर्ज
बेंगलुरु के मतदाता राकेश कुमार दास का मामला भी मतदाता सूचियों की जांच पर सवाल उठाता है।
जुबैर के अनुसार, SIR से पहले राकेश कुमार दास का नाम D-2004 मकान नंबर के पते पर मतदाता के रूप में दर्ज था। लेकिन SIR के दौरान उन्हें स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया और ड्राफ्ट मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया।
हालांकि, अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम उसी मकान नंबर और पते के साथ दो बार दर्ज पाया गया। दोनों प्रविष्टियों के लिए अलग-अलग EPIC नंबर जारी किए गए हैं।
जुबैर का कहना है कि उन्होंने फॉर्म-6 के जरिए नए पंजीकरण की सूचियों में भी राकेश कुमार दास का नाम तलाशा, लेकिन वहां उनका नाम नहीं मिला।
उन्होंने सवाल किया कि जिस व्यक्ति को स्थायी रूप से स्थानांतरित होने के आधार पर मतदाता सूची से हटाया गया था, उसका नाम अंतिम सूची में उसी पते पर दो अलग-अलग पहचान नंबरों के साथ कैसे शामिल हो गया?
SIR विरोधी संगठनों की आशंकाओं को भी बल
कर्नाटक में SIR का विरोध कर रहे संगठन और लोकतांत्रिक अधिकारों के कार्यकर्ता शुरुआत से ही मतदाता सूचियों में संभावित अनियमितताओं और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंकाएं जताते रहे हैं।
SIR विरोधी गठबंधन ने राज्य के लगभग 73 मतदान केंद्रों पर सर्वेक्षण कर ऐसे पात्र मतदाताओं की जानकारी और दस्तावेजी सबूत जुटाए हैं, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे अपने मताधिकार से वंचित हो गए हैं।
गठबंधन की ओर से कई बार चुनाव आयोग के सामने ये मामले उठाए गए। हालांकि, कुछ अवसरों पर चुनाव अधिकारियों ने स्पष्टीकरण दिया, जबकि कई महत्वपूर्ण सवालों पर चुप्पी साध ली गई।
इस दौरान फॉर्म-7 के कथित गलत और सामूहिक इस्तेमाल के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिशों का मामला भी सामने आया था। विजयपुरा के पूर्व भाजपा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल, बेलगावी दक्षिण के भाजपा विधायक अभय पाटिल और कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से फॉर्म-7 जमा किए जाने के मामलों पर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।
मोहम्मद जुबैर की ओर से दस्तावेजी सबूतों के साथ सामने लाए गए हालिया मामलों ने SIR के तहत मतदाता सूचियों के सत्यापन और उनकी शुद्धता के सरकारी दावों को और अधिक जांच के दायरे में ला दिया है।
एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वोटर आईडी, दो राज्यों में मतदाता के रूप में पंजीकरण, जीवित नागरिक को मृत घोषित करना और अंतिम सूची में अस्पष्ट नामों का मौजूद होना ऐसे मामले हैं, जिन पर स्पष्टीकरण जरूरी है।
चुनाव आयोग ने SIR के बाद मतदाता सूचियों को पूरी तरह सही और पारदर्शी बताया था। लेकिन अब सामने आए इन खुलासों के बाद बुनियादी सवाल यह है कि यदि ये सभी प्रविष्टियां सही हैं, तो उनकी वास्तविकता क्या है? और यदि इनमें गलतियां हैं, तो उनके लिए जिम्मेदार कौन है?
चुनावी प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनबु कुमार और चुनाव आयोग को इन सभी मामलों पर स्पष्ट जवाब देना होगा।
Source: Haqeeqat Times

