पिछले 15 महीनों में देशभर में फ़र्ज़ी बम धमकियों के 1,600 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें स्कूल, अदालतें, हवाई अड्डे और अस्पताल प्रमुख निशाने पर रहे. अधिकांश धमकियां ईमेल के ज़रिए दी गईं और हर बार बड़े स्तर पर सुरक्षा जांच के बावजूद कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला. इसके बावजूद इन घटनाओं ने व्यापक दहशत, अव्यवस्था और संसाधनों पर भारी दबाव पैदा किया है.
नई दिल्ली: इस साल फरवरी महीने में कर्नाटक हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में बेंगलुरु के कोरमंगला स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र को गिराने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता का दावा था कि जिस ज़मीन पर यह इमारत खड़ी है, वो बच्चों के खेल का मैदान हुआ करता था. चूंकि याचिकाकर्ता ऐसा कोई कागज़ पेश नहीं कर सके जो उनके दावे की पुष्टि करता हो, इसलिए कोर्ट ने याचिका ख़ारिज कर दी.
इस ख़बर की विस्तृत जानकारी पढ़ने के लिए अगर आप इंटरनेट पर बेंगलुरु या कोरमंगला पासपोर्ट केंद्र लिखकर खोजते हैं तो यह अकेली ख़बर नहीं है, जो इस दफ़्तर को सुर्ख़ियों में बनाए हुए हैं.
जून 2025 से इस पासपोर्ट सेवा केंद्र को तीन बार बम धमाके की धमकी मिली है, जो हर बार फ़र्ज़ी पाई गई.
इस पासपोर्ट केंद्र को ऐसी आख़िरी धमकी बीते 3 मार्च को एक ईमेल के ज़रिये मिली थी. जांच अधिकारी ने बताया कि धमकी वाला ईमेल सुबह मिला था जिसके बाद क़रीब 11 बजे कार्यालय को ख़ाली करवाया गया. क़रीब डेढ़ बजे तलाशी ख़त्म हुई और इस धमकी को फ़र्ज़ी क़रार दे दिया गया.
इससे पहले जनवरी महीने में भी ऐसा ईमेल मिलने के बाद विस्तृत तलाशी अभियान चला था.
जून 2025 में इस पासपोर्ट केंद्र को पहली बार धमकी भरा ईमेल मिला था, जिसमें ‘हज़ारों कसाब उठ खड़े होने’ की धमकी देते हुए कहा गया था कि दोपहर में धमाका होगा. इस मेल में राज्य के सीएम के आवास का भी ज़िक्र था. सभी जगहों पर सघन तलाशी हुई और अंततः इस धमकी को ‘होक्स’ यानी फ़र्ज़ी क़रार दे दिया गया.
बम धमाकों की फ़र्ज़ी धमकी का यह कोई इकलौता मामला नहीं है. बीते कुछ सालों से ऐसी ख़बरें हर दूसरे दिन, देश के अलग-अलग राज्यों से सामने आ रही हैं.
इस मायने में पिछले 15 महीने भारत के लिए काफ़ी चुनौतीपूर्ण साबित हुए हैं. द वायर की यह पड़ताल बताती है कि जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच बम से उड़ाने की झूठी धमकियों के 1,613 मामले सामने आए हैं. यानी पंद्रह महीनों में पंद्रह सौ से ज्यादा फर्जी धमकियां. केवल मार्च 2026 में ही ऐसे करीब 150 मामले सामने आए हैं.
इससे भी गंभीर समस्या यह है कि ज्यादातर मामलों में धमकी देने वाले नहीं पकड़े गए हैं. 90 प्रतिशत धमकियां ईमेल से भेजी गई हैं. कुछ मामलों में फोन कॉल का इस्तेमाल हुआ है, और कुछ गिने-चुने मामलों में पत्र का.
इन पंद्रह महीनों में स्कूलों-कॉलजों से लेकर हवाई अड्डों, अदालतों से अस्पतालों तक सैकड़ों कॉल आते रहे हैं, लाखों लोगों को जीवन अस्त-व्यस्त हुआ, लेकिन किसी भी मामले कोई वास्तविक बम नहीं मिला.
कभी इन धमकियों की वजह से जर्मनी से भारत आ रहे विमान को रास्ते से लौटना पड़ा. तो कई मामलों में धमकी की वजह से गंतव्य हवाईअड्डे की जगह विमान को किसी दूसरे शहर में उतरना पड़ा है. स्कूल और विश्वविद्यालय की परीक्षाओं को टालना पड़ा. मरीजों से भरे अस्पताल को खाली करवाना पड़ा.
यह रिपोर्ट भारत में बम की झूठी धमकियों के इस संकट को विस्तार से समझती है. हमने यह आंकड़े मीडिया में छपी खबरों को खंगाल कर निकाले हैं. संभव है कि वास्तव में मामले इससे भी कहीं ज्यादा हों.
स्कूल निशाने पर
एक पैटर्न के तहत दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, पंजाब, कर्नाटक, राजस्थान समेत कई राज्यों के स्कूलों को बम की धमकी वाले ईमेल मिले हैं. इस अवधि में अप्रैल-मई 2025 को छोड़कर हर महीने सैकड़ों स्कूलों को धमकियां मिली हैं. इन महीनों में देशभर के स्कूलों को 1,094 धमकियां मिली हैं.
हालांकि, इसमें से दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों को सबसे ज्यादा 841 धमकियां मिली हैं. सितंबर 2025 में तो एक ही दिन में 400 स्कूलों को धमकी मिलने की खबर छपी थी.
इस पड़ताल में दिल्ली इकलौते ऐसे सूबे के तौर पर उभरा, जहां लगभग हर महीने ऐसी धमकियां मिली हैं.
स्कूलों की धमकी के मामले में दूसरे नंबर पर गुजरात है, जहां के स्कूलों को इस दौरान 10 धमकियां मिली. ज्यादातर मामले अहमदाबाद के स्कूलों से जुड़े हैं. इसके बाद महाराष्ट्र और पंजाब का नंबर आता है. हालांकि, किसी भी मामलों में कोई विस्फोटक नहीं मिला, लेकिन इन धमकियों के कारण स्कूल खाली कराने पड़े, आपात जांच करनी पड़ी, छात्रों व अभिभावकों के बीच व्यापक डर और चिंता का माहौल बना.
इन घटनाओं में एक तयशुदा तरीका बार-बार सामने आया है. ज्यादातर मामलों में स्कूलों के आधिकारिक ईमेल आईडी पर गुमनाम या एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए धमकी भरे संदेश भेजे गए. इस तरह के ईमेल अक्सर सुबह-सुबह भेजे जाते हैं.
हर बार इन धमकियों के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी सक्रियता के साथ मौके पर पहुंचती हैं, स्कूलों को खाली कराया जाता है, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड तलाशी लेती है. लेकिन जांच में कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिलता और धमकी को फर्जी घोषित कर दिया जाता है.
जहां इस तरह की झूठी धमकियां अभिभावकों की मुश्किल बढ़ा देती हैं, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं का बार-बार होना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर डालता है.
शैक्षणिक संस्थानों को धमकी देने वाले कौन?
कुछ मामलों में शैक्षणिक संस्थानों को धमकी देने के आरोपी पकड़े गए हैं. जैसे- जनवरी 2025 में दिल्ली के कई स्कूलों में लगातार बम की झूठी धमकियां मिल रही थीं. छात्रों, अभिवावकों और स्कूल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ था, तभी पुलिस ने एक नाबालिग छात्र को हिरासत में लिया.
जांच में सामने आया कि छात्र परीक्षा नहीं देना चाहता था. इसी वजह से उसने बम धमकी का माहौल बनाने की योजना बनाई, ताकि परीक्षाएं बाधित हों और अंततः रद्द हो जाएं.
पुलिस ने बताया कि छात्र ने कम से कम छह बार बम धमकी वाले ईमेल भेजे थे. हर बार वह अपने स्कूल को छोड़कर अलग-अलग स्कूलों को निशाना बनाता था. संदेह से बचने के लिए वह एक ही ईमेल में कई स्कूलों को टैग करता था.
फरवरी 2025 में नोएडा निवासी कक्षा 9 के एक 15 वर्षीय छात्र को चार स्कूलों को बम की झूठी धमकी देने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. पुलिस के अनुसार, छात्र ने स्कूल जाने से बचने के लिए ऐसा किया था. उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल किया था.
जांच में सामने आया कि छात्र को यह तरीका पहले की ऐसी घटनाओं से जुड़ी खबरों को पढ़ने के बाद सूझा.
जून 2025 में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में एक पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रा को सेमिनार प्रेजेंटेशन से बचने के लिए बम की झूठी धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस के अनुसार, छात्रा ने कॉलेज को बंद कराने के लिए यह साजिश रची और हैदराबाद में काम कर रहे एक परिचित से कॉलेज के लैंडलाइन पर धमकी भरा कॉल करवाया था. इस कॉल के बाद कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया और एहतियातन इमारत खाली कराई गई थी.
अक्टूबर 2025 में पश्चिमी दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित विशाल भारती स्कूल के एक छात्र को परीक्षा से बचने के लिए अपने ही स्कूल को बम की झूठी धमकी देने के आरोप में पकड़ा गया था.
ये मामले दिखाते हैं कि कई बार इस तरह की धमकियों के पीछे गंभीर आतंकी मंशा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत कारण, शरारत या दबाव से बचने की कोशिश भी होती है, हालांकि इसके परिणाम बेहद गंभीर और व्यापक होते हैं.
दरअसल, ऑनलाइन धमकी कम लागत में बड़े असर डालने वाला एक तरीका बनकर उभरा है.
देशभर की अदालतें भी निशाने पर
स्कूलों के बाद सबसे ज्यादा धमकियां अदालतों को मिली हैं, इसमें दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, मद्रास और बॉम्बे जैसे हाईकोर्ट के साथ-साथ मंगलुरू, मुलुगु, बीकानेर, जामतारा और दाहोद जैसे जिलों के अदालत भी शामिल हैं.
इन पंद्रह महीनों में अदालतों को धमकी के 100 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. राजस्थान, गुजरात और बॉम्बे हाईकोर्ट को सबसे ज्यादा धमकियां मिली हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने मार्च 2026 में कर्नाटक के मैसूर से श्रीनिवास लुइस (47) नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया, जिसने देशभर के हाईकोर्टों को निशाना बनाते हुए करीब 1,500 बम धमकी वाले ईमेल भेजे थे.
जांच में सामने आया कि उसके निशाने पर दिल्ली, मुंबई, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और चंडीगढ़ समेत लगभग सभी हाईकोर्ट थे. कई बार वह एक ही दिन में कई ईमेल भेजता था और संबंधित राज्यों के पुलिस अधिकारियों को भी इन मेल में टैग करता था, ताकि धमकी का असर बढ़े और तुरंत प्रतिक्रिया हो.
दिल्ली हाईकोर्ट को ही उसने महीनों में 50 से ज्यादा फर्जी ईमेल भेजे. इनमें अदालत परिसर में बम होने, इमारत खाली कराने और विस्फोट की चेतावनी जैसे दावे किए जाते थे. कुछ ईमेल में अंतरराष्ट्रीय आतंकी कनेक्शन का भी जिक्र किया गया.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने फर्जी ईमेल आईडी और कई मामलों में वीपीएन का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाई. शुरुआती जांच में सामने आया कि वह कानून की पढ़ाई अधूरी छोड़ चुका था.
फरवरी 2026 में इसी तरह का एक मामला उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सामने आया था, जहां जिला जज की आधिकारिक ईमेल आईडी पर बम धमकी के कई ईमेल भेजे गए.
जांच में सामने आया कि आरोपी विशाल रंजन ने वीपीएन, प्रॉक्सी सर्वर और एन्क्रिप्टेड ईमेल सेवाओं का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाई थी. उसने कोर्ट परिसर और पुलिस लाइन गेट को उड़ाने की धमकी देते हुए पैसे की मांग भी की थी. बाद में एटीएस ने तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी आजमगढ़ से को गिरफ्तार कर लिया.
हवाई अड्डों और विमानों को भी बनाया गया निशाना
इस अवधि में देशभर के हवाई अड्डों और विमानों को भी बड़ी संख्या में धमकी मिली है. केवल हैदराबाद एयरपोर्ट को पंद्रह महीनों में करीब पंद्रह बार धमकी मिली है. कई मामलों में विमानों को बीच रास्ते से ही वापस लौटाना पड़ा या दूसरे शहरों में उतारना पड़ा, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा झेलनी पड़ी.
जून 2025 में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से हैदराबाद आ रही लुफ्थांसा की एक उड़ान को बम की धमकी मिलने के बाद उड़ान भरने के करीब दो घंटे बाद ही वापस लौटना पड़ा.
यह विमान भारतीय हवाई क्षेत्र में दाखिल भी नहीं हुआ था. इसी महीने ब्रिटेन के बर्मिंघम से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान को भी सुरक्षा कारणों से सऊदी अरब के रियाद में उतारना पड़ा, जहां पूरी जांच के बाद ही आगे की यात्रा की अनुमति दी गई.
कर्नाटक के हुबली हवाई अड्डे पर भी एक फर्जी धमकी के बाद अफरा-तफरी मच गई, सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया, हालांकि वहां कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला. अधिकारियों के मुताबिक, इसी तरह के ईमेल एक साथ देश के कई हवाई अड्डों को भेजे गए थे.
नवंबर 2025 में जेद्दाह से हैदराबाद आ रही इंडिगो की एक उड़ान को धमकी के बाद मुंबई मोड़ना पड़ा. सुरक्षा जांच के बाद विमान को आगे बढ़ने की अनुमति दी गई. इसी तरह बहरीन से हैदराबाद आ रही गल्फ एयर की उड़ान को भी एहतियातन मुंबई डायवर्ट किया गया, जहां जांच के बाद उसे गंतव्य के लिए रवाना किया गया.
दिसंबर 2025 में भी ऐसे कई मामले सामने आए. मदीना से हैदराबाद आ रही इंडिगो की एक उड़ान को अहमदाबाद उतारना पड़ा, जबकि कुवैत से हैदराबाद आ रही दूसरी उड़ान को मुंबई डायवर्ट किया गया. हर बार सुरक्षा एजेंसियों ने मानक प्रक्रियाओं के तहत जांच की, लेकिन किसी भी मामले में कोई विस्फोटक नहीं मिला.
इन घटनाओं से साफ है कि बम की झूठी धमकियां केवल डर फैलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये नागरिक उड्डयन व्यवस्था, सुरक्षा संसाधनों और आम यात्रियों के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही हैं. बार-बार होने वाली इन घटनाओं के बावजूद ज्यादातर मामलों में आरोपियों तक पहुंच पाना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
मार्च 2025 में संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 से लेकर फरवरी 2025 के अंत तक, एयरलाइन कंपनियों को मिली धमकियों की कुल संख्या 833 रही है.
यदि वर्ष-दर-वर्ष देखें, तो 2020 में महज़ चार धमकी भरे संदेश दर्ज हुए. 2021 में यह संख्या घटकर दो रह गई. 2022 में कुल तेरह धमकियां मिलीं, जबकि 2023 में यह बढ़कर इकहत्तर हो गई. सबसे अधिक उछाल 2024 में आया, जब सात सौ अट्ठाईस धमकियां दर्ज की गईं.
2025 के केवल पहले दो महीनों (जनवरी-फरवरी) में ही पंद्रह धमकियां आ चुकी थीं.
कंपनी-वार बात करें तो सबसे अधिक प्रभावित एयर इंडिया रही, जिसे कुल 179 धमकियां मिलीं. उसके बाद इंडिगो का नंबर आता है, जिसे 217 धमकियों का सामना करना पड़ा. विस्तारा को 161, अकासा को 85, और स्पाइसजेट को 46 धमकियां प्राप्त हुईं.
इसके अलावा गो फर्स्ट, एलायंस एयर, एयर इंडिया एक्सप्रेस, स्टार एयर, और कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों जैसे एमिरेट्स, अमेरिकन एयरलाइंस, एअरोफ़्लोत, एतिहाद, और लुफ़्थांसा को भी एक-एक या कुछ धमकियां मिलीं.
अस्पताल और कलेक्ट्रेट
इस अवधि में अस्पताल और कलेक्ट्रेट के 18-18 मामले सामने आए हैं. छह बार तो केवल कोयंबटूर कलेक्ट्रेट को ही धमकी मिल गई है. पहली नज़र में कलेक्ट्रेट को धमकी मिलना, छोटा मामला लग सकता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके परिणाम गंभीर हो रहे हैं, उदाहरण के लिए मार्च 2025 की इस घटना को देखिए.
एक दोपहर तिरुवनंतपुरम के पेरुरकदा सरकारी अस्पताल में सत्तर से अधिक लोग मधुमक्खी के काटने के बाद इलाज के लिए पहुंचे. ये सभी लोग उस दिन शहर के कलेक्ट्रेट में थे, जिसे उसी दोपहर बम धमाके का एक ईमेल मिला था. दावा किया गया था कि परिसर के पाइपों में आरडीएक्स रखा गया है. बम स्क्वॉड आदि मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों को हटाने के लिए पुलिस की मदद ली गई.
हालांकि वहां से कोई विस्फोटक तो नहीं मिला लेकिन इस अफ़रातफ़री भरी कार्रवाई में मधुमक्खियों का एक छत्ता छिड़ गया, जिसके बाद 79 लोगों घायल हो गए जिनमें से 72 को प्राथमिक चिकित्सा दी गई वहीं सात को गंभीर हाल के चलते दूसरे अस्पताल भेजा गया. इन घायलों में कलेक्ट्रेट में काम से आए लोगों के अलावा सरकारी अधिकारी, पुलिसकर्मी, यहां तक कि कुछ पत्रकार भी शामिल थे.
कई मामलों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश
बम की झूठी धमकियों के इन मामलों में एक चिंताजनक पैटर्न यह भी सामने आया है कि कई बार धमकी देने वालों ने जानबूझकर मुस्लिम नामों या आतंकी संगठनों का सहारा लिया.
जनवरी 2025 में बिहार के पूर्णिया से गिरफ्तार एक युवक ने प्रयागराज के कुंभ मेले को उड़ाने की धमकी दी थी. उसने सोशल मीडिया पर ‘नासिर पठान’ नाम का इस्तेमाल किया था. बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी आयुष कुमार जायसवाल था, जिसने फर्जी पहचान बनाकर यह धमकी दी थी. धमकी देने के बाद वह नेपाल भी चला गया था और पुलिस ने उसे वहां से जुड़े संभावित संपर्कों के आधार पर जांच के दायरे में लिया.
इसी तरह नवंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक युवक ने पुलिस को फोन कर खुद को लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य बताते हुए शहर में सिलसिलेवार धमाकों की चेतावनी दी. पुलिस की जांच में यह दावा पूरी तरह फर्जी निकला और आरोपी आकाश तोमर को गिरफ्तार कर लिया गया.
दिसंबर 2025 में बेंगलुरु में पुलिस आयुक्त को भेजे गए एक धमकी भरे ईमेल में ‘जैश-ए-मोहम्मद’ का नाम लेकर हवाई अड्डे और कई मॉल को निशाना बनाने की बात कही गई थी. ईमेल में धार्मिक संदर्भों का इस्तेमाल करते हुए इसे आतंकी हमले का रूप देने की कोशिश की गई थी. यह ईमेल ‘मोहित कुमार’ नाम से भेजा गया था. जांच में यह भी एक फर्जी धमकी साबित हुई थी.
ये घटनाएं दिखाती हैं कि बम की झूठी धमकियां केवल शरारत या व्यक्तिगत कारणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई बार इन्हें इस तरह गढ़ा जाता है कि वे किसी विशेष समुदाय या आतंकी संगठन से जुड़ी प्रतीत हों. इससे न केवल सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ता है, बल्कि समाज में अनावश्यक डर और अविश्वास का माहौल भी बनता है.
किन मामलों में पकड़े जाते हैं आरोपी?
ज्यादातर बम धमकी के मामलों में आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर ही रह जाते हैं, लेकिन जिन मामलों में गिरफ्तारी होती है, उनमें एक स्पष्ट पैटर्न दिखता है- निशाना अक्सर बड़े और हाई-प्रोफाइल लोग होते हैं.
फरवरी 2025 में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की कार को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. अगस्त 2025 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर स्थित आवास को उड़ाने की धमकी देने वाला आरोपी भी पुलिस के हत्थे चढ़ा. इसी तरह जयपुर में मुख्यमंत्री कार्यालय को निशाना बनाने वाले संदिग्ध को भी हिरासत में लिया गया.
मनोरंजन जगत भी इससे अछूता नहीं रहा. अक्टूबर 2025 में अभिनेता विजय के घर बम होने की सूचना देने वाले शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जबकि दिसंबर 2025 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के आवास को लेकर झूठी धमकी देने वाला आरोपी भी पकड़ा गया.
इन मामलों से साफ है कि जब धमकी सीधे सत्ता, राजनीति या चर्चित हस्तियों से जुड़ी होती है, तो जांच एजेंसियां ज्यादा तेजी से सक्रिय होती हैं और आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिलती है.
इन 15 महीनों का निचोड़ बताता है कि बम की झूठी धमकी अब केवल शरारत नहीं रह गई है, बल्कि एक ऐसा साधन बन गई है, जिससे बिना किसी वास्तविक विस्फोट के भी व्यापक असर पैदा किया जा सकता है.
हर बार जब कोई धमकी आती है, तो पूरा सिस्टम सक्रिय होता है, और हर बार जब कुछ नहीं मिलता, तब भी उस प्रक्रिया की कीमत चुकानी पड़ती है.
यही इस पूरे सिलसिले का सबसे खतरनाक पहलू है, डर अब बिना किसी बम के भी काम कर रहा है.
इन मामलों पर विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
द वायर हिंदी से बातचीत में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विक्रम सिंह ने कहा, ‘देखिए यह समस्या आज की नहीं है. पहले भी ऐसा होता रहा है. पहले लैंडलाइन टेलीफोन और पत्र आदि से आते थे. अब ईमेल से आ रहे हैं. शरारती तत्व इस काम को ज़माने से करते आ रहे हैं. अब क्योंकि पुलिस के पास यह विकल्प नहीं है कि ऐसी धमकियों को नजरअंदाज करे, बल्कि प्रत्येक धमकी को ऐसे ही लिया जाता है, जैसे कि वह वास्तविक है. जब भी धमकी मिलती है, प्रशासन को तलाशी समेत अन्य सभी कार्रवाइयों को करना ही पड़ता है. इसमें जनशक्ति और धन दोनों खर्च होता है. लेकिन इसका कोई विकल्प नहीं है. यह करना हो होगा.’
विक्रम सिंह कहते हैं कि भले ही धमाके न हुए हों, लेकिन इस तरह की धमकी भी अपराध की श्रेणी में आते हैं. बाद में अदालत अन्य पहलुओं पर चर्चा करेगी. लेकिन पुलिस का काम है, मामले की तह तक जांच कर चार्जशीट फाइल करना.
पूर्व पुलिस महानिदेशक यह मानते कि इस तरह की धमकियों से निपटने के लिए किसी विशेष कानून की जरूरत है. वह कहते हैं, ‘कानून पर्याप्त है, बस जरूरत है, कुशल इन्वेस्टिगेशन के जरिए ज्यादा से ज्यादा अभियुक्तों को पकड़ने की. यह ध्यान रखिए कि बिना दंड के इस तरह के मामले बंद नहीं होने वाले हैं.
Source: The Wire







