मुस्लिम तंजीमों का कांग्रेस पर दबाव, रवैये और फैसलों पर सवाल
सियासी नाराज़गी में इज़ाफ़ा, विकल्प पर गौर की चेतावनी
कर्नाटक के विभिन्न ज़िलों से ताल्लुक रखने वाली कई मुस्लिम तंजीमों, इदारों और इत्तेहादों के नुमाइंदों ने कांग्रेस क़ियादत को एक मुश्तरका ख़त भेजकर राज्य सरकार और पार्टी के मुस्लिम बिरादरी के साथ रवैये पर सख़्त नाराज़गी और तश्वीश का इज़हार किया है।
यह मुश्तरका मक्तूब राज्यसभा में विपक्ष के नेता और एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, एआईसीसी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक डॉ. सैयद नासिर हुसैन और एआईसीसी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी को भेजा गया है।
ख़त में कहा गया है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कर्नाटक के मुसलमानों ने संवैधानिक मूल्यों और सेक्युलर निज़ाम की हिफ़ाज़त के लिए एकजुट होकर कांग्रेस को भरपूर समर्थन दिया, जिससे पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला। लेकिन सत्ता में आने के बाद से मुस्लिम बिरादरी को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है और सरकार व प्रशासन में मुनासिब नुमाइंदगी नहीं दी जा रही।
तंजीमों ने इल्ज़ाम लगाया कि सरकारी ओहदों, नियुक्तियों और पॉलिसी मेकिंग में मुसलमानों को नज़रअंदाज़ किया गया है और चुनावी वादे भी पूरे नहीं किए गए। कई बार तवज्जो दिलाने के बावजूद कोई ठोस पेशरफ़्त नहीं हुई।
ख़त में दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव का हवाला देते हुए कहा गया कि टिकट वितरण और वोटिंग के बाद पार्टी के रवैये ने मुस्लिम बिरादरी को मायूसी में डाल दिया है। जायज़ मांगों को नज़रअंदाज़ किया गया और टिकट मांगने को ही जुर्म समझा गया।
आगे कहा गया कि चुनाव के बाद पार्टी के पुराने और वफ़ादार मुस्लिम रहनुमाओं के खिलाफ अचानक सख़्त कार्रवाई की गई और बिना किसी वजह या मौका दिए उन्हें ओहदों से हटा दिया गया, जिससे बिरादरी में बेचैनी और ग़ुस्सा बढ़ा है।
तंजीमों ने यह भी सवाल उठाया कि दूसरे प्रभावशाली तबकों के खिलाफ कार्रवाई न होने के बावजूद मुस्लिम रहनुमाओं पर ही सख़्त कदम क्यों उठाए जा रहे हैं, जिससे भेदभाव का तास्सुर मज़बूत हो रहा है।
ख़त में कहा गया कि यह मामला सिर्फ कुछ अफ़राद का नहीं बल्कि पूरी मुस्लिम बिरादरी की इज़्ज़त और वक़ार से जुड़ा है और एकतरफ़ा फैसले क़ाबिले-क़ुबूल नहीं हैं। तक़रीबन 90% वोट मिलने के बावजूद ऐसा रवैया नाइंसाफ़ी के बराबर है।
मुश्तरका ख़त में कांग्रेस क़ियादत से मांग की गई है कि वह इस मामले पर फ़ौरन संजीदगी से गौर करे, बिरादरी के जज़्बात को समझे, अपनी पॉलिसियों पर पुनर्विचार करे और मुस्लिम बिरादरी को सरकार व पार्टी में मुनासिब नुमाइंदगी दे। साथ ही चुनावी वादों को पूरा करने पर भी ज़ोर दिया गया।
तंजीमों ने चेतावनी दी है कि अगर यही रवैया जारी रहा तो मुस्लिम बिरादरी अपने सियासी विकल्प पर गंभीरता से गौर करने पर मजबूर हो सकती है।
Source: Haqeeqat Times (Translated in hindi)

