हम जो खा रहे हैं, क्या वो महफूज़ है?

मार्केट-प्रधान मौजूदा इकनॉमिक और सोशल सिस्टम में हम जो खाना खाते हैं, जो पानी पीते हैं और जिस हवा में सांस लेते हैं—वो कितने महफूज़ हैं? ये सवाल बार-बार सामने आ रहा है। आम लोगों की सेहत से ज़्यादा मुनाफे को तरजीह देने वाली खेती और फूड सप्लाई सिस्टम लोगों को मुख़्तलिफ़ बीमारियों की तरफ धकेल रही है।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के आसपास बिकने वाली एक-चौथाई से ज़्यादा सब्ज़ियां सेहत के लिहाज़ से महफूज़ नहीं पाई गई हैं। इनमें सीसा (लेड) और कीटनाशकों की मात्रा खतरनाक हद से ज़्यादा है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट ने इस पर गंभीर फिक्र जताई है। खेत से लेकर मार्केट तक इन सब्ज़ियों पर सेफ्टी का कोई ठोस इंतज़ाम नहीं है, जो सिस्टम की बड़ी नाकामी को दिखाता है।

‘नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल’ के हुक्म पर हुए स्टडी में 72 सैंपल में से 19 में तय सीमा से ज़्यादा सीसा पाया गया। एक ऑर्गेनिक बैंगन में तो तय मापदंड से 20 गुना ज़्यादा प्रदूषण मिला। बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में इतनी बड़ी तादाद में जहरीली सब्ज़ियों का बिना जांच मार्केट तक पहुंचना इंतज़ामी नाकामी का साफ सबूत है।

इस मसले का ताल्लुक पानी के संकट से भी है। CPCB की टीम ने 26 मिट्टी के सैंपल लिए, जिनमें से 23 में प्रदूषण पाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ज़मीन के नीचे पानी की कमी के चलते किसान बिना ट्रीटमेंट वाले गंदे पानी का इस्तेमाल खेती में कर रहे हैं।

जांच में ये भी सामने आया कि कई सब्ज़ियों में कीटनाशकों की मात्रा तय हद से ज़्यादा है। इनमें ‘ऑर्गेनोफॉस्फेट’ ग्रुप का बेहद ज़हरीला केमिकल ‘मोनोक्रोटोफॉस’ भी शामिल है, जिसे 2023 में भारत में बैन किया जा चुका है। इसके बावजूद इसका इस्तेमाल जारी रहना सिस्टम की लापरवाही, पुराने स्टॉक और गैरकानूनी सप्लाई को दिखाता है।

भारी धातुओं और कीटनाशकों का मेल बेहद खतरनाक होता है। ज़्यादा सीसा दिमाग और किडनी को नुकसान पहुंचाता है और दिल की बीमारियों का सबब बन सकता है। वहीं कीटनाशक नसों पर असर डालते हैं, कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म दे सकते हैं और हार्मोन सिस्टम को भी बिगाड़ सकते हैं।

हालांकि, मार्केट से लाई गई सब्ज़ियों और फलों को अच्छे से धोना, छिलका उतारना और मौसमी चीज़ों का इस्तेमाल कुछ हद तक खतरा कम कर सकता है, लेकिन पौधों के अंदर जमा ज़हर को पूरी तरह हटाना मुमकिन नहीं है। इसलिए इस मसले का हल आसान नहीं है। सरकार को सख्त कदम उठाने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता भी बढ़ानी होगी।

ये स्टडी सिर्फ बेंगलुरु के कुछ हिस्सों तक सीमित है, लेकिन इससे मसले की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। सरकार को फौरन कदम उठाकर लोगों को महफूज़ फल और सब्ज़ियां मुहैया करानी चाहिए।

जहां गंदे पानी से खेती हो रही है और निगरानी का अभाव है, वहां हालात और भी खराब हो सकते हैं। ये मसला किसी एक इलाके तक सीमित नहीं है। शहरीकरण और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन बढ़ने के साथ ये समस्या और गंभीर हो सकती है।

जम्हूरी निज़ाम में लोगों को महफूज़ माहौल देना सरकार की बुनियादी ज़िम्मेदारी है। साफ पानी, सुरक्षित खाना और साफ हवा हर नागरिक का हक़ है। इसमें किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और सरकार को बिना किसी दबाव के अवाम के हक में ठोस कदम उठाने चाहिए।