भारत में दहेज के नाम पर अब भी बेटियों की जान जा रही है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, साल 2024 में देशभर में दहेज मौत के 5,737 मामले दर्ज किए गए। यानी हर रोज़ औसतन 16 महिलाएं दहेज की भेंट चढ़ रही हैं।
पिछले कुछ दिनों में भी दहेज प्रताड़ना से जुड़ी कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं। ग्रेटर नोएडा में दीपिका नगर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई, जबकि परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज के लिए परेशान करने का इल्ज़ाम लगाया है। मध्य प्रदेश के भोपाल में तविशा शर्मा के परिवार ने भी उनकी मौत के पीछे दहेज प्रताड़ना को वजह बताया। वहीं ग्वालियर में 21 साल की पालक रजक ने शादी के एक साल के भीतर आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि शादी में कार और 10 तोला सोना देने के बावजूद उसे लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था।
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 में दहेज मौत के 7,466 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 5,737 हुई है। हालांकि आंकड़ों में कमी आई है, लेकिन हालात अब भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले
2024 में दर्ज कुल दहेज मौतों में सबसे ज्यादा 2,038 मामले उत्तर प्रदेश से सामने आए, जो देश के कुल मामलों का एक तिहाई से ज्यादा है। इसके बाद बिहार में 1,078 मामले दर्ज हुए। यानी सिर्फ इन दो राज्यों में ही देश के आधे से ज्यादा दहेज मौत के मामले सामने आए हैं।
इसके अलावा मध्य प्रदेश में 450, राजस्थान में 386 और पश्चिम बंगाल में 337 दहेज मौत के मामले दर्ज किए गए।
हर आधे घंटे में एक मामला
दहेज निषेध कानून के तहत दर्ज मामलों की संख्या भी लगातार चिंता बढ़ा रही है। साल 2023 में देशभर में 15,489 मामले दर्ज हुए थे, जो हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा थे। वहीं 2024 में 12,343 मामले दर्ज किए गए। यानी देश में लगभग हर आधे घंटे में दहेज से जुड़ा एक मामला दर्ज हो रहा है।
Source: Vartha Bharathi (Translated in Hindi)

